राजस्थान सरकार का फरमान—रमजान के महीने में रोजेदार कार्मिकों को ड्यूटी से रखा जाए मुक्त

    दिनांक 18-मई-2020   
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पिछले दिनों नवरात्रि पर्व था। इस दौरान अनेक शिक्षक व्रत—उपवास पर थे। लेकिन वाबजूद इसके कांग्रेस सरकार ने व्रत रखने वाले शिक्षकों की बराबर ड्यूटी लगाई। पर अब रमजान के समय वही सरकार अपनी नीति बदलते हुए रोजेदार कार्मिकों को छूट दे रही है

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राजस्थान सरकार को तुष्टीकरण की सरकार कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि सरकार द्वारा अब खुलकर मजहबी भेदभाव किया जाने लगा है। इसकी एक बानगी शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में देखने को मिली है। सरकार ने रमजान माह में रोजेदारों को डयूटी से मुक्त रखने के आदेश दिए हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा ने सरकारी आदेश टृवीट करके बताया कि शिक्षक संगठनों के साथ हुई वीसी में मिले सुझावों के आधार पर निर्णय लिया गया है कि रमजान के महीने में रोजेदार कार्मिकों को डयूटी से मुक्त रखा जाए। मजहब के आधार पर राज्य कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी में छूट देना कांग्रेस सरकार के तुष्टीकरण को उजागर करता है। हालांकि यह पहला मौका होगा जब राजस्थान में मजहब के आधार पर राज्य कर्मचारियों को ड्यूटी में छूट दी गई हो।
गौर करने लायक बात यह है कि पिछले दिनों नवरात्रि पर्व था। इस दौरान अनेक शिक्षक व्रत—उपवास पर थे। लेकिन वाबजूद इसके कांग्रेस सरकार ने व्रत रखने वाले शिक्षकों बराबर ड्यूटी लगाई गई। पर अब रमजान के समय इस सरकार की नीति बदल गई है। रोजेदार कर्मचारियों के लिए निकाले गए आदेश के बाद अब अन्य कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार को नवरात्रि समेत अन्य हिन्दू त्यौहारों पर भी कर्मचारियों को डयूटी में रियायत देनी चाहिए। रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष रियायतें व सुविधाएं देकर सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा रही है।
कांग्रेस सरकार द्वारा किए जा रहे तुष्टीकरण पर पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री एवं अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी कहते हैं कि जब नवरात्रि करने वाले शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है तो फिर रमजान में रोजे रखने वाले शिक्षक की क्यों नहीं ? एक ही विभाग में एक ही प्रकार के कर्मचारियों पर दो नियम लगाना सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति को दर्शाता है। उन्होंने राजस्थान सरकार पर तुष्टीकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा का मीडिया के माध्यम से घेराव किया।
कांग्रेस सरकार का दोहरापन
 
जब कोरोना काल में सरकार पर राशन वितरण में भेदभाव करने जैसे आरोप खुलकर लग रहे हों तो फिर सरकारी योजनाओं के लाभ की बात हो या फिर मुस्लिमों के लिए रियायतों की। कांग्रेस सरकार द्वारा तुष्टीकरण की नीति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिए जा रहे हैं। प्रदेश कोरोना महामारी से जंग लड़ रहा है तो भी कांग्रेस सरकार के नेताओं की मानसिकता तुष्टीकरण के दौर से गुजर रही है। फिर चाहे प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की पहचान छुपाना हो या फिर राहत सामग्री वितरण में भेदभाव या अब रमजान के बहाने मुस्लिमों को छूट देना। राज्य सरकार की इन सब तुष्टीकरण की नीति का नतीजा है कि राजस्थान के दर्जनभर जिलों में कोरोना का भयानक विस्फोट हुआ है। इन सब मामलों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनिया कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष के इशारे पर मुख्यमंत्री गहलोत तुष्टीकरण की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सरकार ने वोट बैंक के लिए लाॅकडाउन व कर्फयू में सख्ती नहीं की, इसका दुष्परिणाम यह निकला कि तबलीगी के मूवमेंट के कारण के प्रदेश के 29 जिलों में संक्रमण फैल गया और सरकार ने इसे रोकने के लिए पर्याप्त जांच तक नहीं कराई। सरकार ने कोरोना रिपोर्ट से तबलीगी का काॅलम तो हटा दिया, लेकिन सीमा सुरक्षा बल व प्रवासी राजस्थानियों के दो नए काॅलम जोड़ दिए। भरतपुर समेत कई जिला कलेक्टरों के रोजेदारों के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने के आदेशों ने साबित कर दिया है कि राजस्थान सरकार अपने शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर तुष्टीकरण पर उतारू हो गई है।