संघ कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा के हत्यारे आतंकी को सुरक्षा बलों ने किया ढेर

    दिनांक 18-मई-2020
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा के हत्यारे ताहिर अहमद समेत एक अन्य आतंकी को डोडा में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया।
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 गत 17 मई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा के हत्यारे ताहिर अहमद समेत एक अन्य आतंकी को जम्मू—कश्मीर स्थित डोडा में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। हालांकि इस मुठभेड़ में एक जवान भी बलिदान हो गया। गौरतलब है कि हिज्बुल मुजाहिदीन संगठन का आतंकी ताहिर अहमद भी उन्हीं आतंकियों में शामिल था, जिन्होंने बीते साल 9 अप्रैल को चंद्रकांत शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जम्मू के आईजीपी मुकेश सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी ताहिर अहमद का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। अब डोडा को आतंकवाद से मुक्त कहा जा सकता है। क्योंकि डोडा-किश्तवाड़ में दोबारा आतंक की शुरूआत और सभी आतंकी गतिविधियों को ताहिर ही अंजाम देता था। उन्होंने बताया कि आतंकी ताहिर के पास से 1 एके-47 राइफल और 2 मैगजीन बरामद किये गए हैं।

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जानकारी के मुताबिक पुलवामा का रहने वाला ताहिर अहमद भट पिछले साल 2019 की शुरूआत में आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। जिसके बाद उसका नाम मार्च, 2019 में बनिहाल में सीआरपीएफ की टीम पर आईडी विस्फोट के समय सामने आया था। हिज्बुल मुजाहिदीन ने उसे चिनाब घाटी में युवाओं को अपने आतंकी संगठन में भर्ती करने और आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने का काम सौंपा था। अप्रैल, 2019 में आतंकी ताहिर ने अपने साथियों के साथ संघ कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा और उनके सुरक्षाकर्मी की हत्या की थी। ताहिर अहमद के मारे जाने से डोडा में हिज्बुल मुजाहिदीन के सभी आतंकी गतिविधियों पर रोक लग गई है, जो सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी है। ताहिर अहमद हिज्बुल मुजाहिदीन के वर्तमान ऑपरेशन कमांडर सैफ का भी करीबी था।
 
कौन थे चंद्रकांत शर्मा जी
किश्तवाड़ निवासी चंद्रकांत शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जम्मू-कश्मीर के प्रांत सह सेवा प्रमुख थे। साथ ही वह किश्तवाड़ जिला अस्पताल में चिकित्सा सहायक के पद पर कार्यरत थे। वह घाटी में आतंक के खात्मे के लिए हमेशा बढ़ चढ़कर कार्य करते थे। चन्द्रकांत जी बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जुड़े थे। जिला, विभाग कार्यवाह सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रांत सह सेवा प्रमुख रहे। उन्होंने संघ का प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण पूरा किया था। उनका परिवार प्रारंभ से ही धार्मिक गतिविधियों व समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय था। चंद्रकांत जी ने आतंकवाद के दौर में भी वहां के स्थानीय समाज का मनोबल बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
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उन्होंने हिन्दुओं को संगठित करने का काम, सेना के साथ सहायता का कार्य बड़ी तन्मयता से किया। सेना के सहयोग के लिए दिन रात तत्पर रहते थे। जिस कारण आतंकियों के निशाने पर थे, उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की गई थी। वे युवाओं के प्रेरणास्रोत थे, लेकिन अपने लिए कठोर थे। पद, प्रतिष्ठा से अलिप्त रहते हुए भी वंचितों, शोषितों, असहायों के लिए वे निरंतर कार्य करते रहे। उन्होंने समाज को साथ लेकर किश्तवाड़ में मंदिर का निर्माण करवाया था और हर साल बैसाखी पर मेले का आयोजन करते थे। उनका अधिकांश समय संघ व समाज के कार्यों में ही लगता था। आतंकवाद के समय हिन्दू रक्षा समिति में भी सक्रिय रहे। डोडा विभाग में निरंतर प्रवास होता था तथा क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक संगठनों से अच्छा संपर्क-संबंध था। इसी कारण वह आतंकियों के निशाने पर थे।
बीते साल 9 अप्रैल के दिन जब वह अस्पताल के ओपीडी से बाहर निकले, उसी समय आतंकवादियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सबसे पहले उनके सुरक्षाकर्मी राजेंद्र कुमार बलिदान हो गए और उसके बाद चंद्रकांत जी को पेट में गोली लगी और वे खून से लथपथ वहीं पर गिर गए। इसी बीच आतंकी वहां से भाग निकले। अस्पताल में भर्ती कराने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।