आर्थिक व व्यावसायिक खेती को अपनाना चाहिए: बाबासाहेब

    दिनांक 19-मई-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 38:-

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आंबेडकर के अनुसार देश में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों पर हो रही खेती बड़ी समस्या है। इससे अधिकांश जमीन बेकार पड़ी रहती है व खाद्य आवक भी अपूर्ण होती है। इसके बदले आर्थिक व व्यावसायिक खेती को अपनाना चाहिए।
डॉ. आंबेडकर के मतानुसार खेती की उत्पादकता केवल जमीन के आधार पर ही नहीं बल्कि अन्य परिबल पूंजी, श्रम व अन्य आवश्यकताओं से भी प्रभावित होती है। उनकी प्रेरणा से ही बाद में लैंड सीलिंग एक्ट को अमल में लाया गया।
खेती के बारे में उनकी सलाह
1 खेती का राष्ट्रीयकरण
2 सामूहिक अथवा सहकारी खेती
3 खेती में खोत पद्धति का उन्मूलन
4 खाद, बीज व सिंचाई सरकार की ओर से हो
5 बजट में खेती के लिए अधिक बजट
6 निजी साहूकारों पर नियंत्रण
डॉ. आंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। नोबेल अवार्ड विजेता भारतीय अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन ने डॉ. आंबेडकर को अर्थशास्त्र में अपने पितातुल्य माना है।