यूपी को छोड़ राजस्थान और महाराष्ट्र की चिंता करे कांग्रेस

    दिनांक 20-मई-2020   
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महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिली—जुली खिचड़ी सरकार है, वहां स्थिति बेहद खराब है मगर जानबूझकर प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में सहायता का ढोंग रचा. प्रियंका वाड्रा को सड़क पर चलते मजदूर सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही दिखाई दिए. राजस्थान और महाराष्ट्र में श्रमिकों की दुर्दशा उन्हें बिल्कुल भी नहीं दिखी.

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महाराष्ट्र में सड़कों पर उतरे प्रवासी मजदूर
 
राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार पलायन रोकने में पूरी तरह विफल रही है. कोरोना महामारी, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा विकराल रूप में है.पूरे भारत के लगभग 40 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज अकेले महाराष्ट्र में है. वहां की सरकार कोरोना का संक्रमण रोकने में विफल होती जा रही है. यही वजह है कि वहां से श्रमिक सबसे अधिक पलायन कर रहे हैं. सवाल यह है कि जब महाराष्ट्र में 40 फीसदी कोरोना संक्रमित हैं और वहां पर कांग्रेस, सरकार में शामिल है तो प्रियंका गांधी, महाराष्ट्र सरकार की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आईं ? वहां पर सड़कों और रेलवे स्टेशन पर श्रमिक बेहाल हैं. मगर प्रियंका गांधी ने क्यों सहायता नहीं की ?लॉक डाउन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने ईंट के भट्ठों पर काम बंद नहीं कराया था जिसकी वजह से विलासपुर (छतीसगढ़) के श्रमिकों को पलायन नहीं करना पड़ा. मगर राजस्थान और महाराष्ट्र में काम करने वाले श्रमिकों ने सबसे ज्यादा पलायन किया. क्या यह राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार की अदूरदर्शिता नहीं थी ? ऐसे में जब राजस्थान और महाराष्ट्र की स्थिति काफी खराब है प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश की ही चिंता क्यों हुई ?
राजस्थान की स्थिति खराब होने के बावजूद वहां की बसों को उत्तर प्रदेश में भेजा गया. साफ़ है कि प्रियंका गांधी इस संकट की घड़ी में राजनीति कर रहीं हैं. उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा कहते हैं “ उत्तर प्रदेश और बिहार आ रहे सबसे ज्यादा श्रमिक पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र से पैदल चलकर आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाने और मजदूरों की मजबूरी पर राजनीति करने की बजाय प्रियंका गांधी को संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए.”

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प्रतिदिन 50 लाख लोगों को रोजगार
जहां एक ओर विपक्ष राजनीति करने में व्यस्त है तो वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए कमर कस ली है. उत्तर प्रदेश में दक्षता के आधार पर हर श्रमिक को कार्य दिया जाएगा. प्रवासी श्रमिक की दक्षता का प्रदेश की बेहतरी में उपयोग हो, इसके लिए उसकी दक्षता, पता और मोबाइल नंबर का विवरण दर्ज किया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए कार्ययोजना बनकर लगभग तैयार है. इस महीने के अंत तक ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा, रोज़गार सृजन का एक बड़ा माध्यम बन जाएगा. 23 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में प्रतिदिन 50 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. गत 12 मई को करीब 36 हज़ार ग्राम रोजगार सेवकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से 225.39 करोड़ रुपये का मानदेय दिया गया. प्रतिवर्ष बेसिक शिक्षा परिषद में 1 करोड़ 80 लाख से अधिक बच्चों का यूनिफॉर्म और स्वेटर बनता है. यह यूनिफॉर्म और स्वेटर बनाने का काम महिला स्वयंसेवी समूहों को दिया जाएगा. ऐसे कई कार्यों के लिए महिला स्वयं सेवी समूहों को प्रेरित किया जायेगा.
श्रमिकों को घर पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता -- योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रवासी कामगारों व श्रमिकों से कहा है कि " वे किसी हालत में पैदल और साइकिल यात्रा न करें. उत्तर प्रदेश सरकार अब तक भारी संख्या में लोगों को वापस लाने में सफल रही है. यह कार्य सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है. पैदल चलने से सुरक्षा व बीमारी दोनों का जोखिम है. प्रवासी कामगारों व श्रमिकों की वापसी को लेकर हर दिन समीक्षा की जा रही है. सभी लोग धैर्य बनाये रखें. दूसरे प्रदेशों में यूपी के जो भी श्रमिक और कामगार हैं. उनकी सुरक्षित घर वापसी हमारी प्रतिबद्धता है. यह सिलसिला मार्च के अंतिम हफ्ते से ही जारी है. सभी श्रमिकों की घर वापसी तक यह जारी रहेगा. जिस तरह से घर वापसी का हमारा यह कार्य चल रहा है, उम्मीद है कि श्रमिक शीघ्र ही अपने-अपने घर पर होंगे. दूसरे राज्यों की सरकारों से अपने प्रदेश के श्रमिकों की जनपदवार सूची उपलब्ध उपलब्ध कराने को कहा गया है. राज्यों से सूची मिलते ही हम अपने प्रदेश के लोगों को लाने की तुरंत व्यवस्था कर रहे हैं."
कोरोना अस्पतालों में बेड की संख्या 1 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य
प्रदेश में अब 1,884 एक्टिव केस हैं. उपचार के बाद 1504 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और उन्हें घर भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश में पूल टेस्ट भी शुरू कर दिया गया है. आइसोलेशन वार्ड में 1,953 लोगों को और क्वारंटीन सेंटर में 9,003 लोगों को रखा गया है. उत्तर प्रदेश में 12 हजार से अधिक क्वारंटीन सेंटर बनाये गए हैं. 50 हजार से अधिक प्रशिक्षित चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टॉफ को तैनात किया गया है. कोरोना से लड़ाई को और मजबूती देते हुए इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर सपोर्ट (ईसीसीएस) नेटवर्क की स्थापना की गई है. इस सिस्टम के माध्यम से कोविड व नॉन कोविड अस्पतालों और डाक्टरों को चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा. अगर किसी अस्पताल के डॉक्टर कोविड-19 के लक्षण नहीं जानते हैं, इसके इलाज में पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं रखते हैं और सलाह की आवश्यकता होती है तो ईसीसीएस टीम से संपर्क कर सकते हैं. लेवल एक से लेकर लेवल तीन तक के अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को अगर विशेषज्ञों के परामर्श की आवश्यकता है तो वह भी सलाह ले सकते हैं. इसके लिए मंडल स्तर के अस्पतालों को मेंटर की भूमिका में रखा गया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एल—1, एल—2 और एल—3 अस्पतालों में बेड की संख्या को 52 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य दिया था, जिसे पूरा कर लिया गया है. अब मुख्यमंत्री ने 25 हजार अतिरिक्त बेड के साथ इस संख्या को 75 हजार तक करने का लक्ष्य दिया है. इतना ही नहीं इन अस्पतालों को 1 लाख बेड से लैस करने के लिए भी सीएम योगी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है.
आरोग्य सेतु ऐप से 9 कोरोना संक्रमित पहचाने गए
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि “ देश में करोड़ों लोगों द्वारा आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड किया गया है. प्रदेश में भी कई करोड़ लोग इस ऐप का प्रयोग कर खुद को सुरक्षित रखे हुए हैं. अब तक आरोग्य सेतु ऐप की मदद से 2,058 अलर्ट पर कार्रवाई की गई है जिसके बाद 9 लोगों को कोरोना पॉजीटिव के रूप में चिन्हित किया गया. कुल संक्रमित लोगों में 78.5 प्रतिशत पुरूष और 21.5 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं. 60 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग में 8.1 प्रतिशत लोग संक्रमित हुए हैं. वहीं 40 से 60 उम्र वर्ग के 25.5 प्रतिशत, 20 से 40 उम्र वर्ग में 48.7 प्रतिशत और 20 वर्ष से कम 17.7 प्रतिशत लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं. "
तीव्र गति से सड़कों का जाल बिछाया जाय -- केशव प्रसाद मौर्य
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लॉक डाउन के दौरान रूके हुए कार्यों को प्रारंभ कराना सुनिश्चित करें. रेड जोन और हाटस्पॉट एरिया को छोड़कर शेष क्षेत्रों में अनुमति लेकर कार्य शुरू कराया जाय. निर्माण कार्यों से जहां एक तरफ विकास कार्यों को गति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा. सड़कें अच्छी होंगी तो निवेश करने वाले लोग उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे. भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश होने की संभावना है, इसलिए प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाना अत्यंत आवश्यक है. जो सड़कें विशेष मरम्मत के लिए चयनित की गई हैं, उनके रिपेयर का काम अतिशीघ्र शुरू कराया जाए. सभी कार्यों में सोशल डिस्टेन्सिग और भारत सरकार की गाइड लाइन का अक्षरशः पालन करना है. कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत ग्रीन और आरेन्ज श्रेणी को देखते हुए कराए जाने वाले कार्यों की विस्तृत कार्य योजना बनाकर कार्य कराना सुनिश्चित करें. कार्यों में कहीं कोई दिक्कत आ रही हो, तो उसके बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएं. नवीन ग्रामीण संपर्क मार्गों व रिपेयर की जाने वाली सड़कों की पटरियों के किनारे मिट्टी के कार्य को मनरेगा से कराए जाएं. लघु सेतुओं के जो कार्य चल रहे थे, उन्हें भी शुरू कराया जाए तथा भवनों और निरीक्षण भवनों के अनुरक्षण कार्य भी करा लिए जाएं. जो निविदाएं लंबित हैं ,उनका निस्तारण तत्काल सुनिश्चित किया जाए.
किसानों को राहत
भारत सरकार द्वारा मुख्य रूप से किसानों के हित में खरीफ फसल -2020, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के प्राविधानों में संशोधन किए गए हैं. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि “ अभी तक 1 या 2 वर्ष के लिए बीमा कंपनी का चयन करते हुए योजना को प्रदेश में संचालित कराया जाता रहा है. भारत सरकार की संशोधित गाइडलाइन के अनुसार अब योजना को 3 वर्षों तक लागू करते हुए बीमा कंपनियों के कार्य क्षेत्र का आवंटन किया जाएगा. इस संशोधन से यह लाभ होगा कि बीमा कंपनी अपने आवंटित जनपद में कंपनी के स्टाफ की पूर्ण कालीन तैनाती करते हुए योजना का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित कर सकेगी. इसके साथ ही कंपनी द्वारा बैंकों तथा किसान भाइयों से समन्वय स्थापित करते हुए योजना का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सकेगा.”