भारत ने खोला नेपालियों के लिए रास्ता, छिंगरु और तिंकुर गांव के लिए भारत के रास्ते जाने लगे स्थानीय लोग

    दिनांक 26-मई-2020   
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नेपाली गांव छिंगरु और तिंकुर जाने के लिए नेपाल दार्चुला प्रशासन ने भारत के धारचूला प्रशासन के साथ वार्ता कर झूला पुल खुलवाया है ताकि गर्मियों में वहां जाने वाले स्थानीय लोग वहां पहुंच सकें। यह खबर पिछले दिनों दोनों देशों के बीच उपजे तनाव में राहत और सुकून देने वाली है।
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एक तरफ नेपाल लीपूपास को लेकर विवाद पैदा कर रहा है वहीं दूसरी ओर नेपाल में सीमावर्ती नेपाली गांव छिंगरु और तिंकुर जाने के लिए नेपाल दार्चुला प्रशासन ने भारत के धारचूला प्रशासन के साथ वार्ता कर झूला पुल खुलवाया है ताकि गर्मियों में वहां जाने वाले स्थानीय लोग वहां पहुंच सकें।
 
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नेपाल के छंगरु में हाल ही में नेपाल ने हेलीकॉप्टर के जरिये सामान और सैनिक भेज कर अपनी चेक पोस्ट भी बनाई है, लेकिन वहां पैदल जाने का रास्ता, काली नदी किनारे बेहद खतरनाक है और यहां जाने वाले स्थानीय लोग भारत की सीमा से होकर ही वहां जाना सुरक्षित समझते हैं। हर साल भारत के रास्ते जाने की परंपरा कई सालों से है। इस साल कोरोना संकट की वजह से लॉक डाउन होने से सैकड़ो नागरिक, उनके घोड़े खच्चर, मवेशी नेपाल सीमा पर अप्रैल से फंसे हुए थे, जिन्हें कल रास्ता दे दिया गया।

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यह खबर पिछले दिनों दोनों देशों के बीच उपजे तनाव में राहत और सुकून देने वाली है। लेकिन उन लोगों के माथे पर जरूर पसीने लाएगी जो भारत की कूटनीति पर सवाल खड़े कर रहे थे। ऐसे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि नेपाल की भारत के बिना गति नही है। चित्र में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि नेपाल के दार्चुला कस्बे के जहां मकानों की छतों पर सैकड़ों लोग खड़े हो कर इस तनाव के बीच राहत महसूस कर रहे हैं। भारत के व्यास घाटी के लोगों ने भी दिल खोल कर उनका स्वागत किया और उन्हें भोजन राशन उपलब्ध करवाया।