झूठ ही जिनका है धंधा

    दिनांक 26-मई-2020
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पाञ्चजन्य प्रतिनिधि
कई लोग मानते हैं कि कुछ नेता, संगठन और संस्थान फर्जी खबरों का जाल बुनने के लिए देश में कई अखबारों, चैनलों और वेबसाइट को आर्थिक मदद देते हैं। ये लोग अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए झूठे समाचारों का प्रसारण करवाते हैं

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मुख्यधारा की पत्रकारिता से निकले फर्जी समाचार और उनके लिंक पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं, सरकारी और गैर-सरकारी स्रोत और आम पाठकों ने टिप्पणियों सहित नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स इंडिया, दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन, भारत प्रकाशन और पत्रकारिता से संबंधित विभिन्न संस्थानों को भेजे हैं। नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स इंडिया पिछले कई वर्षों से फर्जी समाचारों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रहा है, ताकि देश की पत्रकारिता फर्जी खबरों से मुक्त हो। इसी अभियान के तहत छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं सहित विभिन्न लोगों ने इन समाचारों को लेकर कई तरह के सवाल भी पूछे और अपनी राय भी दी। कुछ का कहना था कि इनमें से कई समाचार फर्जी खबर के दायरे में आते हैं, क्योंकि तथ्यों की दृष्टि से ही गलत साबित हुए। कई खबरें फर्जी निकलीं, तो कई समाचार विरोधाभासी हैं, जिनको लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, तो कुछ को लेकर विवाद हुआ। यह समाचार कोरोना संक्रमण के दौरान अब तक प्रकाश में आए। जानबूझकर सरकारी नौकरी वालों और डॉक्टरों के वेतन पर झूठ फैलाए गए। शायद मनोबल तोड़ने के लिए। बाकी फर्जी खबरें अराजकता फैलाने या कुछ निहित स्वार्थी तत्वों की सहायता के उद्देश्य से गढ़ी गई हैं। सबके साथ संबंधित खबरों का लिंक दिया है। संभव है कि कुछ फर्जी खबरें बाद में बदल या सुधार दी गई हों, लेकिन ऐसी सारी खबरें भ्रम पैदा करने के उद्देश्य में सफल रहीं। एकाध मामले को छोड़कर किसी में भी मीडिया संस्थान ने अपनी गलती मानते हुए खेद तक नहीं जताया। इसलिए लोगों ने इन फर्जी समाचारों को लेकर आपत्तियां दर्ज करार्इं। यहां कुछ ऐसे ही झूठे समाचारों की चर्चा की जा रही है-
‘द हिंदू’ ने छापा कि ट्रेनों से अपने घर भेजे जा रहे मजदूरों से रेलवे 50 रुपया अतिरिक्त वसूल रही है, जबकि मजदूरों से कोई किराया नहीं लिया जा रहा। कुल खर्च में से 85 प्रतिशत केंद्र सरकार और 15 प्रतिशत राज्य सरकारें दे रही हैं। खाना भी सरकार ही दे रही है।
https://news.rediff.com/commentary/2020/apr/06/govt-may-slash-pension-to-employees-to-by-30/2deeed7a3ad875faff2021c82413a5a1?src=whatsapp&pos=livecomm
बीबीसी ने रिपोर्ट दी कि एचसीक्यू निर्यात करने के फैसले का मतलब यह है कि भारत ने अपने यहां गरीबों की अनदेखी की है। बिना किसी आंकड़े या तथ्य के दावा किया कि भारत में एचसीक्यू की कमी पैदा हो सकती है। अगले ही दिन जब ब्रिटेन ने भी भारत से एचसीक्यू मांगा तो बीबीसी ने वह रिपोर्ट ही गायब कर दी।
‘टाइम्स आॅफ इंडिया’ के पोर्टल ‘इंडियाटाइम्स’ ने खबर छापी कि मुंबई में कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टरों के पास एचसीक्यू नहीं है। पूरी तरह तथ्यहीन रिपोर्ट थी। जब अच्छी तरह यह अफवाह फैल गई तब पोर्टल ने खबर को हटा लिया। एचसीक्यू के निर्यात के सरकार के फैसले को लेकर गलतफहमी फैलाने के उद्देश्य से यह झूठ फैलाया गया। टाइम्स आॅफ इंडिया सरकार के खिलाफ ऐसी अफवाहें फैलाने के लिए अक्सर अपने इस पोर्टल का इस्तेमाल करता है। गार्गी कॉलेज हुड़दंग में जयश्रीराम के नारों की फर्जी खबर इसी ने फैलाई थी।
https://www.thehindu.com/news/national/shramik-special-trains-migrant-workers-other-stranded-people-to-pay-50-more-to-get-home/ article31487251.ece https://www.indiatimes.com/trending/human-interest/after-india-exports-hydroxychloroquine-to-us-stock-runs-dry-for-mumbai-doctors-on-frontlines-510542.html
‘हिंदुस्तान’ और ‘पंजाब केसरी’ अखबार ने छापा कि रेलवे अपने घाटे की भरपाई कर्मचारियों का वेतन 35 फीसदी काटकर करेगा। बिना किसी तथ्य के खबर छापी।
https://www.livehindustan.com/national/story-losses-to-railways-due-to-lockdown-allowances-of-13-lakh-employees-will-be-stopped-3158068.html
‘केंद्र सरकार सेवानिवृत्ति की उम्र 50 साल करने जा रही है।’ यह खबर कई छोटे-बड़े पोर्टल पर एक साथ छपवाई गई। यहां तक कि सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी इसे सही मानते हुए प्रतिक्रिया दी। जब तक पीआईबी ने खंडन किया, तब तक यह खबर कई प्रमुख चैनलों और अखबारों में चल गई।
‘रेडिफ’ और कई दूसरे आॅनलाइन पोर्टल के जरिए यह अफवाह उड़ाई गई कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन 30 प्रतिशत कम की जा रही है। पीआईबी ने खंडन किया, लेकिन तब तक बहुत देरी हो चुकी थी। ज्यादातर ने यह फर्जी खबर अब भी नहीं हटाई है।
https://news.rediff.com/commentary/2020/apr/06/govt-may-slash-pension-to-employees-to-by-30/2deeed7a3ad875faff2021c82413a5a1?src=whatsapp&pos=livecomm
20 अप्रैल को न्यूज पोर्टल ‘स्क्रोल’ और ‘न्यूजडी’ ने एक वीडियो के जरिए दावा किया कि बिहार के जहानाबाद में लॉकडाउन के कारण लोग चूहे खाने को मजबूर हैं। बाद में पता चला कि रिपोर्टर ने बच्चों को ऐसा बोलने को कहा था। उनके घर में पर्याप्त खाना था।
https://scroll.in/video/959686/we-are-eating-frogs-say-children-in-jehanabad-bihar-in-this-video
वाराणसी के एक स्थानीय अखबार ‘जनसंदेश टाइम्स’ ने छापा कि वहां मुसहर जाति के लोग घास खाने को मजबूर हैं। एक फोटो छापी, जिसमें कुछ लोग घास जैसा खा रहे थे। जांच में पता चला कि वो चने की झाड़ थी, जो उन्होंने अपने ही खेत से तोड़ा था।
https://twitter.com/CPism/status/1243251251606781952?s=20
एनडीटीवी ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के लोग लॉकडाउन में सांप खाने को मजबूर हैं। जब केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट करके विरोध किया तब खबर बदल दी।
भदोही में भुखमरी के कारण एक महिला ने अपने 5 बच्चों को गंगा में डुबो दिया। आईएएनएस ने ये झूठ फैलाया था। बिना जांच के ‘आउटलुक’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘बीबीसी’ वगैरह ने प्रकाशित किया।
https://twitter.com/bhadohipolice/status/1249578029182889984
‘एबीपी माझा’ ने ‘ब्रेकिंग न्यूज’ चलाई कि यूपीएससी की सारी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। पीआईबी ने इसका खंडन किया।
https://pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=202268
‘कारवां’ पत्रिका ने छापा कि मोदी सरकार ने आईसीएमआर की सलाह के बिना लॉकडाउन का एलान कर दिया।
https://caravanmagazine.in/government/modi-administration-did-not-consult-icmr-appointed-covid-task-force-before-key-decisions

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झूठे समचारों का एक प्रतीकात्मक चित्र
आरोग्य सेतु एप शुरू होने के बाद से ही कई देसी-विदेशी प्रकाशनों के जरिए यह झूठ फैलाया गया कि इससे जासूसी हो सकती है, जबकि ऐसा कहने का कोई तकनीकी आधार नहीं है।
https://www.npr.org/sections/goatsandsoda/2020/04/12/828843214/an-indian-state-tells-quarantined-folks-a-selfie-an-hour-will-keep-the-police-aw
27 मार्च को एनडीटीवी ने खबर दी कि अगले 3 महीने में भारत के 25 करोड़ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाएंगे। ऐसा जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के किसी अध्ययन के आधार पर दावा किया गया। बाद में पता चला कि यूनिवर्सिटी के नाम का गलत इस्तेमाल करके झूठा अध्ययन तैयार किया गया था, ताकि भारत में डर का माहौल पैदा किया जा सके।
https://twitter.com/JohnsHopkins/status/1243273073756901383?s=20
27 मार्च को न्यूज पोर्टल ‘क्विंट’ ने डॉक्टर गिरधर ज्ञानी नाम के किसी व्यक्ति से बातचीत के आधार पर दावा किया कि भारत स्टेज-3 में पहुंच चुका है। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति डॉक्टर नहीं, बल्कि पीएचडी वाला डॉक्टर है। उसने खंडन भी किया कि मैंने रिपोर्टर से बातचीत में ऐसी कोई बात नहीं बोली थी।
https://www.thequint.com/news/india/coronavirus-covid-19-india-in-stage-3-community-transmission-says-dr-gyani-task-force-for-covid-19-hospitals
‘एबीपी माझा’ चैनल ने रिपोर्ट दिखाई कि मुंबई से ट्रेनें चलने जा रही हैं। जिसके बाद 15 अप्रैल को मुंबई में बांद्रा स्टेशन पर भीड़ लगी। इस घटना का एक बड़ा कारण ‘स्टार माझा’ को भी माना जा रहा है।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘बीबीसी’ ने खबर छापी कि अमदाबाद में सरकारी अस्पताल में हिंदुओं और मुसलमानों को अलग-अलग रखा जा रहा है। तथ्यहीन और शरारतपूर्ण खबर थी। इसका दुनियाभर में खूब प्रचार कराया गया और इसे भारत में अल्पसंख्यकों पर मजहबी अत्याचार का सबूत बताया गया। मजहबी आजादी पर एक अमेरिकी संस्था ने भी इस पर ट्वीट किया था।
https://indianexpress.com/article/coronavirus/ahmedabad-covid-19-coronavirus-hospital-ward-6363040/
‘दैनिक जागरण’ ने 14 अप्रैल को आगरा के सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर की तस्वीर छापी कि उसके पास पीपीई किट नहीं है। बाद में पता चला कि वह डॉक्टर कोविड के लिए नहीं था। उसके लिए किट की जरूरत नहीं थी। जानबूझकर दुष्प्रचार की मंशा से वह फोटो खींची गई थी।
https://twitter.com/OfficeOfDMAgra/status/1249946929946955776?s=20
पीटीआई ने 9 अप्रैल को दिल्ली में तब्लीगी जमात के व्यक्ति की ‘मॉब लिंचिंग’ में मौत की फर्जी खबर चलाई।
https://www.opindia.com/2020/04/pti-fake-news-mehboob-ali-killed-coronavirus-spread-delhi-alive/
‘द वायर’ ने छापा कि योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रामनवमी मेला लगेगा, क्योंकि भगवान राम लोगों की कोरोना वायरस से रक्षा करेंगे, जबकि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा था।
https://twitter.com/svaradarajan/status/1244704844264247296?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1245226821643194368&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.opindia.com%2F2020%2F04%2Fsiddharth-varadarajan-tablighi-jamaat-fake-quote-yogi-adityanath-ayodhya-mela-coronavirus%2F
‘दैनिक भास्कर’, ‘एबीपी न्यूज’ समेत कई मीडिया संस्थानों ने उद्योगों का लाखों-करोड़ों रुपये कर्ज माफ करने का झूठ फैलाया।
‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘बीबीसी’ और कई न्यूज पोर्टल ने छापा कि तेलंगाना में एक हिंदू बेटे ने जब अपनी मां का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया तो एक मुस्लिम परिवार ने पूरे रीति-रिवाज के साथ यह जिÞम्मेदारी संभाली। उस महिला के बेटे का बयान सामने आया, जिसने तस्वीरों और दूसरे दस्तावेजों के साथ यह बताया कि अंतिम संस्कार तो उसी ने किया था, न कि किसी अन्य व्यक्ति ने। जब पड़ताल हुई तो पता चला कि पड़ोस में रहने वाले आम आदमी पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति ने मीडिया की सहायता से यह झूठ फैलाया। इस झूठ के कारण महिला के बेटों को समाज में तरह-तरह के तानों का सामना करना पड़ा।
https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/five-muslim-men-organise-last-rites-of-hindu-man-shunned-by-neighbours/articleshow/75242735.cms
ऐसे तथ्यहीन समाचार फैलाने वालों की मंशा ठीक तो कतई नहीं लगती है। इसलिए जब भी कोई शंका हो उसे तुरंत जांच करने की कोशिश करनी चाहिए