कोरोना महामारी: लोग मर रहे हैं दिल्ली सरकार झूठ बोल रही है

    दिनांक 27-मई-2020   
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26 मई को दिल्ली सरकार ने कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 288 बताई है। जबकि शमशान और ​कब्रिस्तान से मिलने वाले आंकड़े और निगम के आंकड़े बिल्कुल अलग हैं। खुद डॉक्टर भी बोल रहे हैं कि दिल्ली सरकार सच छिपा रही है

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विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण महामारी से निपटने में दिल्ली सरकार पूरी तरह फेल साबित हो रही है। कोरोना से होने वाली मौत की गलत जानकारी देने के साथ ही कोरोना के इलाज की सुविधा को लेकर भी सरकार कटघरे में है। दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि दिल्ली में 14 हजार कोरोना मरीजों के एवज में 3829 बेड उपलब्ध हैं, जिसमें से अभी केवल 1478 बेड पर मरीजों को भर्ती किया गया है। जबकि 2351 बेड अभी खाली हैं। हाल ही में सरकार ने पचास बेड से अधिक सभी नर्सिंग होम के बीस प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिए संरक्षित करने के लिए भी कहा है, सरकारी अस्पतालों के बेड खाली होने के बावजूद निजी अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए भेजा जा रहा है। जहां कोविड के इलाज का तीन से चार लाख रुपए का बिल मरीजों को देना पड़ रहा है।
दिल्ली सरकार के आंकड़े और हकीकत
24 मई दिन रविवार को दिल्ली में कोरोना से एक दिन में होने वाली सबसे अधिक 30 मौत दर्ज की गईं। आठ मई को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में कोरोना से होने वाली मौत का सरकारी आंकड़ा केवल पांच मरीजों का बताया गया, जबकि अस्पताल के नोटिस बोर्ड में आठ मई तक कोरोना की वजह से अकेले लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में 55 लोगों के मौत होने की बात सामने आई।
शमशान और ​​कब्रिस्तान से मिले चौंकाने वाले आंकड़े

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कोरोना के चलते होने वाली मौतों से संबंधित दिल्ली सरकार के आंकड़े दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों से भी मेल नहीं खाते हैं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम और उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा क्षेत्र में आने वाले छह प्रमुख श्मशान गृह के आंकड़ों के अनुसार निगम द्वारा सभी छह अंतिम संस्कार केन्द्र पर 16 मई तक 426 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का अंतिम संस्कार किया गया या उन्हें दफनाया गया। दिल्ली आईटीओ स्थित जदीदी कब्रिस्तान अल इस्लाम के केयर टेकर मोहम्मद शमीन ने बताया कि हम यहां रोजाना तीन से चार कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मृत शरीर दफना रहे हैं, मंगलवार को दोपहर 12 बजे तक दो कोरोना मृतक की सूचना हम तक पहुंच चुकी है। शमीम ने बताया कि लॉकडाउन शुरू होने के पहले दिन से अब तक हम यहां तकरीबन 150 कोरोना मृतकों को दफना चुके हैं।
निगम बोध घाट पर सेवा कार्य में लगे समाजसेवी पी सुमन गुप्ता ने बताया कि सामान्य मृतकों के अलावा यहां रोजाना चार से पांच कोरोना से मरने वालों के शव पहुंच रहे हैं। सरकार निश्चित रूप से मौत के आंकड़े गलत बता रही है।
अस्पताल से अंतिम निवास तक मरीज को लेकर पहुंचे मेडिकल स्टॉफ के पास खुद को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट भी नहीं होती है। पंजाबी बाग श्मशान घाट 21 मई तक 249 कोरोना पॉजिटिव की मौत, जिसमें केवल 17 संभावित कोरोना मौत के आंकड़े हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार 300 कोरोना मौत अकेले दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में हुई है। कोरोना संक्रमण से मौत के आंकड़ों पर दिल्ली नगर निगम ने विजिलेंस जांच की मांग की है।
डेथ ऑडिट कमेटी के बाद बढ़े मौत के मामले
मई के दूसरे सप्ताह के बाद दिल्ली सरकार के कोरोना मृतक मरीजों की संख्या में अचानक से बदलाव देखा गया। एपिडेमिक डिसीस एक्ट (महामारी बीमारी अधिनियम 1897) सभी निकायों और सरकारों को संक्रमण से होने वाली मौत की जानकारी डेथ ऑडिट कमेटी को नियमित रूप से भेजना अनिवार्य है। पांचजन्य पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार दिल्ली में कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों पर जारी विवाद के बाद 11 से 24 मई तक के बीच के कोरोना मृतकों की संख्या की दोबारा ऑडिटिंग की गईं। 11 मई तक दिल्ली में कोरोना से होने वाली कुल मौत 74 बताई जा रही थीं, जो 13 मई तक बढ़कर 106 हो गईं। 13 मई को एक दिन में कोरोना से 20 मौत दर्ज दिखाई जाती हैं। एक दिन में अचानक मौत के आंकड़े में हुए बदलाव पर दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने स्पष्टीकरण दिया कि हम अस्पतालों से आने वाली जानकारी के बाद ही अधिकृत कोविड मौत की सूचना सार्वजनिक करते हैं। बहरहाल डेथ ऑडिट रिपोर्ट के बाद कुछ हद तक तो मौत के आंकड़े सही आने लगे, लेकिन इस बीच कोरोना जांच के लिए लैब में पहुंचने वाले सैंपल की रिपोर्ट में देरी की जाने लगी। हमारे पास उपलब्ध साक्ष्य के अनुसार दिल्ली में 13-19 मई के बीच कोरोना के कुल 36937 सैंपल जांच के लिए लैब में पहुंचे, जिमसें से 15528 सैंपल की जांच रिपोर्ट 24 घंटे बीत जाने के बाद भी नहीं आई। जबकि इस बावत हाईकोर्ट की गाइडलाइन कहती है कि कोरोना के सैंपल की जांच 24 घंटे के भीतर हो जानी चाहिए।
डॉक्टर खुद बोल रहे हैं सरकार छिपा रही आंकड़े
केन्द्र सरकार के अंर्तगत आने वाले राम मनोहर लोहिया में कोरोना के सबसे अधिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी से जब कोरोना पॉजिटिव और कोरोना से होने वाली मौत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम नियमित तौर पर सभी जानकारी दिल्ली सरकार को भेज रहे हैं, बावजूद इसके हमारे द्वारा दी गई जानकारी और सार्वजनिक की गई जानकारी में काफी अंतर है। मार्च महीने से अब तक राममनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना के कुल 528 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं, जिसमें से 52 की मौत हो चुकी है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एनएन माथुर ने बताया कि हम नियमित रूप से सभी जानकारी दिल्ली सरकार को पहुंचा रहे हैं। आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार यहां कोविड मरीजों की जांच की जा रही है। जिसमें सीवियर एक्यूट रिस्पेरेटरी सिंड्रोम के मरीजों की भी कोरोना जांच होती है। ऐसे मरीजों की मौत के बाद भी कोरोना का सैंपल लिया जाता है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 22 मई तक कोरोना के 22 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है। इसमें सीवियर एक्यूट रिस्पेरेटरी सिंड्रोम यानि सारी के मरीजों में कोरोना की पुष्टि उनकी मौत के बाद हुई।
लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल द्वारा सार्वजनिक पटल पर जारी की गई सूचना के अनुसार आठ मई तक अस्पताल में कोरोना से कुल 55 मरीजों की मौत बताई गई। हालांकि बाद में दिल्ली सरकार ने रोजाना दिए जाने वाले हेल्थ बुलेटिन में अस्पताल के आधार पर कोरोना मृतकों की जानकारी देना ही बंद कर दिया।
केन्द्र सरकार के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अलावा सफदरजंग अस्पताल को दूसरा सबसे बड़ा कोविड अस्पताल कहा जा सकता है। यहां कोरोना के रोजना तीस से 40 मरीज भर्ती किए गए हैं। अस्पताल में अब तक 70 कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मरने की सूचना है।
नोट- 26 मई 2020 को दिल्ली सरकार ने कोरोना मृतकों की संख्या 288 और पॉजिटिव मामले 14 हजार के पार की आधिकारिक जानकारी दी है।

किस श्मशान घाट पर कितने कोरोना मृतक डेड बॉडी पहुंची

शमशान घाट                                 कोरोना  पॉजिटिव           संभावित कोरोना
निगम बोध घाट                                  191                                 50
मंगोलपुरी कब्रिस्तान :                          10
मंगोलपुरी ईसाई कब्रिस्तान                   01
पंजाबी बाग शमशान घाट                    162                                  15
आईटीओ कब्रिस्तान                             61                                    68
मदनपुर खादर श्मशान घाट:                एक

नोट- दिल्ली नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 17 मई तक जारी की गई  जानकारी के अनुसार।
संभावित कोरोना मृतक की भी जरूरी कोविड जांच
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संभावित कोविड मृतक के नेजल स्वाब यानि नाक के सैंपल लेने को अनिवार्य कर दिया है। संभावित मृतक कोरोना मरीज की डेड बॉडी कोविड जांच के बाद ही मोर्चरी में भी भेजा जा सकेगा। ऐसा इसलिए गया जिससे कोरोना से होने वाली मौतों के सटीक आंकड़े प्राप्त किए जा सके। नई गाइडलाइन के अनुसार संभावित कोविड मरीज की यदि रिपोर्ट आने से पहले मौत हो जाती है तो मोर्चरी में शव को भेजने से पहले उसका नेजल स्बाब या फिर नेजोफायरंगियल लिया जाएगा। जिससे मरीज की मौत के सटीक कारण का पता लगाया जा सके। ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि कोरोना के एसिम्पैटिक मरीजों में शुरूआत के पांच से छह दिन के अंदर कोरोना के किसी भी तरह के पुख्ता लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के समय पांच परिजनों की उपस्थिति के साथ ही लॉ इंफोसमेंट अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है। मृतक कोविड मरीजों का इलेक्ट्रिक रूम से अंतिम संस्कार अनिवार्य बताया गया है। शव का यदि कब्र में संस्कार करना है तो कब्र की गहराई सात से आठ फीट तक अवश्य बताई गई है।
सरकारी बेड खाली तो कोरोना का निजी महंगा इलाज क्यूं?
ईडब्लूएस (आर्थिक रूप से कमजोर) कोटे के मरीजों के इलाज के लिए लंबे समय से काम कर रहे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि हमारे पास रोजाना पांच से छह कॉल ऐसे मरीजों की आ रही हैं जो कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पताल जा रहे हैं तो उन्हें मना कर दिया जा रहा या फिर महंगा इलाज बताया जा रहा है। अशोक अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने 61 निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज के लिए चिन्हित किया है, जिसमें दो हजार बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने के लिए कहा गया है निजी अस्पताल इस आश्य से ईडब्लूएस मरीजों से कोरोना के इलाज के नाम पर महंगा शुल्क नहीं ले सकते हैं। मंगलवार को रात्रि डेढ़ बजे धीरपुर से मैक्स शालीमार बाग में इलाज के लिए पहुंचे चालीस वर्षीय महेन्द्र नाम के मरीज को इमरजेंसी में इलाज नहीं मिला, मरीज का बीते एक साल से डायलिसिस चल रहा है। मरीज को संभावित कोरोना पाया गया, लेकिन सैंपल भी नहीं लिया गया। आईसोलेशन में कोविड के 12 बेड फुल होने की वजह से मरीज को इलाज नहीं मिल पाया। मरीज को इससे पहले दीपचंद बंधु अस्पताल लेकर जाया गया था, लेकिन वहां भी मरीज को इलाज नहीं मिल पाया।