'अम्फान' के दिन तारकेश्वर के नंदी की हत्या के पीछे इलाके के हिन्दुओं में खौफ पैदा करने की है साजिश

    दिनांक 27-मई-2020   
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पश्चिम-बंगाल में आये भयंकर चक्रवाती तूफ़ान “अम्फान” के दिन भी जिहादी तत्वों द्वारा राज्य में मजहबी उन्माद फ़ैलाने की असफल घटना हुई। हावड़ा के नजदीक तारकेश्वर में रहने वाले नंदी की गला काटकर हत्या की गई। घटना के बाद से क्षेत्र के हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश है
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पश्चिम-बंगाल में आये भयंकर चक्रवाती तूफ़ान “अम्फान” के दिन भी जिहादी तत्वों द्वारा राज्य में मजहबी उन्माद फ़ैलाने की असफल घटना हुई। हावड़ा के नजदीक तारकेश्वर जो कि हिन्दुओं का पवित्र स्थान है, में रहने वाले नंदी की गला काटकर हत्या की गई। इस घटना के बाद से क्षेत्र के हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश है।
गौरतलब है कि अम्फान के दिन जिहादी तत्वों द्वारा मंदिर में रहने वाले एक लिविंग नंदी (सांड) की गला काट कर हत्या कर दी। इससे वह घंटों तड़पता रहा और फिर उसकी मृत्यु हो गयी। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर आने वाले भक्त पिछले कई सालों से उसकी देखरेख करते थे और भक्ति भाव के साथ उससे लोगों का काफी जुड़ाव हो गया था। इस सबके चलते वह मंदिर के पास ही रहता था। लोग उसे वहीं पर भोजन आदि सब कुछ उपलब्ध कराते थे।
भक्तों की इस शिवनंदी पर गहरी आस्था थी। कुछ भक्त इसे नंदी-बाबा के नाम से पुराकते थे।
पिछले कई सालों यानी जब से ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं तो उनकी शह पर इस तीर्थ स्थल में दखल दिया गया। क्योंकि इस मंदिर में चढ़ावे के रूप में बहुत बड़ी धनराशि आती है। इस सबको देखते हुए ममता ने इस हिन्दू मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में एक मुस्लिम फिराद हकीम को नियुक्त किया था। हालांकि इसको लेकर जब ज्यादा विवाद हुआ तो फिराद हकीम ने ट्रस्टीशिप के चेयरमैन से त्यागपत्र दे दिया। लेकिन फिराद हकीम का जब ये मंसूबा पूरा नहीं हुआ तो उसने इलाके की जनसांख्यकी परिवर्तन के लिए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए।

इस काम में राज्य सरकार का उसे पूरा सहयोग मिला। वह काफी हद तक इस काम में सफल भी हुआ। चूंकि यहां पर बहुत सी ऐसी धर्मशालाएं व आवास हैं, जिन पर किसी का मालिकाना हक़ नहीं है। सत्ता शक्ति का इस्तेमाल करते हुए फिराद हकीम ने ऐसे सभी धर्मशालाएं व आवासों को मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा करा लिया जो हिन्दुओं की थीं। इतना ही नहीं तारकेश्वर शिवमंदिर में पूजा के लिए उपयोग में आने वाली पूजा सामग्री (दूध, फूल, नारियल से लेकर गंगाजल तक) की छोटी व बड़ी दुकानों में भी मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा कर किया गया।

तारकेश्वर शिवमंदिर में पश्चिम-बंगाल के स्थानीय बंगाली हिन्दू ही नहीं बल्कि उत्तर भारत से असंख्य हिन्दू यहां पर विशेष तौर से श्रावणमास में जलाभिषेक के लिए आते हैं और शिवमंदिर में जलाभिषेक के पश्चात इसी नंदी की भी पूजा करते थे। ऐसे में हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचाते हुए जिहादियों ने उस नंदी की गला काट कर हत्या कर दी। क्योंकि जिस दिन इस घटना को अंजाम दिया गया, उस दिन राज्य में भयंकर चक्रवाती तूफ़ान आया था। ज्यादातर लोग घरों में सुरक्षित थे। ऐसे में मजहबी कटृटरपंथियों ने मौका पाते ही उन्माद फैलाने और हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने का कुत्सित प्रयास किया।

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पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने की कोई यह पहली घटना नहीं है। शायद ही ऐसा कोई दिन होता हो जब राज्य से कहीं कोई हिन्दू उत्पीड़न या हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने का समाचार नहीं आता है। दरअसल यह सब सत्ताधारी पार्टी और इस्लामिक तत्वों की साजिश का एक भाग है। इस तरह की घटना को अंजाम देने के पीछे की वजह यह होती है कि ऐसी घटना के बाद हिन्दू प्रतिउत्तर में कुछ करे तब मौके की ताक में पहले से तैयार बैठे जिहादी इलाके में उन्माद फैलाएं, हिन्दुओं की चल संपत्ति व व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कब्जा करें या उन्हें आग के हवाले करके उन्हें नुकसान पहुंचाएं। इसी बीच उन्मादी तत्व हिन्दुओं के मंदिरों व पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ करते हैं। ऐसी स्थिति में हिन्दू समुदाय शांति की तलाश में उस स्थान और अपनी सारी सपत्ति को छोड़कर बेहतर भविष्य के लिए पलायन कर जाता है। बस यही वह मौका होता है जब मजहबी उन्मादी हिन्दुओं की उस संपत्ति पर कब्ज़ा जमा लेते हैं।
बहरहाल, अभी 12 मई को ही हुगली जिले में मजहबी उन्मादियों ने अराजकता का वातावरण तैयार किया था। घर—दुकान और प्रतिष्ठानों को आग लगाई थी। ऐसी सिथति में डर के चलते कई हिन्दू परिवारों के पलायन की भी खबरें हैं। पर अब फिर से तारकेश्वर शिवमंदिर में रहने वाले नंदी की हत्या कर इलाके को फिर से मजहबी उन्माद की आग में ढकेलने का असफल प्रयास किया गया।