पाञ्चजन्य के वेबमिनार में बोले योगी, कोरोना महामारी से निपटने को 60 दिनों में आत्मनिर्भर बना उत्तरप्रदेश

    दिनांक 27-मई-2020   
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जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था तब उत्तर प्रदेश में टेस्टिंग लैब नहीं थी, इलाज कराने के लिए प्रथम कोरोना संक्रमित को दिल्ली भेजना पड़ा था. आज 78 हजार बेड कोरोना संक्रमित के लिए उपलब्ध हैं. सेनेटाइजर की कोई कमी नहीं है, मास्क पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. पीपीई किट के लिए अब उत्तर प्रदेश, किसी दूसरे पर आश्रित नहीं है

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पाञ्चजन्य की ओर से कोरोना संक्रमण काल : सजगता से सफलता के विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वेबिनार में कहा कि “ शुरुआत में ही यह लग गया था कि यह एक महामारी का रूप लेने जा रहा है. इसलिए हम लोगों ने अपनी तैयारियां होली के समय से ही शुरू कर दी थीं. मैं उस समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर था तभी मालूम हुआ कि दिल्ली से भारी संख्या में प्रवासी श्रमिक पलायन कर रहे हैं. उसी समय मैं अपना दौरा खत्म करके लखनऊ लौट आया. प्रवासी श्रमिकों और कामगारों को उनके घर तक पहुंचवाया. जब कोरोना का पहला मरीज उत्तर प्रदेश में पाया गया था उस समय हमारे पास टेस्ट करने की सुविधा नहीं थी. प्रथम कोरोना मरीज को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भेज कर इलाज करवाया गया था. आज के दिन पर हमारे पास कोरोना अस्पतालों में 78 हजार बेड उपलब्ध हैं. बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है, पूल टेस्टिंग करने वाला उत्तर प्रदेश, भारत का पहला राज्य है. 18 करोड़ लोगों को हम 5 बार राशन दे चुके हैं, छठीं बार 1 जून से फिर राशन वितरित करने जा रहे हैं. पलायन दूसरे प्रदेशों में खूब तेजी से हो रहा है मगर उत्तर प्रदेश में पलायन नहीं हुआ. उसकी वजह है कि हमने 12 हजार से अधिक ईंट – भट्ठों को चालू रखा. 119 चीनी मिलों को चालू रखा. जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था तब सेनेटाइजर नहीं मिल रहा था. आज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. मास्क पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. पीपीई किट हम स्वयं बना रहें हैं. पीपीई किट के लिए हम किसी पर आश्रित नहीं हैं."
पाञ्चजन्य संपादक हितेश शंकर द्वारा पूछे गए एक प्रन में जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि " अलग - अलग कार्यों के लिये मंत्रियों का समूह बनाया गया. मंत्रियों के दिशा - निर्देश में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया. एक समिति का गठन किया गया जो निर्माण से सम्बंधित कार्य की समीक्षा कर रही है. एक समिति ठेला - खोंचा, नाई और कारपेंटर आदि के लिए बनाई गई. इसी प्रकार अधिकारियों की टीम -11 बनाई गई. पहली कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई. इस कमेटी को भारत सरकार और अन्य प्रदेशों के मुख्य सचिव से वार्ता करके समन्वय स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया. इसके बाद, औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई. इस कमेटी ने श्रमिकों को किसी प्रकार की समस्या ना होने पाए. इस पर ध्यान दिया. श्रमिकों के भोजन और राशन आदि की चिंता की गई. कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई. इस कमेटी ने 'डोर स्टेप डिलेवरी' का कार्य सफलता पूर्वक किया. भोजन का पैकेट और राशन जनपद स्तर पर , वार्ड स्तर पर , मोहल्ला स्तर पर , ब्लाक स्तर एवं ग्राम स्तर पर वितरित कराया गया. अपर मुख्य सचिव - गृह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने लॉक डाउन की सफलता की चिंता की. अपर मुख्य सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने क्वारंटीन सेंटर और सामुदायिक रसोई घर की चिंता की. प्रमुख सचिव (पंचायती राज ) की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इस बात पर ध्यान दिया कि आने वाला मौसम बरसात का है. ऐसे में संचारी रोग – डेंगू , मलेरिया एवं इन्सेफ्लाइटिस आदि का खतरा बहुत बढ़ जाता है. इसलिए इसकी रोकथाम के लिए अभी से कार्य शुरू कर दिया गया है.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “ इसी प्रकार प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने स्वास्थ्य संबंधी हर एक समस्या का निराकरण किया. उत्तर प्रदेश में 12 हजार से अधिक क्वारंटीन सेंटर बनाये गए हैं. 50 हजार से अधिक प्रशिक्षित चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टॉफ को तैनात किया गया है. कोरोना से लड़ाई को और मजबूती देते हुए इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर सपोर्ट (ईसीसीएस) नेटवर्क की स्थापना की गई है. लेवल -1, लेवल – 2 और लेवल – 3 के कोरोना अस्पताल को बनाए गए हैं. प्रमुख सचिव कृषि की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है जो किसानों की समस्या का समाधान कर रही है. किसानों, मजदूरों एवं मंडी आदि के कर्मचारियों को कोविड-19 से पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. 15 अप्रैल से गेहूं का क्रय प्रारंभ कर दिया गया. अपर मुख्य सचिव (वित्त) की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई. इस कमेटी के माध्यम से सीधे खाते में धनराशि पहुंचाई गई. बैंकिंग पत्राचार की व्यवस्था की गई. राजस्व की कमी ना हो. सभी को वेतन और पेंशन समय पर मिले, इस कमेटी के द्वारा सुनिश्चित किया गया. पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई. इस कमेटी ने लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराया और यह भी ध्यान रखा कि पुलिस को संक्रमण न होने पाए.