पाकिस्तान: यूएससीआईआरएफ की हिदायत के बावजूद हिंदुओं को राशन नहीं, दंपती ने भूख से की खुदकुशी

    दिनांक 04-मई-2020   
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अमेरिका तथा यूएससीआईआरएफ की नसीहतों के बावजूद कोरोना संक्रमण के दौरान पाकिस्तान में हिंदू और ईसाइयों के उत्पीड़न का दौर थमा नहीं है। महामारी से कोहराम के बीच भी उन्हें रोटी-पानी से वंचित रखा जा रहा है। हाल में भूख से तंग आकर एक हिंदू दंपति ने खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक हिंदू महिला की इसलिए निर्दयतापूर्वक पिटाई कर दी गई कि उसने प्यास से परेशान होकर बहुसंख्यक मुसलमानों के एक हैंडपंप से पानी लेने की कोशिश की थी

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अमेरिका तथा यूएससीआईआरएफ यानी संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की नसीहतों के बावजूद कोरोना संक्रमण के दौरान पाकिस्तान में हिंदू और ईसाइयों के उत्पीड़न का दौर थमा नहीं है। महामारी से कोहराम के बीच भी उन्हें रोट-पानी से वंचित रखा जा रहा है। हाल में भूख से तंग आकर एक हिंदू दंपती ने खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक हिंदू महिला की इसलिए निर्दयतापूर्वक पिटाई कर दी गई कि उसने प्यास से परेशान होकर बहुसंख्यक मुसलमानों के एक हैंडपंप से पानी लेने की कोशिश की थी।
भूख से दंपति के खुदकुशी का मामला पाकिस्तान के सिंध का है। तमाम कोशिशों के बावजूद जब लॉकडाउन में भोजन-पानी का इंतजाम नहीं हो पाया तो हमीर कोहली और उसकी पत्नी थोन कोहली ने 22 अप्रैल को जहरीला पदार्थ खाकर मौत को गले लगा लिया। कोराना संक्रमण के बहाने पाकिस्तान में जिस तरह का माहौल बना है, ऐसे में कुछ और ऐसी खबरें जल्द सुनने को मिल सकती हैं।
हिन्दू और ईसाइयों के साथ किया जा रहा भेदभाव
पाकिस्तान आर्थिक रूप से गर्त में जा चुका है। कोरोना संक्रमण ने इसका बचा-कुचा दम भी निकाल दिया। परिणाम स्वरूप देश के 46 प्रतिशत गरीब परिवारों को राशन और राहत सामग्री के लाले पड़ रहे हैं। कमजोर वर्ग को महामारी में भी स्वास्थ्य सुविधाएं और एक टाइम भर पेट भोजन नहीं मिल पा रहा है। पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण अनियंत्रित हो चुका है। इस देश में अभी कोराना के 18,851 रोगी हैं, जबकि 432 की मौत हो चुकी है। पाकिस्तान के अधिकांश हिस्सों में 8 मई तक लॉकडाउन रहेगा, जिसका दुष्प्रभाव सर्वाधिक गरीब और मजदूर तबकों पर देखने को मिल रहा है। उन तक सरकारी राहत पहुंच ही नहीं पा रही है। हिंदुओं और ईसाइयों को इससे पूरी तरह वंचित रखा जा रहा है।
रोटी चाहिए तो मुसलमान बनें

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इमरान खान सरकार ने राहत सामग्री और राशन वितरण का जिम्मा देश के कुछ सामाजिक संगठनों को सौंप रखा है। इसको लेकर सत्तारूढ़ पीटीआई द्वारा गठित युवा टाइगर फोर्स सक्रिय है। मगर ये राहत देने में हिंदुओं एवं ईसाइयों से खुलकर भेद-भाव कर रहे हैं। उन्हें राहत सामग्रियां नहीं दी जा रही हैं। इसके लिए देशभर में लगने वाली कतारों से हिंदू और मसीहियों का नाम पूछ-पूछकर निकाला जा रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े सामाजिक संगठन सिलानी ट्रस्ट पर आरोप है कि वह राशन देने के बहाने ईसाइयों एवं हिंदुओं को इस्लाम में कन्वर्जन करवाने को मजबूर कर रहा है। दोनों समुदाय के गरीब लोगों को लालच दिया जा रहा है कि इस्लाम कबूलने पर उन्हें राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इस बारे में एक अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठन अपनी नाराजगी जता चुका है।
हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को खाद्य सहायता से वंचित रखने और उनका कन्वर्जन किए जाने की खबरों से परेशान होकर ही अमेरिका एवं यूएससीआईआरएफ ने इसकी निंदा करते हुए पाकिस्तानी सरकार को अल्पसंख्यकों को बिना किसी भेदभाव के सहायता प्रदान करने की हिदायत की है। इस बारे में पाकिस्तान को लिखे पत्र में यूएससीआईआरएफ की कमिश्नर अनुरीमा भार्गव ने कहा है कि गैर-सरकारी संगठन सयानी वेलफेयर इंटरनेशनल ट्रस्ट हिंदुओं और ईसाइयों को खाद्य सहायता देने से इनकार कर रहा है। उनका कहना है कि सहायता केवल मुसलमानों के लिए आरक्षित है, जो निंदनीय है।
नहीं सुधर रहा पाकिस्तान

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पाकिस्तान सरकार को लिखे इस पत्र को एक पखवाड़े से अधिक समय हो चुका है। इसके बावजूद हालात में कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। बल्कि हिंदुओं और ईसाइयों से कोरोनाकाल में भेद-भाव की शिकायतें बढ़ी ही हैं। पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भूख और परिवारों को महारोग से सुरक्षित बचाने के लिए एक साथ संघर्ष करना पड़ रहा है। यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई बेहद असुरक्षा में जी रहे हैं। उनके खिलाफ उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं। इमरान खान ने दो साल पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की सरकार के गठन के समय देश के अल्पसंख्यकों को हर मुमकिन सहायता देने और आम पाकिस्तानी की तरह अधिकार देने का ऐलान किया था। अपनी इन कागजी घोषणाओं के बूते ही वह भारत को गाहे-ब-गाहे अल्पसंख्यकों के अधिकार और उनके रख-ररखाव पर नसीहतें दिया करते थे। मगर वे खुद ही अपनी नसीहतों के अनुरूप अपने देश के अल्संख्यकों के साथ व्यववहार नहीं कर पा रहे हैं। इनके कार्यकाल में कट्टरवादी तत्व कुछ ज्यादा ही हावी हैं। यही लोग कोरोनावायरस की आड़ में पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को निपटाने में लगे हैं। महामारी में हिंदू लड़कियों के अपहरण व कन्वर्जन, घरोें में आग लगाने, हत्या, बलात्कार और धार्मिकस्थल में तोड़-फोड़ की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है।