पाकिस्तानी सेना की पोल खोलने वाला पत्रकार क्यों स्वीडन में मारा गया ?

    दिनांक 04-मई-2020   
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अपने देश की सेना की पोल खोलने वाले पाकिस्तानी पत्रकार साजिद हुसैन स्वीडन में मारे गए। उसका शव एक महीने बाद स्वीडन की एक नदी से बरामद किया गया। स्टॉकहोम पुलिस को अब तक की जांच में पत्रकार की हत्या के सबूत मिले हैं।
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अपने देश की सेना की पोल खोलने वाले पाकिस्तानी पत्रकार साजिद हुसैन स्वीडन में मारे गए। उसका शव एक महीने बाद स्वीडन की एक नदी से बरामद किया गया। स्टॉकहोम पुलिस को अब तक की जांच में पत्रकार की हत्या के सबूत मिले हैं। साजिद हुसैन पाकिस्तानी सेना से भयभीत होकर स्वीडन में निर्वासित जीवन जी रहे थे। वह पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचिस्तान के युवाओं के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के मुखर विरोधी रहे हैं, इसलिए हत्या की शक की सूई पाकिस्तानी फौज की ओर उठ रही है।
पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान प्रांत के युवाओं के साथ अमानवीय बरताव के लिए कुख्यात है। सैनिकों द्वारा बलोच युवाओं का अपहरण कर उन्हें गायब करने की अनेक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दो दिन पहले भी कराची विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के स्नाकोत्तर के छात्र शहाब बलोच का सैनिकों ने आधी रात को उसके घर से अपहरण कर लिया था। शहाब की मां शाहिदा का कहना है कि रात करीब दो बजे अचानक 50-60 फ्रंटियर कोर के सैनिक और स्थानीय पुलिस के जवान उनके घर आ धमके। बिना वारंट दिखाए ही उनके बेटे को उठा ले गए। उन्होंने जब कारण पूछा तो उल्टा उन्हें धमकाया गया। बताते हैं कि शहाब रहमत बलोच छात्र अधिकारों को लेकर मुखर रहा है।
 

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स्वीडन में ‘बलूचिस्तान टाइम्स’ के नाम से वेबसाइट चलाने वाले साजिद हुसैन पाकिस्तानी सेना की करतूतों को निरंतर उजागर कर रहे थे। उन्होंने बलूचिस्तान से ड्रग का कारोबार चलाने वाले पाकिस्तान के एक बड़े माफिया का भी भंडाफोड़ किया था। स्वीडन में भी उन्हें धमकियां मिल रही थीं। पाकिस्तानी सैनिकों की धमकियों से परेशान होकर साजिद हुसैन ने 2012 में पाकिस्तान को अलविदा कह दिया था। 2017 में स्वीडन सरकार ने उन्हें राजनीतिक शरणार्थी का दर्जा दिया। वह पत्रकारिता करने के अलावा स्वीडन के उप्साला में अस्थायी प्रोफेसर भी थे। उल्लेखनीय है कि स्टॉकहोम से उप्साला करीब 60 किलोमीटर दूर है।
 
 
साजिद हुसैन की पत्नी शहनाज ने बताया कि उनके पति दो मार्च को स्टॉकहोम से उप्साला के लिए निकले थे। उस दिन पत्रकारों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली संस्था ‘रिपोर्टस विथॉउट बॉर्डर’ के सदस्यों ने उप्साला की ट्रने पर भी देखा था। उसके बाद से उनकी कोई सूचना नहीं थी। तीन मार्च को उनके गुमशुदगी की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके एक महीने बाद उनका शव उप्साला के करीब फरीस नदी से बरामद किया गया। स्वीडन निवासी साजिद हुसैन के मित्र ताज बलोच ने बताया कि लापता होने के बाद से उनका फोन बंद आ रहा था। साजिद के पिता के कहने पर जब वह उनके घर गए तब लापता होने की जानकारी मिली।
 
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वेबसाइट ‘बलूचिस्तान टाइस्स‘ की टीम और उनके परिजनों ने उनकी मौत के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई है। उनके एक करीबी ने बताया कि साजिद हुसैन के पाकिस्तान छोड़ने से पहले पाकिस्तानी फौज ने एक रात उनके घर पर धावा बोलकर उनका लैपटॉप और कई जरूरी कागजात जब्त किए थे। स्टॉकहोम पुलिस का कहना है कि उनकी मौत की तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर कारणों की पड़ताल की जा रही है।