महाराष्ट्र : बेकाबू जमाती, बेचारी सरकार

    दिनांक 05-मई-2020
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राजेश प्रभु सालगांवकर
 
महाराष्ट्र सरकार की अल्पसंख्यक तुष्टीकरण नीति से मुम्बई में महामारी विकराल रूप ले रही है। मुस्लिम इलाकों में ‘लॉकडाउन’ का मजाक उड़ाया जा रहा है, पर वहां के लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। इस अंक से ‘मुम्बई बचाओ’ नाम से एक अभियान चलाया जा रहा है। इसमें मुम्बई की आंखों देखी स्थिति से पाठकों को अवगत कराया जाएगा

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‘लॉकडाउन’ के दौरान मुम्बई के एक बाजार की भीड़। मानो ये लोग महामारी को आमंत्रित कर रहे हैं। तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले (बाएं से) मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यमंत्री नवाब मलिक। शरद पवार की शह पर मलिक एक घंटे में उद्धव के फैसले को बदल देते हैं।
इन दिनों मुम्बई में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। लोग मुम्बई को ‘कोरोना राजधानी’ कहने लगे हैं। यहां संक्रमित मरीजों की संख्या 5,000 को पार कर गई है। ‘लॉकडाउन’ होने के बावजूद महानगर की यह स्थिति है। इसके लिए पूरी तरह से राज्य सरकार जिम्मेदार है। इसके साथ ही इस महामारी को बढ़ाने में बाजारों में आने वाली बेतहाशा भीड़, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, अस्पतालों की अव्यवस्था, डॉक्टर तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों को प्रशिक्षण की कमी, राजनेताओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों का भ्रष्ट रवैया आदि जिम्मेदार हैं। महामारी को पूरी तरह समझे बिना उससे लड़ने निकली राज्य सरकार बातें तो बड़ी-बड़ी कर रही है, पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई न के बराबर है। नीतिगत विषयों तथा नीतियां तैयार करने में ‘हां-ना’ का जो खेल राज्य सरकार खेल रही है, वह मुम्बई की जनता की जान के लिए भारी पड़ रहा है।
महामारी से निपटने में सबसे बड़ी बाधा है तुष्टीकरण की राजनीति। पूरा देश यह महसूस कर रहा है कि इस महामारी से लड़ाई में सबसे बड़ी अड़चन पैदा कर रहे हैं तब्लीगी जमात से जुड़े लोग और अन्य कुछ कट्टरवादी तत्व। देश का आम जनमानस तालाबंदी को सफल बनाने में सहयोग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमात के लोग और अन्य कुछ कट्टरवादी तत्व खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हैं, मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ रहे हैं। यही नहीं, ये लोग स्वास्थ्य-कर्मियों और चिकित्सकों पर थूक रहे हैं, अस्पतालों में गंदगी फैला रहे हैं। इन सबसे मुम्बई भी अछूती नहीं है। यहां भी ये लोग वही कर रहे हैं, जो देश के अन्य हिस्सों में कर रहे हैं।
मुम्बई में महामारी फैलाने में वे तब्लीगी जिम्मेदार हैं, जो दिल्ली के मरकज से लौटे थे। इन लोगों ने तालाबंदी को नहीं माना और यहां-वहां घूमते रहे। 50 तब्लीगी भागे भी हैं। राज्य के गृहमंत्री ने माना है कि भागे हुए तब्लीगियों का कोई अता-पता नहीं है। आज भी मुम्बई के मुस्लिम-बहुल इलाकों में ‘लॉकडाउन’ की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इन इलाकों में बाजार चालू हैं। यदि पुलिस इन इलाकों में जाती है, तो उन पर हमला होता है। यही नहीं, गैर-भाजपाई मुस्लिम नेता लोगों को तालाबंदी के विरुद्ध उकसाते भी रहते हैं।
निर्णय बदलने वाले मंत्री
महाराष्ट्र के दुर्भाग्य से यहां एक ऐसी सरकार बैठी है, जिसके मुख्यमंत्री के निर्णय को उन्हीं का एक कनिष्ठ राज्यमंत्री किसी को बताए बिना एक घंटे के अंदर बदल देता है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने फैसला लिया था कि महामारी से मरने वाले व्यक्ति के शव को जलाया जाएगा, चाहे वह किसी भी मत-पंथ का हो। इस निर्णय को राज्यमंत्री नवाब मलिक ने एक घंटे में बदल दिया। मलिक तुरंत मुम्बई महानगर पालिका के आयुक्त के कार्यालय पहुंच गए और उनसे झगड़ कर इस आदेश को बदलवा लिया। मलिक एनसीपी के नेता और प्रवक्ता भी हैं। लेकिन उनकी इस हरकत पर न तो एनसीपी ने कुछ बोला और न ही शिवसेना ने। किसी ने यह भी नहीं कहा कि यह महामारी का वक्त है और इस समय मजहब की राजनीति करना ठीक नहीं है। शव को दफनाने से वायरस के पुन: फैलने का खतरा रहता है। इस बात को समझकर दुनिया के अनेक देशों में महामारी से मरने वालों के शवों को जलाया जा रहा है। मुस्लिम समाज के कुछ पढ़े-लिखे लोग तो इस बात को समझ रहे हैं, लेकिन ज्यादातर इसे मजहबी रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।
सरकार के निर्णय के बदल जाने के बाद मुम्बई में महामारी से मरने वाले मुसलमानों के शवों को दक्षिण मुम्बई के एक बड़े कब्रिस्तान में दफनाया जा रहा है। इस कब्रिस्तान की तीन ओर घनी बस्तियां हैं। इसके नीचे से दक्षिण मुम्बई को पीने का पानी पहुंचाने वाली पाइप लाइन गुजरती है। आज की स्थिति यह है कि मुम्बई में जितने भी कब्रिस्तान हैं, वहां के लोग महामारी से मरने वालों के शवों को दफनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। सारे शव दक्षिण मुम्बई में मरीन लाइंस इलाके में स्थित कब्रिस्तान में दफनाए जा रहे हैं। शवों को दफनाते समय अपेक्षित सावधानियां भी नहीं बरती जा रही हैं। शव को प्लास्टिक थैले में बंदकर दफनाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। यहां का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें दिख रहा है कि एक शव के चेहरे से कफन हटाकर उसे दफनाया जा रहा है। इस लापरवाही के विरुद्ध कुछ लोगों ने आवाज उठाई तो मुम्बई नगर पालिका ने कहा कि इस कब्रिस्तान में दक्षिणी मुम्बई के ही शव आएंगे, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। अन्य स्थानों से भी यहां शव लाए जा रहे हैं।
तालाबंदी बना मजाक
राज्य सरकार की शह पर मुस्लिम बस्तियों में तालाबंदी के नियमों का पालन बिल्कुल नहीं हो रहा है। दिनभर दुकानें खुली रहती हैं। लोगों का आना-जाना कभी रुकता ही नहीं है। वहीं दूसरी ओर किसी हिंदू मुहल्ले में कोई बहुत जरूरी काम से निकल जाता है तो उसे पुलिस की डांंट और मार भी खानी पड़ती है। लेकिन मुस्लिम इलाकों में पुलिस केवल आवाहन करती रहती है कि लोग घरों में रहें, वहां बल प्रयोग नहीं किया जाता है। अब तो रमजान के चलते सरकार ने मुस्लिम इलाकों में सुबह 3 बजे ही बाजार खोलने की अनुमति दे दी है। बाजार खुल भी रहे हैं और भीड़ भी खूब हो रही है। उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता है कि अभी देश में ‘लॉकडाउन’ है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने तालाबंदी के पालन न होने पर आवाज उठाई है, पर सरकार का व्यवहार सरकार जैसा है ही नहीं।
इस कारण मुस्लिम-बहुल इलाकों में महामारी का फैलाव जारी है। भेंडी बाजार, मझगांव, भायखला, कुर्ला पश्चिम, गोवंडी, मानखुर्द, बांद्रा, ओशिवारा, मलाड, मालवणी के सभी इलाकों के साथ घाटकोपर तथा अंधेरी के कुछ भागों में महामारी रुक नहीं रही है। कुर्ला, गोवंडी, मानखुर्द, बांद्रा, ओशिवारा, मालवणी आदि इलाकों में तो पुलिस और स्वास्थ्य-कर्मियों पर हमले होते हैं। सरकार कागजी खानापूर्ति के अलावा और कुछ नहीं कर पा रही है या उसे करने नहीं दिया जा रहा है।
सरकार का हमला
जो लोग ‘लॉकडाउन’ को नहीं मान रहे हैं, उनके विरुद्ध सरकार तो कुछ नहीं कर रही है, पर उन लोगों के विरुद्ध तुरंत हरकत में आ जाती है, जो उसकी नाकामियों को लेकर सोशल मीडिया में सवाल करते हैं। पहले तो किसी कानून का आधार न होते हुए भी अनेक व्हाट्सअप ग्रुप्स को नोटिस दे दिया गया। चूंकि सरकार ने कहा है तो लोगों ने उसकी बातों का पालन भी किया। फिर भी कुछ लोगों ने महामारी से निपटने में सरकार की भूमिका को लकर सवाल उठाए तो उन्हें पुलिस ने थाना बुलाया और उनसे पूछताछ की। पूछताछ के नाम पर नागरिकों को तंग किया जा रहा है। चेतन किशोर जोशी नामक एक व्यक्ति को थाने में बैठकार पुलिस ने चार घंटे तक पूछताछ की है।
 
सरकार की इन नीतियों के कारण महामारी फैलती जा रही है और मुम्बई के लोग इहशत में जीने को मजबूर हैं। आशा की जानी चाहिए कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कहीं से सद्बुद्धि मिलेगी और वे तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर मुम्बई को महामारी से बचाने के लिए काम करेंगे।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)