सामने आकर जमाती समाज के नायक बन सकते थे मगर छिप कर के उन्हें खलनायक बनना पसंद था

    दिनांक 05-मई-2020
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सरकार लगातार कहती रही कि सामने आकर जांच कराएं. ऐसा करके वह समाज के हीरो बन सकते हैं. छिप करके वह खलनायक क्यों बन रहे हैं ? मगर तब्लीगी जमात के लोगों ने समाज में खलनायक की भूमिका चुनी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए जमातियों को जिम्मेदार माना है. अगर तब्लीगी जमात के लोगों ने अपना संक्रमण छिपाया नहीं होता. भारत में कोरोना संक्रमित जमातियों ने सरकार के दिशा - निर्देशों का पालन किया होता. होली के पहले ही दो गज की दूरी बनाने के निर्देश जारी किये गए थे. बावजूद उसके, जमाती निजामुद्दीन के मरकज़ में शामिल हुए. वहां से संक्रमित होने के बाद जमाती पूरे देश में जाकर छिप गए. तेलंगाना में जमातियों से फैले संक्रमण के चलते 6 लोगों की मृत्यु हो गई. देखते - देखते पूरा देश इन जमातियों से फैले संक्रमण की चपेट में आ गया. सरकार लगातार कहती रही कि सामने आकर जांच कराएं. ऐसा करके वह समाज के हीरो बन सकते हैं. छिप करके वह खलनायक क्यों बन रहे हैं ? मगर तब्लीगी जमात के लोगों ने समाज में खलनायक की भूमिका चुनी.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “ कोरोना वायरस का संक्रमण पूरे देश में फैलाने में तब्लीगी जमात का हाथ है. इन लोगों ने निज़ामुद्दीन में जाकर कार्यक्रम में भाग लिया. संक्रामक बीमारी को छिपाने का अपराध किया गया. विदेशों से जो लोग टूरिस्ट वीजा लेकर आये थे. उन लोगों ने वीजा के नियमों का उल्लंघन करके मज़हब के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. तब्लीगी जमात का कार्य बहुत ही अशोभनीय था. बीमार हो जाना कोई अपराध नहीं है. अगर बीमारी संक्रामक है. एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलने वाली बीमारी है. उसको अगर कोई छिपा रहा है तो वह उस बीमारी का संवाहक बनकर उस बीमारी को अन्य लोगों तक पहुंचाएगा. ठीक यही काम तब्लीगी जमात के लोगों ने किया. अगर उन लोगों ने इस बीमारी को छिपाया नहीं होता. जगह-जगह पर जा कर छिपे नहीं होते तो प्रथम चरण में लॉक डाउन पूरी तरह से सफल हो चुका होता.”
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पुलिस द्वारा विदेशी जमातियों की पहचान कर उनको क्वारंटीन कराया गया. 211 विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट को जब्त कर इनके खिलाफ वीजा नियमों का उल्लंघन करने के अंतर्गत कार्रवाई की गई. जिन जनपदों में हॉटस्पॉट चिन्हित किये गए. अधिकतर स्थान ऐसे हैं जहां पर तब्लीगी जमात के लोग छिपे हुए थे
पुलिस, इंटेलिजेंस और सर्विलांस की मदद से ढूंढें गए जमाती
निजामुद्दीन से उत्तर प्रदेश में लौटे तब्लीगी जमातियों को काफी मशक्कत के बाद चिन्हित किया जा सके. लगभग सभी तब्लीगी जमात वालों को पुलिस, इंटेलिजेंस और सर्विलांस की मदद से ढूंढा गया. अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि “ सबसे अधिक जमाती मेरठ में पाए गए. अन्य की पहचान के लिए अभियान जारी है. करीब 40 लोग क्वारंटीन होम छोड़ कर चले गए थे. जिसका संज्ञान लेते हुए इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई. इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. तब्लीगी जमात के मामले में किसी प्रकार की रियायत नही बरती जायेगी.”
जाहिलों की जमात में एक प्रोफ़ेसर भी
तब्लीगी जमात में सिर्फ जाहिल लोग ही नहीं हैं. पढ़े - लिखे लोग भी शामिल हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर का जो तब्लीगी जमात में शामिल होने निजामुद्दीन गए थे. प्रयागराज लौट कर उन्होंने यह बात छिपाई थी. निजामुद्दीन से लौटकर उन्होंने विश्वविद्यालय में परीक्षा ड्यूटी भी की थी. प्रयागराज जनपद के एसपी सिटी ब्रिजेश श्रीवास्तव ने बताया कि "महामारी अधिनियम के अंतर्गत प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया. प्रोफ़ेसर ने जमात में शामिल होने की बात छिपाई थी."
जानकारी के अनुसार प्रोफ़ेसर कुछ माह पहले इथोपिया गए थे. उसके बाद तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे. 11 मार्च को प्रयागराज आये थे. प्रशासन की तरफ से बार बार यह कहा जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति अपनी ट्रेवल हिस्ट्री ना छिपाए. अगर कोई भी विदेश से लौटा है या फिर ऐसी किसी जमात में शामिल हुआ है तो सामने आकर सहयोग करे. मगर शिक्षक होने के बाद भी उन्होंने कोई सहयोग नहीं किया.