हिंदू और ईसाइयों पर बढ़े हैं अत्याचार, पाकिस्तान के ही मानवाधिकार आयोग का खुलासा

    दिनांक 06-मई-2020   
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पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश के अल्संख्यकों के साथ होने वाली ज्यादातियों से हमेशा पल्ला झाड़ती रही है, पर वास्तव में ऐसा है नहीं। इस देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू और ईसाइयों की स्थिति दिनों—दिन खराब होती जा रही है। अब तो इनके इर्द-गिर्द ऐसे जाल बुने जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने समय रहते दखल नहीं दिया तो इनका अस्तित्व ही मिट जाएगा।


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पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश के अल्संख्यकों के साथ होने वाली ज्यादातियों से हमेशा पल्ला झाड़ती रही है, पर वास्तव में ऐसा है नहीं। इस देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू और ईसाइयों की स्थिति दिनों—दिन खराब होती जा रही है। अब तो इनके इर्द-गिर्द ऐसे जाल बुने जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने समय रहते दखल नहीं दिया तो इनका अस्तित्व ही मिट जाएगा। ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण काल में अल्पसंख्यकों के प्रति साजिश और गहरी व तेज हो गई है। इसकी पुष्टि पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग द्वारा हाल ही में जारी 340 पृष्ठों की वार्षिक रिपोर्ट से होती है।
 

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पाकिस्तान में होते कन्वर्जन और अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन करते पाकिस्तानी हिन्दू
 
 
आयोग के मानद प्रवक्ता एवं पत्रकार आई.ए. रहमान का कहना है कि महामारी के दौर में कम उम्र हिंदू, ईसाई लड़कियों के अपहरण, उनका कन्वर्जन, बलात्कार, हत्या, धर्मस्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में कमी आने के बजाए बढ़ोतरी हुई है। कोरोना से लॉकडाउन में बेरोजगार हुए अल्पसंख्यक दिहाड़ी मजदूरों, निर्धनों को सरकार से कोई राहत नहीं मिल रही। उन्हें इससे पूरी तरह वंचित रखा जा रहा है। इस बारे में कई मंचों पर इसकी शिकायत भी की जा चुकी है। इसके इतर कटृटरपंथी मजहबी संगठन हिंदुओं और ईसाइयों को राशन, भोजन के लिए कन्वर्जन करने की पूरी कोशिशों में लगे हुए हैं। इसके लिए वह जबरदस्ती से लेकर हर वह तरकीब अपना रहे हैं, जिससे उन्हें नापाक मंसूबों में सफलता मिल सके। रहमान मानते हैं कि कोरोना महामारी में हिंदू और ईसाइयों की धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों पर गहरा खतरा उत्पन्न हुआ है जो यकीनन चिंता पैदा करने वाली बात है।
रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में 2019 मेें हुई घटनाओं के हवाले से धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा और उत्पीड़न का बड़ा मार्मिक चित्रण किया गया है। इससे संबंधित आंकड़े और ग्राफ भी पेश किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, अपहरण मामले में पाकिस्तान का सिंध प्रांत अव्वल है। यह वही प्रांत है जहां से हिंदू लड़कियों की हत्या, अपहरण, कन्वर्जन और जबरदस्ती निकाह के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों के धर्मस्थल भी पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं रहे। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पिछले साल गुरूनानक देव जी के जन्मस्थल ननकाना साहिब पर भी हमला किया था।
गैर मुस्लिमों के धार्मिक—पांथिक स्थलों पर हो रहे हमले
पाकिस्तान के पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में हिन्दू और ईसाइयों की सर्वाधिक दुर्गति हो रही है। पाकिस्तान के संविधान में देश के तमाम नागरिकों को समान धार्मिक स्वतंत्रता की वकालत की गई है। मगर धरातल पर ऐसा नहीं है। पाकिस्तान के अहमदिया,शिया हजारा, हिंदू और ईसाई समुदाय के धार्मिक एवं पांथिक स्थलों पर निरंतर हमले हो रहे हैं। दक्षिण पंजाब के रहीमयार खान, खानेवाल और बहावलपुर में हिंदू, ईसाई और अहमदिया समुदाय अच्छी तादाद में रहते हैं, पर उनके साथ भेदभाव की शिकायतें भी इस क्षेत्र से खूब आती हैं। पिछले साल 25 अक्तूबर को सत्तर वर्षीय अहमदिया समुदाय के मजहबी स्थल को अतिक्रमण हटाने के नाम पर ढहा दिया गया था। जमात अहमदिया पाकिस्तान के प्रवक्ता का आरोप है कि मजहबी स्थल ढहाने से पहले उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया। इसी तरह सिंध में पिछले साल कई मंदिरों पर हमले किए गए। हाल में रहीमयार खान के टिबा में एक चर्च पर हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया और उसके पादरी की पिटाई की गई। पिछले साल अक्तूबर में बलूचिस्तान में हिंदुओं के धर्मस्थलों को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश की गई।
 

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पाकिस्तान सेना द्वारा आए दिन बलूचिस्तान से युवाओं को गायब कर उन्हें मार दिया जाता है क्यों
कि यह लोग सेना और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं
 
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट कहती है कि पिछले साल अदालत की ओर से आए कई आदेश जिसमें धार्मिक एवं पांथिक स्थलों की सुरक्षा की बात कही गई थी, लेकिन ऐसे किसी भी आदेश का पालन नहीं हुआ। खुलेआम इन सरकारी आदेशों को कट्टरवादियों ने हवा में उड़ाया। यहां तक कि अल्पसंख्यकों को नौकरी और शिक्षा में दो से पांच फीसदी कोटा दिए जाने के आदेशों की भी खूब धज्जियां उड़ाई गईं। अल्पसंख्यकों को नौकरी देने के नाम पर दफ्तरों में चपरासी और चौकीदार रखे गए। पंजाब के मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यकों को नौकरी दिलाने के नाम पर पिछले साल कई बैठकें की थीं, पर परिणाम शून्य ही रहा।
इमरान के शासन में जुल्म बढ़े
तकरीबन पौने दो वर्ष पहले तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री की शपथ लेते समय इमरान खान ने ‘नए पाकिस्तान’ में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू और ईसाइयों को सुरक्षा और सामाजिक, राजनीतिक महत्व देने, विकास कार्यों में भागीदारी देने और उनके धार्मिक एवं संस्कृति आधिकारों को संरक्षित करने का वादा किया था। लेकिन उनकी यह बात हवा-हवाई ही साबित हुई। बल्कि कई मामलों में हिंदुओं और ईसाइयों के साथ नाइंसाफी और प्रताड़ना बढ़ी है। पिछले साल 629 ईसाई लड़कियों का चीनियों के हाथों सौदा किया गया। इसके लिए पाकिस्तान में कई गिरोह सक्रिय हैं, जो लड़कियों के मां-बाप को उनकी बच्चियों के अच्छे जीवन का झांसा देकर कौड़ियों के मोल उन्हें खरीद लेते, फिर गायब कर देते हैं।
हिन्दुओं की छोटी—छोटी बच्चियों को बनाया जाता है निशाना
हिंदुओं की छोटी—छोटी बच्च्चिों के अपहरण, कन्वर्जन और पैसे लेकर उन्हें किसी अधेड़ के पल्लू से बांधने की घटनाएं भी पहले की तुलना में बढ़ी हैं। इस वर्ष सिंध और पंजाब प्रांत में हिंदू लड़कियों से दुष्कर्म, अपहरण और जबरन कन्वर्जन के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने अपहरण से संबंधित जो आंकड़े दिए हैं, उसमें सिंध अव्वल है। पाकिस्तान में नाबालिग बच्चियों से विवाह प्रतिबंधित है। मगर इस कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हिंदुओं की बारह से चौदह वर्ष की लड़कियों का अपहरण कर उनके कन्वर्जन की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं। मानवाधिकार की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक महीने सिंध में ऐसी 25 से 30 घटनाएं सामने आ रही हैं। लड़कियों के मां-बाप चाहकर भी ऐसी घटनाओं को रोक नहीं पा रहे। संसद में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि भी इस पर मौन धरे हुए हैं। परिणाम स्वरूप हिंदू विरोधी शक्तियों के हौंसले दिनों दिन बुलंद होते जा रहे हैं। उन्हें पुलिस, प्रशासनिक, राजनीतिक एवं मजहबी स्तर पर भी मौन समर्थन प्राप्त है।
 
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पिछले साल नाबालिग रीना और रबीना के अपहरण करके कन्वर्जन कराने की घटना ने पाकिस्तान की पोल खोली थी
 
 
कटृटरपंथी ताकतें
छोटी—छोटी हिंदू लड़कियों का अपहरण कर कन्वर्जन कराने के मामले में बदनाम मजहबी जमायतों को पूरा समर्थन मिल रहा है। पिछले वर्ष सिंध से 14 वर्ष की दो लड़कियों का अपहरण कर उनके कन्वर्जन के बाद उन्हें कोर्ट में बालिग साबित करने की कोशिश की गई थी। मगर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में बच्चियों के नाबालिग होने के पक्ष में पेश किए गए सुबूत के आगे अपहरणकर्ता टिक नहीं पाए और उन्हें बच्चियों को उनके मां-बाप को वापस करना पड़ा। मगर ऐसे उदाहरण एक दो ही हैं। पाकिस्तान सरकार ने एक 22 सदस्यीय संसदीय कमेटी जबरन कन्वर्जन की घटनाओं पर नजर रखने के लिए गठित की है, पर यह कमेटी अब तक नाकारा साबित हुई है। इस लिए हिंदू और ईसाई लड़कियों के अपरण और कन्वर्जन का क्रम बदस्तूर जारी है। पिछले साल सितंबर में पंजाब के हफीजाबाद में एक मौलवी ने मदरसे में पढ़ने वाली शेखपुरा गांव की एक पंद्रह वर्षीय ईसाई लड़की के कन्वर्जन का प्रयास किया था। पिछले साल अप्रैल में रहीमयार खान में भी कन्वर्जन का ऐसा ही एक अन्य मामला प्रकाश में आया था। गत वर्ष मार्च में एक अल्पसंख्यक नाबालिग बच्ची का एक रसूखदार व्यक्ति के लड़के ने अपहरण कर कन्वर्जन कराया था। बाद में बच्ची का नाम बदलकर नूर फातिमा कर दिया गया और युवक से निकाह पढ़वा दिया गया। बहावलपुर से भी एक चौदह वर्षी हिंदू बच्ची कशमाला देवी के अपहरण और कन्वर्जन की घटना सामने आई थी।
विरोध करने हिन्दुओं के घरों में लगाई जाती है आग, कर दिया जाता है लड़कियों को गायब
 

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पिछले साल निमिरता मीरचंदानी की रहस्यमय मौत भी खूब सुर्खियों में रही थी। 
परिवारीजनों का आरोप है उसने इस्लाम में कन्वर्ट करने से मना किया तो उसकी हत्या कर दी गई 
 
एक मामले में हिन्दू परिवारों के विरोध करने पर सिंध प्रांत के मीरपुर खास में हिंदुओं की दुकानों में कट्टरवादी इस्लामी तत्वों ने आग लगा दी थी। पुलिस आंकड़े के अनुसार 2019 में 948 लड़के, लड़कियां गायब हुए, जिनमें से 371 का आज तक पता नहीं चला है कि वह कहां गईं और उनका क्या हुआ। लड़कियों के माता-पिता का मानना है कि उनकी बेटियों का अपहरण करने के बाद बेच दिया गया। कट्टरवादियों ने पिछले साल शिया उलेमा काउंसिल के मोहम्मद अली शाह की लियाकताबाद तथा मार्च में औरंगी टाउन में डॉक्टर हैदर की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। पाकिस्तान में शिया समुदाय मजहबी अल्पसंख्यक श्रेणी में आता है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी अल्पंख्यकों की स्थिति अच्छी नहीं। यहां अल्पसंख्यकों का श्मशान घाट तक नहीं है। पिछले साल यहां भी हिंदुओं की प्रताड़ना के कई मामले दर्ज किए गए थे। यहां दो हिंदू लड़कियां रीना और रवीना का अपहरण कर कन्वर्जन कराया गया था। इस मामले को पत्रकार आई.ए. रहमान तथा एक्टिविस्ट डॉक्टर मेहंदी हसन कोर्ट तक ले गए, पर लड़कियों को अपहरणकर्ताओं से मुक्ति नहीं मिल पाई। इस प्रांत में मार्च में भी एक कम उम्र हिंदू लड़की का अपहरण किया गया था। सिंध के घोटकी से 22 वर्षीय महक केसवानी की अपहरण के बाद कल्वर्जन का मामला पिछले साल काफी सुर्खियों में रहा। सिंध निवासी बीडीस के अंतिम वर्ष की छात्रा निमिरता मीरचंदानी की रहस्यमय मौत भी पिछले साल खूब सुर्खियों में रही। उसका शव आसिफा डेंटल कॉलेज के छात्रावास से संदिग्ध अवस्था में बरामद किया गया था। पाकिस्तान के हिंदुओं एवं उसके परिवार का आरोप है कि उस पर कन्वर्जन के लिए दबाव डाला जा रहा था। विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी गई और आत्महत्या का रंग देने का प्रयास किया गया। यह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है।
हर उठने वाली आवाज को दबा दिया जाता
पाकिस्तान के हिंदू या ईसाई, शिया अथवा अहमदिया, अपने खिलाफ होने वाले अत्याचार के विरोध में आवाज बुलंद नहीं कर सकते। जो आवाज बुलंद करता है उसे खामोस कर दिया जाता है। पुलिस एवं प्रशासान की मिली भगत से कट्टरपंथी इन पर अपना जुल्म ढहाते हैं, जिसके चलते कोई भी डर के चलते बोलने के लिए तैयार नहीं होता। पिछले साल ननकाना साहिब गुरूद्वारे पर कट्टरपंथियों ने इसलिए पथरबाजी की थी कि सिख समुदाय का एक व्यक्ति अपने पुत्री का अहपरण और जबरन कन्वर्जन कराने के विरोध में कोर्ट चला गया था। उसकी पुत्री का अपहरण ननकाना के एक मुस्लिम लड़के ने अपने साथियों की मदद से किया था।
ईशनिंदा के बहाने ढहाया जाता है जुल्म
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 पाकिस्तान में आए दिन छोटी—छोटी बातों को निशाने पर लेकर हिन्दुओं के घरों को जलाकर उन पर जुल्म ढहाया जाता है
हिन्दू और ईसाइयों को ईशनिंदा के बहाने भी प्रताड़ित किया जाता है। इसके कारण आसिमा बीबी को गत वर्ष पाकिस्तान छोड़ कनाडा जाकर बसना पड़ा। पिछले साल सिंध में एक हिंदू टीचर के साथ ईशनिंदा के बहाने इसलिए पिटाई की गई कि उसने हिंदू लड़कियों के अपहरण एवं कन्वर्जन के लिए कुख्यात मियां मिट्ठू के चंगुल से भागी एक हिंदू लड़की को अपने घर पर पनाह दी थी। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के महासचिव हारिस खालिक कहते हैं कि बीते वर्ष को, राजनीतिक विरोध के सुर को व्यवस्थित तरीके से दबाने और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार के लिए याद किया जाएगा।