लॉकडाउन में जेएनयू में चल रहीं सकारात्मक गतिविधियां, रामायण पर हुए वेबिनार की चहुंओर हो रही सराहना

    दिनांक 06-मई-2020
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डॉ अंशु जोशी
 
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पहली बार रामायण पर हुए वेबिनार से एक तबके में उलझन तो जरूर हुई लेकिन लॉकडाउन अवधि में विश्वविद्यालय में हो रहे सदृप्रयासों की सराहना भी खूब हो रही है

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देश के उत्कृष्टम विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय वामपंथ का गढ़ माना जाता रहा है। बरसों से यहां अलगाववादी शक्तियां फलती फूलती रही हैँ। हालांकि यहां भारत माता का जयघोष करने वालों की कभी भी कमी नहीं रही है, किन्तु पूरे सिस्टम का निज़ाम तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा स्थापित होने से भारतीय संस्कृति से सम्बंधित विषयों को दरकिनार जरूर रखा गया। किन्तु विगत दो तथा तीन मई को पहली बार रामायण पर वेबिनार संयोजित हुआ, जिसमें रामायण में निहित नेतृत्व के मूल्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक एक बड़ी संख्या में लोगों ने इस वेबिनार में हिस्सा लिया और इसे खूब सराहा। जेएनयू के कुलपति जगदेश कुमार के नेतृत्व में इस सकारात्मक परिवर्तन से परिलक्षित होता है कि भारतीय संस्कृति की विशालता को नकारा नहीं जा सकता।
कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पूरा राष्ट्र लॉकडाउन की स्थिति से दो चार हो रहा है और जेएनयू भी इससे अछूता नहीं। लॉकडाउन की स्थिति में भी अकादमिक कार्य चलते रहें, सकारात्मक गतिविधियां होती रहें, इसके लिए जेएनयू में सद्प्रयास हो रहे हैँ। रामायण पर वेबिनार इन्हीं सद्प्रयासों की सुखद बयार के रूप में हमारे सामने आया। दो दिवसीय सत्रों में शांतनु गुप्ता ने इस वेबिनार के माध्यम से रामायण में निहित कई मूल्यों को साझा किया। उन्होंने रामायण के सभी काण्ड चित्रों के माध्यम से दिखाए और हर काण्ड की मुख्य घटनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही हर चरित्र के मुख्य गुण—बिंदु प्रतिभागियों के समक्ष रखे। सत्र के दौरान वे प्रतिभागियों से प्रश्न भी पूछते रहे, जिससे विशेषकर बच्चे बड़े उत्साहित हुए। शांतनु मुख्य घटनाओं में निहित सबक सिखाते गए। जैसे श्रीराम द्वारा पहली लड़ाई में मारीच को जीवित छोड़ दिए जाने से वह बाद में उनके लिए पुनः परेशानी का कारण बना। तो यहां सबक ये है कि किसी भी काम को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिये। ऐसे ही स्वर्ण मृग वृत्तांत से प्रतिभागियों ने सीखा कि हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। साथ ही यह कि लालच के परिणाम दुखकारी होते हैं।
दो दिनों तक रामायण के हर पात्र तथा घटना का गहराई से अध्ययन तथा विवेचन इस वेबिनार के माध्यम से किया गया। भारतीय इतिहास की गौरवशाली झांकी से प्रतिभागी ओत—प्रोत होते रहे। समापन में कई प्रतिभागियों ने महाभारत पर भी इसी तरह का वेबिनार कराये जाने का सुझाव दिया। जेएनयू इसी श्रृंखला में अब श्रीमद भगवदगीता पर वेबिनार कर रहा है।
यकीनन ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ छात्र छात्राओं के लिए अपितु तमाम शिक्षकों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारीजनों के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं। जेएनयू में परिवर्तन के इस सुखद सवेरे से राष्ट्र-यज्ञ को निश्चित ही सफलता मिलेगी।
(लेेखिका जेएनयू में सहायक प्राध्यापक हैं)