कांग्रेस सदैव से हिंदू प्रतीकों, शौर्य गाथाओं को दफन करने के लिए तैयार रहती है

    दिनांक 07-मई-2020   
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कांग्रेस पार्टी की नींव हिंदू विरोध पर ही टिकी है। भगवान राम को ‘काल्पनिक’ बताने वाली कांग्रेस ने हिंदुओं को बदनाम करने और जिहादियों को बचाने के लिए ‘भगवा आतंकवाद’ जैसा शब्द गढ़ा था। ऐसी पार्टी पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या पर भला क्यों कुछ बोले
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महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों की भीड़ द्वारा की गई हत्या के बाद देश पूछ रहा है कि इस लोमहर्षक घटना पर कांग्रेस चुप क्यों है ? दरअसल, कांग्रेस की परंपरा ही हिंदू विरोध की रही है। कांग्रेस हिंदू संतों, प्रतीकों, आराध्यों, मान्यताओं से चिढ़ती है। स्वयं को बड़े गर्व से ‘दुर्घटनावश हिंदू’ करार देने वाले जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की जड़ों को हिंदू विरोध से सींचा। सोमनाथ से अयोध्या तक कांग्रेस का चरित्र मुस्लिम तुष्टीकरण का रहा है। हजारों संन्यासियों पर गोली चलवा देने वाली सरकार कांग्रेस ने दी, राम को ‘काल्पनिक’ बताने का अपराध कांग्रेस के सिर है। अपराधों की सूची बहुत लंबी है। गांधी-नेहरू परिवार की पीढ़ी दर पीढ़ी इस अपराध को अंजाम दे रही है।
राम के अस्तित्व को ही नकारा
जिस देश के रोम-रोम में राम हैं, वहां शायद कोई रोम से प्रेरित व्यक्ति ही हमारे आराध्य को ‘काल्पनिक’ बताने का दुस्साहस करेगा। 12 सितंबर, 2007 को रामसेतु को तोड़ने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल किया। उसमें कहा गया था, ‘‘नि:संदेह वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस भारत के प्राचीन साहित्य में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। (इन्हें हमारे आराध्य ग्रंथ प्राचीन साहित्य लगते हैं) लेकिन इसके पात्र (यानी भगवान श्रीराम) और इनमें लिखी घटनाओं के घटित होने का कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है।’’ यानी कांग्रेस को यह कहने में तनिक भी लज्जा नहीं आई कि भगवान राम और उनके जीवन का कोई सुबूत नहीं है। उन दिनों कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक के अध्यक्ष एम. करुणानिधि ताल ठोंककर कहते थे, ‘‘राम काल्पनिक हैं। रामसेतु कोई मानव-निर्मित रचना नहीं है।’’
संन्यासियों पर चलवाई थी गोली
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में गोहत्या पर रोक लगाने की मांग के साथ आंदोलन करने वाले संतों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गोली चलवाई थी। इतिहासकार आचार्य सोहनलाल ‘रामरंग’ लिखते हैं, ‘‘फायरिंग अंधाधुंध थीं। लाशें गिर रही थीं। हजारों लोग मरे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने केवल 11 लोगों की मौत की बात कबूली।’’ एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि सरकार की ओर से निर्देश आया था कि जो सरकार बताएगी, बस वही छापना है। लोग बताते हैं कि उस गोली कांड में सैकड़ों लोग मारे गए थे। इनमें संत तो थे ही, बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी थे।
हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश
केवल जिहादी आतंकवाद को कमतर दिखाने और जायज ठहराने के लिए सोनिया-मनमोहन सरकार ने बाकायदा ‘भगवा आतंकवाद’ का एक फर्जी कथानक तैयार किया। 26/11 के मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था। दिग्विजय सिंह का बयान एक संयोग नहीं था। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया की किताब में खुलासा किया गया है कि इस फिदायीन हमले में शामिल आतंकवादियों को हिंदू पहचान दी गई थी और उनके हाथ में कलावे बांधे गए थे। अगर अजमल कसाब जिंदा न पकड़ा गया होता, तो कांग्रेस और पाकिस्तान मिलकर इस नरसंहार को हिंदुओं के सिर पर मढ़ने वाले थे। पाकिस्तानी साजिश का खुलासा होने के बावजूद दिग्विजय सिंह ने मुंबई में एक ऐसी किताब का लोकार्पण किया, जो इस नरसंहार को ‘भगवा आतंकवाद’ करार देती थी। समझौता एक्सप्रेस पर हमले से लेकर मालेगांव बम धमाकों तक कांग्रेस की सरकार ने मुस्लिम आतंकवादियों को छोड़ दिया और असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित जैसे बेकसूरों को फंसाकर ‘भगवा आतंकवाद’ साबित करने की असफल कोशिश की।
शंकराचार्य को कराया गिरफ्तार
नवंबर, 2004 में दीपावली के समय कांची पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती जी पर एक झूठा आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में वे इस मामले में बरी भी हो गए थे। इस गिरफ्तारी के पीछे कांग्रेस ही थी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द कोएलेशन इयर्स 1996-2012’ में लिखा है, ‘‘मैं इस गिरफ्तारी से बहुत नाराज था। मैंने यह मसला कैबिनेट की बैठक में उठाया। मैंने पूछा कि देश में पंथनिरपेक्षता का पैमाना क्या सिर्फ हिंदू संतों के लिए है ? क्या राज्य की पुलिस ईद के मौके पर किसी मुस्लिम मौलाना को गिरफ्तार करने की हिम्मत रखती है ?’’ बताया जाता है कि इस पूरी साजिश में वेटिकन शामिल था। यह कन्वर्जन की साजिश थी। असल में शंकराचार्य जी के प्रभाव के कारण ईसाई मिशनरियों को तमिलनाडु में अपने काम में दिक्कत आ रही थी।

पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही ‘बीमारी’
कुछ समय पहले राहुल गांधी ने कहा था, ‘‘लोग लड़कियां छेड़ने के लिए मंदिर जाते हैं।’’ क्या ऐसा बयान वे और किसी मत-पंथ के लिए दे सकते हैं ? बिल्कुल नहीं। तीन तलाक के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल भगवान श्रीराम का मजाक बनाते हैं। आजादी के बाद जब यह तय हो गया है कि वंदे मातरम् राष्ट्रगान होगा, तो नेहरू को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। देश में वंदे मातरम् विरोध का बीज उस दिन पड़ गया था, जब नेहरू ने कहा था, ‘‘इससे मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी।’’ सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जब सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया, तो सबसे ज्यादा दिक्कत नेहरू को थी। नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को लिखित में यह सलाह दे डाली थी कि सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उन्हें भाग नहीं लेना चाहिए। नेहरू को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से तो प्रेम था, लेकिन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदू नाम होने भर से उन्हें एतराज था। उन्होंने महामना पंडित मदनमोहन मालवीय पर दबाव बनाया था कि इससे हिंदू नाम हटा दिया जाए। नेहरू के नेतृत्व में इतिहास से लेकर समाजशास्त्र तक हर क्षेत्र में वामपंथी घुस आए और योजनाबद्ध ढंग से हिंदुओं का गौरवशाली इतिहास छिपाने के लिए पूरे इतिहास को ही विकृत कर डाला।

आज भी चल रहा है सिलसिला
कांग्रेस के शासन वाला हर राज्य हिंदू प्रतीकों, शौर्य गाथाओं को दफन कर देने के लिए तैयार है। 10 जनपथ के कठपुतली मुख्यमंत्री जानते हैं कि कैसे एक परिवार को खुश करना है। इसका सबसे आसान रास्ता है हिंदुओं को गाली दो, उनके गौरव एवं धार्मिक चिह्नों को गायब कर दो। राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार ने पाठ्यक्रम के लिए एक समिति बनाई। इस समिति ने सबसे पहले कक्षा 12 की किताब में वीर सावरकर के अध्याय को छेड़ा और उनके नाम के आगे से ‘वीर’ शब्द हटा दिया। इसके साथ ही हल्दीघाटी की लड़ाई का इतिहास ही बदल डाला गया। पहले कक्षा 10 में पढ़ाया जाता था ‘‘अकबर हल्दीघाटी की लड़ाई में नाकाम रहा। वह न तो महाराणा को पकड़ सका और न ही उनके राज्य पर पूरी तरह कब्जा कर सका।’’ अब बच्चों को पढ़ाया जाता है, ‘‘महाराणा प्रताप हल्दीघाटी की लड़ाई छोड़कर भाग गए और उस दौरान उनके मशहूर घोड़े चेतक की मौत हो गई।’’ कोई कांग्रेसी बताएगा कि क्यों राजस्थान सरकार ने राजनीतिक विज्ञान की किताब में मजलिस ए एतेतहादुल और सिमी जैसे आतंकी संगठनों के साथ हिंदू महासभा का नाम जोड़ा है ? इन घटनाओं और बातों का एक ही निष्कर्ष है कि कांग्रेस हिंदू विरोध पर जीती है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)