तो गिलगित, बाल्टिस्तान का 'मौसम' बदलने वाला है !

    दिनांक 08-मई-2020   
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पाकिस्तान अपने आका चीन को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता है। इस कड़ी में उसने पाक अधिक्रांत कश्मीर के उपरी हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रदेश बनाने का मंसूबा तैयार किया है। हालांकि, भारत ने कड़ा रूख अपनाते हुए न केवल यह जता दिया कि उसके मंसूबे सिरे नहीं चढ़ने वाले, बल्कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान सूची में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को शामिल कराकर यह भी अहसास करा दिया कि यह हिस्सा भारत का अटूट अंग था और हमेशा रहेगा।

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पाकिस्तान अपने आका चीन को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता है। इस कड़ी में उसने पाक अधिक्रांत कश्मीर के उपरी हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रदेश बनाने का मंसूबा तैयार किया है। हालांकि, भारत ने कड़ा रूख अपनाते हुए न केवल यह जता दिया कि उसके मंसूबे सिरे नहीं चढ़ने वाले, बल्कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान सूची में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को शामिल कराकर यह भी अहसास करा दिया कि यह हिस्सा भारत का अटूट अंग था और हमेशा रहेगा।
बहुप्रचारित पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियार गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगा। इस लिहाज से इसके चार जिले हुनजा, नगर, घीसर और चिलास बेहत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वर्तामान में पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का ‘स्वतंत्र हिस्सा’ मानता है। स्वतंत्रता से अब तक पाकिस्तान का संविधान चार बार बदला गया। आखिरी बदलाव 1974 में किया गया। मगर संविधान परिवर्तन में हर बार पाक अधिक्रांत कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानते हुए उसे ‘आजाद’ बताया गया। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पृथक सरकार चलती है। इसके अपने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति हैं। पहले गिलगित-बाल्टिस्तान में शाही कानून चलता था। जैसे-जैसे यह क्षेत्र चीन के लिए उपयोगी होता गया, पाकिस्तान ने इसकी स्वतंत्रता छीननी शुरू कर दी। अनुच्छेद 370 की तरह एक विशेष कानून के जरिए यहां भी बाहरी लोग स्थायी तौर पर नहीं बस सकते थे। चीन के दबाव में 1984 में इस क्षेत्र से यह विशेष कानून हटा दिया गया।
 

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समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट और विकिलिक्स की रिपोर्ट की मानें तो तब से गिलगित-बाल्टिस्तान में चीनी फौजियों का जमावड़ा है। इस समय भी इस क्षेत्र में करीब दस हजार चीनी सैनिक तैनात हैं। इलाके में चीनी पूंजी निवेश बढ़ाने और देश का पांचवां प्रांत गठित करने के लिए 21 मई, 2018 को संसद में प्रस्ताव पासकर गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक, न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को सौंप दिए गए थे। अब नए प्रांत के गठन की तैयारी तेज कर दी गई। अभी पाकिस्तान में चार प्रांत सिंध, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान हैं।
 
पांचवें प्रांत के गठन के लिए हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामाबाद को गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश-2018 के तहत यहां चुनाव कराने की अनुमति दी है। इसकी जानकारी मिलने पर भारत ने कड़ा विरोध जताया। इसके तहत विदेश मंत्रालय ने भारत में पाकिस्तान के वरिष्ठ उच्चायुक्त को पत्र देकर एक बार फिर चेता दिया कि पूरा पाक अधिक्रांत कश्मीर भारत का अटूट अंग है। इसमें बगैर भारत की अनुमति के किसी तरह की छेड़खानी सहन नहीं की जाएगी। जम्मू कश्मीर और लद्दाख से लगता क्षेत्र पीओके जल्द ही इसके कब्जे में होगा।
 
हालांकि, गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति, प्रशानिक व न्याय प्रणाली में पाकिस्तान के हस्तक्षेप का यहां बराबर व कड़ा विरोध होता रहा है। पिछले साल 4 से 12 दिसंबर को इस मुददे पर जबर्दस्त आंदोलन चला था। जानकारों का कहना है कि पीओके के इस हिस्से में चीन तभी पूंजी निवेश करेगा, जब यह हिस्सा पूरी तरह पाकिस्तान के नियंत्रण में न आ जाए। नई सरकार के गठन से ही यह संभव है।
 
 
 
वैसे, भारत ने भी पाक अधिक्रांत कश्मीर में पड़ोसी देश के नापाक मंसूबे को ध्वस्त करने के लिए अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। भारत का कड़ा रूख और संकल्प दर्शाने के लिए ही देश में मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने पूर्वानुमान सूची में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को भी शामिल कर लिया है।
 
मौसम विभाग ने इन दोनों क्षेत्रों को जम्मू-कश्मीर सब-डिवीजन का हिस्सा बताते हुए उत्तर-पश्चिम भारत की मौसम भविष्यवाणी सूची में जोड़ लिया है। मौसम विभाग के नए क्षेत्र की सूची में 3 मई से 10 मई तक के पूर्वानुमान मौसम की जानकारी उपलब्ध है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र के लिए मौसम बुलेटिन जारी कर रहा है। इस बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद का भी उल्लेख है, क्योंकि यह भारत हिस्सा है।