बर्धमान और बोध गया में हुए बम विस्फोट के मास्टर माइंड को एसटीएफ ने दबोचा, आतंकी अब्दुल करीम श्रमिकों के साथ आ गया था मुर्शिदाबाद

    दिनांक 01-जून-2020   
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बांग्लादेश का खूंखार आतंकवादी संगठन “जमात-उल-मुजाहिद्दीन” (जेएमबी) का कुख्यात आतंकी व भारत में आतंकी संगठन का मुख्य सरगना अब्दुल करीम उर्फ़ बोरो करीम को पश्चिम बंगाल के एसटीएफ ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया है। यह 2014 के बर्धमान के खगरागढ़ और 2018 में बोध गया में हुए बम विस्फोट का मास्टर माइंड था।
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पिछले दिनों बांग्लादेश का खूंखार आतंकवादी संगठन “जमात-उल-मुजाहिद्दीन” (जेएमबी) का कुख्यात आतंकी व भारत में आतंकी संगठन का मुख्य सरगना अब्दुल करीम उर्फ़ बोरो करीम को पश्चिम बंगाल के एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। यह 2014 के बर्धमान के खगरागढ़ और 2018 में बोध गया में हुए बम विस्फोट का मास्टर माइंड था। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने जेएमबी का यह सरगना राष्ट्रीय जांच एजेंसी के राडार पर लंबे समय से था।

 
कौन है अब्दुल करीम उर्फ़ बोरो करीम

अब्दुल करीम बांग्लादेश के सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का भारत में प्रमुख सरगना है। दरअसल पश्चिम बंगाल में पिछले कई सालों से घटित आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में इसका सीधा हाथ रहा है। आतंकी अब्दुल करीम जेएमबी के स्लीपर सेलों को लॉजिस्टिक सप्लाई करना, उनको मुर्शिदाबाद के अलावा भारत के विभिन्न जगहों में शेल्टर देना, जिहादी सामग्री उपलब्ध कराना, कटृटरवादी तत्वों को संगठित करना मदरसों के बच्चों को जिहाद की तालीम देने का प्रबंध करता था। इसके अलावा जेएमबी का शीर्ष आंतकी सलाउद्दीन, जिसका ठिकाना बांग्लादेश में है का प्रमुख विश्वासपात्र भी था।

गौरतलब है कि वर्ष, 2018 में कोलकाता एसटीएफ के अधिकारियों ने अब्दुल करीम के घर में जब छापेमारी की थी तब भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ और जिहादी सामग्री जब्त की थी। इस छापे के बाद अब्दुल करीम पश्चिम बंगाल से भागकर कर्नाटक चला गया। अभी जब लॉकडाउन के दौरान कुछ श्रमिक बेंगलुरू से बंगाल के लिए आए तो उसी जत्थे में अब्दुल करीम भी मुर्शिदाबाद आ गया। खूफिया सूचना के जरिए इसकी भनक पुलिस को मिली जिसके बाद एसटीएफ ने उसको एक रिश्तेदार के घर से दबोच लिया।


बंगाल को अशांत करने में रहा है इसका हाथ
पश्चिम बंगाल स्थित बर्धमान के खगरागढ़ में अक्टूबर, 2014 में भयानक विस्फोट हुआ था जिसमें दो संदिग्ध आतंकियों की मौत हुई थी और एक—एक आतंकी गंभीर रूप से घायल हुआ था। पहले तो स्थानीय पुलिस और सरकार ने इस घटना की सत्यता छिपाते हुए इसे महज गैस सिलेंडर का विस्फोट बताया। लेकिन घटना की भयावहता को देखकर यह बात किसी को हजम नहीं हुई। राष्ट्रीय मीडिया में यह घटना कई दिनों तक रही। अलग—अलग पड़तालों से भी इसकी सत्यता सामने आई। अंतत: इसकी जांच एनआईए को सौंपी गई। तब जो निकलकर सामने आया वह चौंकाने वाला था। घटना स्थल से जले हुए पम्फ्लेट्स मिले, जिसमें “जिहाद” लिखा था। साथ ही कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा को यहां मिली सामग्री में आदर्श बताया गया था। इतना ही नहीं यहां से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ भी एजेंसी ने बरामद किया था।
 
एजेंसी की जांच में यह बात सामने आई कि विस्फोट के तार बांग्लादेश के सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन जेएमबी से जुड़े हें और विस्फोट गैस सिलेंडर से नहीं बल्कि बम बनाने की सामग्री से हुआ। इस दौरान 24 लोग पकड़े गए थे, जिसमें से 19 लोगों ने अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की। इस विस्फोट का एक प्रमुख मास्टर माइंड हबीबबुर रहमान को एजेंसी ने बेंगलुरू में जून, 2019 में गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच रिपोर्ट में जेएमबी की भारत में व बांग्लादेश में आतंकी गतिविधियों की पुष्टि हुई। एजेंसी की जांच के बाद ही पश्चिम बंगाल सरकार ने खरगागढ़ विस्फोट की जांच एसटीएफ को दी, जबकि पहले राज्य सरकार इस घटना को गैस सिलेंडर फटने की घटना बता रही थी।

इसी तरह से 2018 में बोध गया में एक कम तीव्रता का बम विस्फोट हुआ था। इस घटना को उस समय अंजाम दिया था, जब बौद्धों के सबसे बड़े गुरु परम पावन दलाई लामा एक कार्यक्रम में शामिल होने बोध गया आये हुए थे। एनआईए ने अपनी जांच में यह पाया कि आतंकी संगठन जेएमबी दलाई लामा को हानि पहुंचाना चाहता था, लेकिन विस्फोट समय से पहले हो गया। इस विस्फोट में जेएमबी के प्रमुख आतंकी अब्दुल करीम के प्रत्यक्ष शामिल होने की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में हुई और भी कई आतंकी गतिविधियों से इसका सीधा जुड़ाव रहा है।


क्या है धुलियन मॉडयूल ?

 
बांग्लादेश के आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन की एक इकाई जो कि मुर्शिदाबाद स्थित जंगीपुर के “धुलियन” नामक जगह से इसके स्लीपर सेलों द्वारा संचालित की जाती है। इसे ही धुलियन मॉडयूल के नाम से जाना जाता है, जिसका नेतृत्व अब्दुल करीम के हाथ में था। ज्ञात हो कि जमात-उल-मुजाहिद्दीन अल-कायदा की तर्ज पर ही कार्य करता है। इसका इरादा बांग्लादेश को शरिया कानून के तहत एक इस्लामिक देश बनाना है। इसके लिए जेएमबी तालिबान की तर्ज पर बांग्लादेश व भारत में मुस्लिम युवाओं को बरगलाकर उनको इस्लामिक तालीम देना व बाद में जिहाद की आग में झोंकने का कार्य करता है। बांग्लादेश में अब तक 300 से भी ज्यादा आतंकवादी गतिविधियों में जेएमबी का प्रत्यक्ष हाथ पाया गया है।

दरअसल जेएमबी बंगाल के मालदा-मुर्शिदाबाद व नदिया को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाए हुए है। यहां पर इस आतंकी संगठन का मजबूत आधार है, क्योंकि बांग्लादेश की सीमा इन जिलों से एकदम सटी हुई है। लिहाजा सीमा पार से आसानी से यह आतंकी आ सकते हैं और मुस्लिम बहुल जिले होने के चलते आसानी से इनको शरण मिल जाती है। ऐसे में यहां रहकर यह आतंकी साजिशों को अंजाम देते हैं और आतंकी घटनाओं के लिए सामग्री जुटाते हैं।
 
वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के सुन्दरबन के रास्ते से भारत के 24 दक्षिण परगना के रास्ते से जो रोहिंग्या घुसपैठ करते हैं, उनको भी जेएमबी मदद करता है और भारत में प्रवेश कराता है। इन सभी को लाने के बाद यह उन रोहिंग्याओं को कटृटरपंथी तालीम देकर जिहाद की ओर ढकेल देता है। वर्तमान में मालदा, मुर्शिदाबाद व नदिया जिलों से होते हुए जेएमबी की गतिविधियां बीरभूमि व बर्धमान तक फैली हुई हैं, जहाँ आतंकी संगठन मुस्लिम युवाओं का ब्रेन वाश करके उनको कट्टरपंथी बनाता है।