मेवात में कटृटरपंथियों द्वारा किया जा रहा दलितों का उत्पीड़न, दलित—मुस्लिम एकता का छलावा रचने वाले दलित संगठन साधे हैं चुप्पी

    दिनांक 01-जून-2020   
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हरियाणा के मेवात में दलितों पर अत्याचार जारी हैं। कटृटरपंथियों द्वारा उन्हें बराबर प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछले दिनों 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति ने जब पीड़ितों की आपबीती सुनी तो उनकी शिकायतें रोंगटे खड़े कर देने वाली और दिल दहला देने वाली थीं
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हरियाणा के मेवात में दलितों पर अत्याचार जारी हैं। कटृटरपंथियों द्वारा उन्हें बराबर प्रताड़ित किया जा रहा है। ऐसी स्थिति को देखकर पिछले दिनों श्री वाल्मीकि महासभा, हरियाणा ने यह निर्णय लिया है कि 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करके वहां की हकीकत को तथ्यों के साथ सरकार व समाज के सामने लाया जाए। इस संबंध में जांच करने के बाद जांच समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार ने पिछले दिनों पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मेवात दलितों का कब्रिस्तान बनता जा रहा है। पाकिस्तान और मेवात में कोई अंतर नहीं रह गया है। इसलिए लंबे समय से इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण दलितों को यह लग रहा है कि अब उन्हें अपनी इज्जत, अपना धर्म और अपनी धरती बचाने के लिए खुद संघर्ष करना पड़ेगा। दरअसल, दलित समाज के 48 पीड़ितों को समिति की ओर से बुलाया गया था परंतु जिहादियों की दहशत के चलते सिर्फ 19 लोग ही अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों की जानकारी देने के लिए   नूंह में आए। उनकी शिकायतें रोंगटे खड़े कर देने वाली और दिल दहला देने वाली थीं।


बढ़ती जिहादी घटनाएं

विद्यालय जाने वाली बच्चियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी करने वाली घटनाएं पूरे मेवात में होती हैं, जिसके कारण उनका विद्यालय में पढ़ने जाना भी दूभर हो गया है। एक 12 साल की लड़की का तो 4 मुसलमानों ने बलात्कार किया और जिस मकान में बलात्कार हुआ वह मुस्लिम पुलिस वाले का ही था। एक साल बाद भी आज तक उस पुलिस वाले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह फिरोजपुर नमक में तो 9 मुसलमानों ने एक महिला को बंदी बनाकर कई दिन तक बलात्कार किया। उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और आरोपियों ने चार दिन बाद उसकी जघन्य हत्या कर दी।

पत्रकारों को संबोधित करने के दौरान पवन कुमार ने कहा कि मेवात में जबरन कन्वर्जन केे दर्जनों उदाहरण सामने आए हैं लेकिन किसी भी मामले में कोई कड़ी कार्रवाई न होने के कारण कन्वर्ट हुए व्यक्तियों के परिवारों पर भी कन्वर्जन का दबाव बनाया जा रहा है। इसी तरह कई जगह शमशान घाटों पर भी कब्जा किया जा रहा है। दलितों को पकड़कर उनके साथ मारपीट करना, उधारी का पैसा मांगने पर उन पर हमला करना आम घटना हो गई हैं। पिछले दिनों बिछोर गांव में तो रामजीलाल को तो काटकर फिर जिंदा जला दिया गया। नामजद रिपोर्ट होने पर भी उसकी आसमानी बिजली गिरने से मृत्यु हुई है, यह कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। उसका परिवार इतनी दहशत में है कि उन्होंने गांव से पलायन कर लिया है।


दलितों के परिवारों में शादी होने पर कई बार उन पर हमला करके सामान लूट लिया जाता है और वधु को जबरन अगवा करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में इस जांच समिति का यह निष्कर्ष है कि दलितों पर अत्याचार प्रशासन और पुलिस की शह पर ही हो सकते हैं। पहले तो दलितों की शिकायतें ही दर्ज नहीं होती थीं। दर्ज हो भी जाएं, तो कार्रवाई नहीं होती और पुलिस वाले समझौता करने के लिए धमकाते हैं और पीड़ित पर ही झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देते हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में कहीं भी दलितों से जुड़ी छोटी घटना होने पर आसमान उठा लेने वाले छद्म सेकुलरवादी मुसलमानों द्वारा दलितों पर इतने अमानवीय अत्याचारों पर चुप क्यों रहते हैं ? राजनीतिक स्वार्थों के कारण दलित—मुस्लिम एकता का छलावा रचने वाले दलित संगठन अभी तक इन दलितों के आंसू पोंछने क्यों नहीं आए ? इन अत्याचारों की बार-बार शिकायतें करने पर भी क्यों किसी भी दल के राजनीतिज्ञ इनकी सहायता के लिए नहीं पहुंचते हैं ? इन प्रश्नों के साथ जीने वाले दलित समाज को इस जांच समिति के जाने के बाद अब अपने ऊपर विश्वास हो चला है और वह शिकायतें दर्ज कराने के लिए सामने भी आ रहा है और अत्याचारों से संघर्ष करने का निर्णय भी ले रहा है।

समिति के अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि यह रिपोर्ट हरियाणा सरकार, अनुसूचित जाति आयोग एवं केंद्र सरकार के गृह मंत्री को दी जाएगी, जिससे वे दलित समाज को न्याय दिलाएं और मेवात में कानून का राज्य स्थापित करें।