दिल्ली में हर दिन बढ़ रहा कोरोना संक्रमण, लॉकडाउन अवधि में केजरीवाल सरकार ने किया क्या ?

    दिनांक 10-जून-2020   
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दिल्ली में हर दिन कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। लेकिन दिल्ली सरकार सिर्फ संवाददाता सम्मेलन  संबोधित करके प्रोपेगंडा फैलाने में ही व्यस्त है। ऐसे में अब यह सवाल बड़ा अहम हो जाता है कि बाकी के दिनों को छोड़ दे तो जब देश में लॉकडाउन हुआ तो उस अवधि में केजरीवाल सरकार ने किया क्या ?
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दिल्ली में हर दिन कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। लेकिन दिल्ली सरकार सिर्फ संवाददाता सम्मेलन संबोधित करके प्रोपेगंडा फैलाने में ही व्यस्त है। जहां एक तरफ अरविंद केजरीवाल सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर जो झूठी तस्वीर बनाई थी, वह अब खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में इसे छिपाने के लिए दिल्ली सरकार के नेताओं द्वारा दूसरे दलों पर आरोप—प्रत्यारोप किए जा रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल बड़ा अहम हो जाता है कि बाकी के दिनों को छोड़ दे तो जब देश में लॉकडाउन हुआ तो उस अवधि में केजरीवाल सरकार ने किया क्या ?

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क्‍लस्‍टर बसों के चालक सुविधाओं के अभाव में प्रदर्शन को विवश

कोरोना संक्रमण के दौरान भी द्वारका में डिपो के बाहर क्‍लस्‍टर बसों के चालक और संवाहक प्रदर्शन करने को विवश हैं। आरोप है कि उन्‍हें दो माह से वेतन नहीं मिला है। डीटीसी बसों के चालकों की स्थिति इससे भी बदतर है। एक तरफ तो वेतन के लिए उन्हें कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है, दूसरी ओर महामारी के इस दौर में उनसे जबरन कैट्स एंबुलेंस चलवाया जा रहा है। लेकिन उन्‍हें एंबुलेंस जैसी आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संबंधित न तो कोई जानकारी दी गई और न ही प्रशिक्षण। यही नहीं, डीटीसी चालकों को जरूरी सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए गए हैं। ऐसी नौबत क्‍यों आई ? इसके पीछे एक कारण है। दिल्‍ली में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े, उसके कारण कैट्स एंबुलेंस के कई चालक और अन्‍य स्‍टाफ भी संक्रमित हो गए। लिहाजा, उन्‍होंने दो टूक शब्‍दों में कह दिया कि सुरक्षा के समुचित इंतजाम के बिना वे एंबुलेंस नहीं चलाएंगे। दिल्‍ली सरकार कैट्स चालकों पर दबाव नहीं बना सकी तो फरमान जारी कर डीटीसी चालकों को तत्‍काल प्रभाव से एंबुलेंस चलाने के काम में लगा दिया। नजफगढ़ निवासी डीटीसी चालक एम. सिंह शेखावत का कहना है कि बिना किसी प्रशिक्षण और अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों के उन्‍हें जान-बूझकर मौत के मुंह में धकेलने की कोशिश की गई है। डीटीसी चालकों को बिना मास्‍क, सैनिटाइजर और पीपीई किट दिए ही धमका कर आपात चिकित्‍सा सेवा में लगा दिया गया, जिसके लिए कैट्स चालकों ने एंबुलेंस चलाने से इनकार कर दिया है।

 

सफाई कर्मियों को भी कई माह से वेतन नहीं

निगम के सफाई कर्मियों का भी यही हाल है। कहने को सफाईकर्मी कोरोना योद्धा हैं, लेकिन उन्‍हें कई माह से वेतन नहीं मिला है। कहने को केजरीवाल ने ड्यूटी के दौरान कोरोना योद्धा की मृत्‍यु पर एक करोड़ रुपये देने की घोषणा कर रखी है, लेकिन असलियत में इन्‍हें कोरोना योद्धाओं की श्रेणी में ही नहीं रखा गया है। ऐसे में केजरीवाल की यह घोषणा भी कोरी बकवास ही साबित हो रही है। चाहे वह राशन की दुकान पर निगरानी करने वाली महिला शिक्षिका बी.सरकार का मामला हो या महिला सिपाही शैली, अमित राणा या सफाई कर्मचारी, किसी की भी सरकार को सुध नहीं है। गौरतलब है कि हाल ही में उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह कहते हुए केंद्र सरकार से 5,000 करोड़ रुपये की मांग की है कि दिल्‍ली सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है। हैरत की बात है कि किसी भी सरकार के बजट में पहले से ही कर्मचारियों के वेतन मद की राशि अलग रखी जाती है। यह रकम केजरीवाल सरकार ने कहां खर्च कर दी ? या बजट ही नहीं बनाया जिससे कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके ? दिल्‍ली सरकार जिस सरप्‍लस राजस्‍व का दम भरती थी, वह कहां गया ?

कोरोना संक्रमितों के शव खुले में जलाने का आदेश

दिल्ली ने निगमबोध घाट और पंजाबी बाग सहित सभी बड़े श्‍मशान घाटों पर कोविड-19 से मरने वाले लोगों के शव खुले में लकड़ी से जलाने का आदेश जारी किया गया है। अधिकारी श्‍मशान घाट पर काम करने वालों पर इसके लिए दबाव बना रहे हैं। लेकिन अंत्येष्टि करवाने वाले आचार्य एवं कर्मी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि शमशान घाट पर खुले में जब शव जलता है तो उसकी राख उड़ती है। ऐसे में जब कोरोना संक्रमित शव खुले में जलेंगे तो उनकी भी राख उड़ेगी जो वहां मौजूद लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। सवाल है कि जब लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने सीएनजी से शवों की अंत्‍येष्टि का निर्णय किया था तो अब यह फैसला क्‍यों ? दिल्‍ली भाजपा प्रवक्‍ता प्रवीण शंकर कपूर ने राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री से खुले में लकड़ी से कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्‍येष्टि का फैसला लोकहित में वापस लेने का अनुरोध किया है।