राशन वितरण में भी फर्जीवाड़ा

    दिनांक 10-जून-2020
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अवंतिका

केंद्र सरकार की तरफ से महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान यह व्‍यवस्‍था की गई कि एक भी गरीब, जरूरतमंद या श्रमिक भूखा न रहे। इसके लिए केंद्र ने आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों को राशन देने का लक्ष्‍य रखा और प्रत्‍येक राज्‍य को तय संख्‍या के अनुपात में धन और राशन दिया। लेकिन देशभर में कुल 20.36 लाख श्रमिकों को ही राशन दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली सरकार कैसे 72 लाख लोगों को राशन देने का दावा कर रही है ?
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केंद्र सरकार की तरफ से महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान यह व्‍यवस्‍था की गई कि एक भी गरीब, जरूरतमंद या श्रमिक भूखा न रहे। इसके लिए केंद्र ने आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों को राशन देने का लक्ष्‍य रखा और प्रत्‍येक राज्‍य को तय संख्‍या के अनुपात में धन और राशन दिया। लेकिन देशभर में कुल 20.36 लाख श्रमिकों को ही राशन दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली सरकार कैसे 72 लाख लोगों को राशन देने का दावा कर रही है ?

महत्‍वपूर्ण बात यह है कि 2016 के बाद से दिल्‍ली में नया राशन कार्ड बना ही नहीं। राशन कार्ड बनाने के नाम पर केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री और विधायकों की करतूत कितनी शर्मनाक थी, यह जगजाहिर है। लेकिन इन सब से बेपरवाह केजरीवाल का ध्‍यान केवल इस बात पर होता है कि किसी भी तरह उनका और उनकी पार्टी का प्रचार होना चाहिए, इसके लिए चाहे झूठा दावा भी क्‍यों न करना पड़े।

बहरहाल, केजरीवाल सरकार ने पहले 72 लाख लोगों को राशन देने का दावा किया, लेकिन परेशानियां अधिक प्रचारित होने पर मामला शांत करने के लिए उन्होंने अन्य पार्टियों के दबाव में ई-कूपन के जरिए राशन देने की व्‍यवस्‍था शुरू करने की बात कही। लेकिन इसमें भी कभी तो सर्वर डाउन रहा तो कभी सरकारी सस्ते गल्ले वालों की मेहरबानी रही। इन सब कारणों से कूपन बना ही नहीं और किसी तरह बन गया तो कुछ ही लोग राशन ले सके। कारण, ई-कूपन 24 घंटे के लिए ही मान्‍य था। यानी कूपन पर 24 घंटे के भीतर ही राशन लिया जा सकता है। बात यहीं खत्‍म नहीं हुई। खुद को गरीबों और मजदूरों का मसीहा दिखाने के लिए केजरीवाल ने नया शिगूफा छोड़ा कि सभी विधायकों को 2,000 ई-कूपन और राशन किट दिए जाएंगे ताकि वह अपने क्षेत्र में प्रवासी श्र‍मिकों और जरूरतमंदों के बीच उसे बांट सकें।

लेकिन करावलनगर से भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट का साफ कहना है कि यह भी केजरीवाल द्वारा लोगों को गुमराह करने का तरीका है। अव्वल तो उन्हें कूपन और राशन मिला ही नहीं और यदि मिलता तो भी समस्या खड़ी होती, क्योंकि उनके विधानसभा में करीब तीन लाख लोग हैं। इनमें अधिकतर गरीब और प्रवासी श्रमिक हैं। ऐसे में वह किस तरह से इन कूपनों और सीमित राशन किट के भरोसे लोगों को राहत दे पाते।

यही कारण रहा कि उन्‍होंने न केवल उपराज्‍यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर कूपन वापस करने की बात कही, बल्कि भाजपा के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनके आवास पर जाकर कूपन भी लौटा दिए। अलग बात है कि भाजपा प्रतिनिधिमंडल केजरीवाल से समय लेकर मुख्‍यमंत्री आवास पर गया, लेकिन घर में होने के बावजूद उन्‍होंने मिलना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल को अपना ज्ञापन वहां मौजूद अधिकारियों को ही सौंपना पड़ा।