यूनाइटेड अगेंस्ट हेट की दुकान और धंधा नफरत का, खालिद सैफी हुआ गिरफ्तार

    दिनांक 10-जून-2020   
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दिल्ली दंगों में एक और गिरफ्तारी हुई है और वह खालिद सैफी की। खालिद जो संगठन चलाता है, उसका नाम उसने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट है लेकिन उसकी गिरफ्तारी उसी नफरत को फैलाने के लिए हुई, जिसे दूर करने का वह दावा कर रहा था।
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टुकड़े—टुकड़े गैंग के सरगना उमर खालिद पर दो साल पहले 13 अगस्त, 2018 को गोली चलने की घटना अब कितने लोगों को याद है ? उस समय सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग था, जो कह रहा था कि यह सब ढोंग है। यह झूठ है। उमर खालिद लोगों की सहानुभूति बटोरना चाहता है। कन्स्टीट्यूशनल क्लब के दरवाजे पर कोई इस तरह गोली चलाकर हवा हो जाए और किसी को खबर तक न हो सिवाय एक चश्मदीद के। यह कैसे संभव है ?

दूसरी तरफ लेफ्ट—लिबरल गिरोह था, जो वैज्ञानिक चेतना से लैश होकर बड़े तार्किक तरीके से उमर खालिद पर हुए हमले को एक संगठन से जोड़कर षडयंत्र बता रहा था। एएनआई ने उमर पर गोली चलने की खबर एक चश्मदीद के हवाले से ब्रेक की थी लेकिन उसका नाम खबर में नहीं डाला। आज दो साल के बाद उस चश्मदीद का नाम सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक सुर्खियों में है। उसका नाम था—खालिद सैफी।

खालिद सैफी वह अकेला आदमी था, जिसने उमर खालिद पर गोली चलते हुए कथित तौर पर अपनी आंखों से देखा। अब यह नाम दिल्ली दंगों से भी जुड़ गया है। दिल्ली दंगों की तैयारी में यह व्यक्ति जनवरी से ही सक्रिय था। इसी ने उमर खालिद से आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की मुलाकात 8 जनवरी को करवाई। चांद बाग में हुई हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में अब खालिद सैफी को गिरफ्तार किया गया है।

खालिद सैफी जो संगठन चलाता है, उसका नाम उसने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट रखा और उसकी गिरफ्तारी उसी नफरत को फैलाने के लिए हुई, जिसे दूर करने का वह दावा कर रहा था। लोगों के बीच उसका चेहरा समाजसेवी का था। वह नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों में सक्रिय था। वह 2019 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी का प्रचार करता हुआ दिखा था।
 
जगतपुरी दंगों में भी पहले खालिद सैफी का नाम आ चुका है। जिसमें उसकी 26 फरवरी को गिरफ्तारी भी हुई थी। उस पर दंगों से जुड़े तीन मामले पहले से दर्ज हैं। यूं कहते हैं कि इस्लाम में जाति नहीं होती लेकिन उसकी और ताहिर हुसैन की जाति एक है। दोनों सैफी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद उस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ जो कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के लिए लगातार हेट कैम्पेन चला रहा था। दंगों के दौरान और उसके बाद भी दिल्ली में डिजाइनर पत्रकारों और छद्म बुद्धीजीवियों का समूह वहां घटी सारी घटना को कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर से जोड़ने में लगा रहा, जिनका दिल्ली दंगों से कुछ लेना—देना नहीं था। अब वह सारे लोग खालिद सैफी के करीबी नजर आ रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, मनीष सिसोदिया, कन्हैया कुमार, आरफा खानम शेरवानी, ये वे नाम हैं, जो दिल्ली दंगो के मास्टर माइंड खालिद सैफी के साथ मुस्कुरा कर तस्वीर खिंचवाते मिले हैं। यही वे लोग हैं जो कपिल मिश्रा के शब्दों में — ''मिलकर चिल्ला रहे हैं, लेख लिख रहे है, रोज टीवी पर गला फाड़ रहे हैं। कपिल मिश्रा आतंकी हैं, कपिल मिश्रा को गिरफ्तार करो। सोचिये कितनी गन्दी और भयानक साजिश है।''

खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद जब पूरा लेफ्ट लिबरल गिरोह एक्सपोज होने लगा तो उन्होंने कपिल मिश्रा और खालिद की तस्वीर साझा करनी शुरू कर दी। इसमें हास्यास्पद बात यह थी कि तस्वीर उस समय की थी, जब कपिल केजरीवाल सरकार में मंत्री हुआ करते थे। बाद के दिनों में इस व्यक्ति ने कपिल मिश्रा मुर्दाबाद के पोस्टर हाथ में लेकर कपिल के खिलाफ नारे भी लगाए हैं।

 सैफी दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की टीम बी का सदस्य है। दिल्ली दंगों से दो दिन पहले वह दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिलकर गया था। मनीष सिसोदिया को बताना चाहिए कि उनकी क्या बात हुई ? क्या उसने दंगों के संबंध में भी उनसे कोई बात की थी ?

जगतपुरी दंगों में भी पहले खालिद सैफी का नाम आ चुका है। जिसमें उसकी 26 फरवरी को गिरफ्तारी भी हुई थी। उस पर दंगों से जुड़े तीन मामले पहले से दर्ज हैं। यूं कहते हैं कि इस्लाम में जाति नहीं होती लेकिन उसकी और ताहिर हुसैन की जाति एक है। दोनों सैफी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। जब खालिद सैफी ने 8 जनवरी को पार्षद ताहिर हुसैन को उमर खालिद से मिलवाया तो खालिद ने उन्हें कहा था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में होंगे तो हमें कुछ बड़ा करना है। इस बड़े काम के लिए पैसों की व्यवस्था पीएफआई से जुड़े लोग करेंगे। जनवरी में उमर खालिद ने जो मीटिंग में कहा, उसे फरवरी में सबने होते हुए देखा। मतलब जो कहा, उसे करके दिखाया।