गोकशी करने पर अब होगी दस वर्ष की सजा

    दिनांक 10-जून-2020   
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कैबिनेट की बैठक में  यह तय किया गया कि प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश गो वध निवारण (संशोधन ) अध्यादेश लायेगी.  विधानसभा का सत्र चलने पर इसे दोनों सदनों से पारित कराया जाएगा. कैबिनेट में स्वीकृत किये गए प्रस्ताव के अनुसार गोकशी करने पर 3 लाख रूपये से 5 लाख रूपये तक जुर्माना लगेगा.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लगातार गोवंश के संरक्षण के लिए गंभीर हैं. गोकशी की घटनाओं पर नियंत्रण करने के लिए प्रभावी कदम उठाये गए हैं मगर हाल के वर्षों में यह देखने में आया कि गोकशी के अपराध में  जिन अभियुक्तों को जेल भेजा गया था. उन अभियुक्तों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई. यह भी पाया गया कि जमानत मिलने के बाद उन अभियुक्तों ने फिर से गोकशी शुरू कर दिया. इसलिए कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पारित कर गोकशी की सजा को और सख्त बनाया गया है. अब गोकशी करने पर सात वर्ष के बजाय दस वर्ष की सजा होगी. अभी तक गोवंश को नुकसान पहुंचाने पर किसी भी प्रकार की सजा का प्रावधान नहीं था. अब  गोवंश को शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर एक से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है. कैबिनेट की बैठक में  यह तय किया गया कि प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश गो वध निवारण (संशोधन ) अध्यादेश लायेगी.  विधानसभा का सत्र चलने पर इसे दोनों सदनों से पारित कराया जाएगा. कैबिनेट में स्वीकृत किये गए प्रस्ताव के अनुसार गोकशी करने पर 3 लाख रूपये से 5 लाख रूपये तक जुर्माना लगेगा.  एक बार गोकशी का अपराध सिद्ध हो जाने के बाद अगर दोबारा गोकशी के अपराध में गिरफ्तार किया गया तो ऐसे अभियुक्त  के लिए दोहरे दंड का प्रावधान किया गया है. जो गाय बरामद होंगी उनके एक वर्ष तक के भरण-पोषण की वसूली अभियुक्त से होगी.


उल्लेखनीय है कि गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करा दिया था. गोवंश की तस्करी और गो-हत्या के अपराधियों के साथ सख्ती से निपटा गया.  यांत्रिक कत्लखानों एवं गोकशी पर नियंत्रण लगने से सड़कों  एवं खेतों में निराश्रित घूमने वाले गोवंश की संख्या में कुछ वृद्धि होने लगी थी इसलिए निराश्रित गोवंश को आश्रय स्थल में रखने की व्यवस्था की गई. प्रदेश के 68  जनपदों में वृहद् गो संरक्षण केंद्र बनाये गए. बुंदेलखंड के 7 जनपदों में निराश्रित गोवंश के लिए 36 आश्रय स्थल का निर्माण किया गया. इन आश्रय स्थलों के निर्माण में 10 करोड़ रूपये का खर्च वहन किया गया.  वर्ष 2017-18 में मंडी परिषद से होने वाली आय पर एक प्रतिशत का सेस लगाया गया था . सेस लगाने के बाद 39  गोशालाओं को 7 करोड़ 80  लाख रूपये दिए गये. वर्ष 2018 -19  में अन्य 15  गोशालाओं को एक करोड़ रूपये से अधिक योगदान दिया गया.

 पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश के सभी नगर निगमों को गोवंश के संरक्षण एवं उनके भरण - पोषण के लिए 17 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया. इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने आदेश दिया कि  जिला पंचायत अपने संसाधन से हो रही आय में से प्रावधान करके गायों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए.