अर्थतंत्र का ईंधन

    दिनांक 11-जून-2020
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अरविन्द मिश्रा

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल उपलब्धियों  भरा रहा। इस दौरान अनुच्छेद-370, तीन तलाक, नागरिकता संशोधन कानून और अयोध्या विवाद के  निपटारे  जैसे अभूतपूर्व कार्य किए गए। साथ ही, सरकार ऊर्जा के क्षेत्र में भी जबरदस्त काम कर रही है।वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ते कदम अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाएंगे
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केंद्र सरकार ने 102 लाख करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय ढांचागत पाइपलाइन परियोजना शुरू की  है। (फाइल चित्र)


केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 ने एक साल पूरा कर लिया है। अपनी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार सोशल मीडिया का सहारा ले रही है। इसमें दो राय नहीं कि पिछले कार्यकाल के मुकाबले मोदी सरकार-2.0 की एक साल की उपलब्धियां काफी अधिक हैं। दूसरी बार सत्ता में आने के बाद एक साल के भीतर सरकार ने कई साहसिक निर्णय लिए, चाहे अनुच्छेद 370 और 35-ए की समाप्ति हो, तीन तलाक पर कानून, नागरिकता संशोधन कानून और न्यायपालिका के माध्यम से ही सही अयोध्या विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा हो। निश्चित रूप से वर्तमान सरकार का दूसरा कार्यकाल अभूतपूर्व राजनीतिक निर्णयों के लिए जाना जाएगा। इसके अलावा, एक साल के भीतर ऊर्जा के क्षेत्र के भीतर मौजूदा सरकार ने जो काम किया है, वह भी एक बड़ी उपलब्धि है। इसलिए ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और इसके कारण देश की जनता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन बेहद जरूरी है।

‘स्वच्छ र्इंधन, बेहतर जीवन’ के उद्देश्य से 1 मई, 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से शुरू हुई ‘उज्ज्वला योजना’ के हितग्राहियों की संख्या विगत एक वर्ष में 8 करोड़ 50 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। जल्द ही यह योजना 10 करोड़ हितग्राहियों तक पहुंच जाएगी। ‘उज्ज्वला योजना’ भारत जैसे विकासशील देश के लिए कितनी सहायक सिद्ध हो रही है, इसका आकलन दक्षिण अफ्रीकी देश घाना के उस प्रस्ताव से लगाया जा सकता है, जिसमें उसने अपने यहां उज्ज्वला जैसी योजना को लागू करने के लिए भारत से विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग मांगा है। केंद्र सरकार इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है, जो देश के अर्थतंत्र में हलचल पैदा करने वाली हैं। इनमें सबसे प्रमुख है शहरी गैस वितरण तंत्र (सीजीडी), जिसे महानगरों से छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचाने की तैयारी है। अभी तक महानगरों में ही पीएनजी और सीएनजी का प्रयोग हो रहा है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब छोटे शहरों और कस्बों में भी पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस की आपूर्ति होगी और सड़कों पर सीएनजी वाहन दौड़ते नजर आएंगे।

2030 तक भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी दोगुनी हो जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिलेगी तथा पर्यावरण को लेकर हम अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं को भी पूरा कर सकेंगे। यह सब कुछ देश की अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में तब्दील करने के प्रयासों के अंतर्गत किया जा रहा है। गैस आधारित अर्थव्यवस्था से तात्पर्य है, अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना।

हालांकि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही इस दिशा में कदम बढ़ा दिया था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में सीजीडी पर लंबी छलांग लगाने की तैयारी है। पिछले वित्तीय वर्ष में सीजीडी के 10वें दौर की निविदा प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब रफ्तार पकड़ चुकी है। इसके तहत देश के 400 शहरों तक पाइपलाइन के जरिए गैस की आपूर्ति होगी। वहीं, 10 हजार सीएनजी स्टेशन का नेटवर्क भी खड़ा किया जा रहा है। यदि मौजूदा रफ्तार से सरकार शहरी गैस पाइपलाइन परियोजना पर काम करती रही तो देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का सपना साकार हो जाएगा। इसमें 4.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश सहायक होगा। कोरोना संकट के बाद भी यह कई मोर्चोें पर अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगा। मसलन, 2030 तक भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी दोगुनी हो जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिलेगी तथा पर्यावरण को लेकर हम अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं को भी पूरा कर सकेंगे। यह सब कुछ देश की अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में तब्दील करने के प्रयासों के अंतर्गत किया जा रहा है। गैस आधारित अर्थव्यवस्था से तात्पर्य है, अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना।

वर्तमान में ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी मात्र 6.2 प्रतिशत है। भारत का लक्ष्य 2030 तक इसे 15 प्रतिशत तक ले जाने का है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राकृतिक गैस के कारण देश में कार्बन उत्सर्जन घटेगा। प्राकृतिक गैस र्इंधन का बेहतर विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र्र मोदी भारती अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर के स्तर पर ले जाने का जो स्वप्न देख रहे हैं, वह गैस आधारित अर्थव्यवस्था के बिना मुमकिन नहीं है। इसके अलावा, ऊर्जा के क्षेत्र चल रही अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में ‘वन नेशन, वन ग्रिड‘ योजना का उल्लेख महत्वपूर्ण है।

देश में हर घर को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलती रहे, इसके लिए ‘वन नेशन, वन ग्रिड’ योजना शुरू की गई है। केंद्र्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन 2019 के बजटीय भाषण में इसका रोडमैड प्रस्तुत कर चुकी हैं। इसके जरिए सभी राज्यों को एक ही ग्रिड से बिजली प्रदान की जाएगी। यह 25 सितंबर, 2017 को दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर शुरू की गई प्रधानमंत्री सहज बिजली, हर घर योजना (सौभाग्य) को भी मजबूती प्रदान करेगी।

जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन ही 2022 तक देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के मोदी सरकार के लक्ष्य का संधान करेगा। देश में बिजली की सबसे अधिक खपत रेलवे में होती है, इसलिए 2020-21 तक सरकार समूचे ब्रॉडगेज नेटवर्क के विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लेगी। यही कारण है कि डीजल इंजनों की खरीद पर पूरी तरह रोक पहले ही लगा दी गई है। इससे भारतीय रेलवे हर साल 2.8 अरब लीटर डीजल की बचत करेगा, जिससे 13,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण कार्य पूरा हो जाने के बाद रेलवे की कार्यक्षमता में भी 10-15 प्रतिशत का इजाफा होगा। वहीं, देश की सबसे बड़ी ढांचागत परियोजना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियां बिजली वाले इंजन से चलेंगी। देश के समग्र विकास के लिहाज से सुखद संकेत यह है कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ पूर्वी भारत में रहेगा। वही पूर्वी भारत जो कभी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था को दिशा देता था, लेकिन पिछली सरकारों की उदासीनता के कारण आर्थिक विकास यात्रा में यह पिछड़ गया। बाद में यही क्षेत्र राज्यों की श्रेणी में आ गया।

मोदी सरकार ने अपने पहले साल के कार्यकाल में आर्थिक मोर्चे पर जो बड़े अभियान शुरू किए हैं, उनमें ‘मिशन पूर्वोदय’ की चर्चा दुनियाभर में हुई है। ‘मिशन पूर्वोदय’ आत्मनिर्भर भारत के लिए इस्पात, खनिज, तेल एवं गैस के साथ रोजगार के अवसर भी मुहैया कराएगा। 102 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय ढांचागत पाइपलाइन परियोजना के जरिए इसका आगाज हो चुका है। लेकिन यह सभी कवायद तभी सफल होगी, जब घर-घर रसोई गैस, बिजली और ऊर्जा के संसाधन उपलब्ध होंगे।

ऊर्जा के संसाधनों के केंद्र्रीकरण को हमें रोकना होगा। ऊर्जा के न्यायोचित व लोकतांत्रिक वितरण के बिना इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यही ऊर्जा का लोकतंत्र और अंत्योदय की सच्ची साधना होगी। (लेखक ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ हैं)