दिल्ली दंगों का सच और साक्ष्यों पर पाञ्चजन्य की वेबिनार में हुई चर्चा, देखें वीडियो

    दिनांक 12-जून-2020
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'दिल्ली दंगों का सच, षड्यंत्र की कहानी साक्ष्यों की जुबानी' विषय पर पाञ्चजन्य ने एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में सीआरपीएफ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक दीपक मिश्रा एवं नीरज अरोड़ा मुख्य वक्ता थे। पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने उनसे बात की
दिल्ली दंगों की पड़ताल कर रही संस्था कॉल फॉर जस्टिस के सदस्य नीरज अरोड़ा ने बताया कि दिल्ली में हुए दंगे कोई आम दंगे नहीं थे। इन दंगों को पूरी योजना के साथ भड़काया गया था। देश विरोधी ताकतें इस तरह घटना हो इसके लिए लंबी तैयारी कर रहे थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट का हवाला देते हुए बताया कि दंगों में लिए पीएफआई, पिंजरा तोड़ जैसे संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि आतंकी संगठन आईएस के तार भी दंगाइयों से जुड़े हैं। दंगों के लिए तो पैसा मुहैया कराया गया उसके विदेशों से धन मुहैया कराया गया। यह सोचने वाली बात है कि जिस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति आए उस दिन दंगा भड़का। शाहीन बाग में दंगा क्यों नहीं भड़का, यमुनापार में वो भी उत्तरपूर्वी दिल्ली में ही दंगा क्यों भड़का। कई ऐसी बातें हैं जो स्पष्ट इशारा करती हैं कि दंगों के लिए पूरी साजिश रची गई और फिर दंगे भड़काए गए।
दीपक मिश्रा ने कहा कि अचानक दंगा हो गया यह कहना सही नहीं है। दिल्ली में इसके लिए पहले से माहौल बनाया गया। लगातार जो घटनाएं हो रही थीं उससे हमें समझ जाना चाहिए था
कुछ न कुछ तो गलत हो सकता है। कुछ गलती सूचना तंत्र की भी रही कि वह इस इस दंगों से पहले सूचनाएं नहीं जुटा पाया। लेकिन एक बाद तय है कि दंगे अचानक नहीं हुए। एक योजना के तहत एक समुदाय के मन में विक्टिम सिंड्रोम विकसित किया गया कि उनके साथ गलत हो रहा है। लगातार उसे हवा दी गई और इसके बाद योजना के तहत दंगे भड़काए गए। सबसे आसान है विक्टिम सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति को भड़काना और दिल्ली में हुए दंगे इसी का परिणाम हैं।