लॉकडाउन अवधि में उपलब्धियों के नाम पर सिर्फ फर्जी दावे हैं अरविंद केजरीवाल सरकार की झोली में

    दिनांक 15-जून-2020   
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लॉकडाउन अवधि में दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की पूरी पोल खुलकर सामने आ चुकी है।
उनके विश्व स्तरीय अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्था की तो पोल खुली ही है बाकी श्रमिकों के भोजन से लेकर उन्हें आश्रय उपलब्ध कराने के नाम पर जो झोलझाल किया गया वह सरकार की सारी हकीकत को बयां करने के लिए काफी है

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आआपा सरकार की कार्यशैली समझ से परे है। जब मजदूरों को सबसे ज्‍यादा मदद की जरूरत थी, तब उन्‍हें दिल्‍ली से भगाने के लिए अफवाहें फैलाई गईं। उन्‍हें खाना तक नहीं दिया गया। फिर 1200 श्रमिकों को ट्रेन से मुजफ्फरपुर भेजने के बाद बिहार सरकार से पैसे मांगे और दूसरी ओर दावा किया कि दिल्‍ली सरकार के खर्चे पर उन्‍हें भेजा गया। इस महीने की शुरुआत में आआपा के राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने विशेष विमान से प्रवासी श्रमिकों को बिहार भेजा। यही नहीं, सांसद महोदय भी उनके साथ पटना पहुंच गए। क्‍या वह श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने गए ? क्‍या उनके बिना श्रमिक खुद नहीं जा सकते थे ?

दरअसल, बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और संजय सिंह के पास बिहार का प्रभार है। संकट में फंसे श्रमिकों की सहायता करके उन्‍होंने बहुत अच्‍छा काम किया, लेकिन उनका यह कहना कि बिहार सरकार को अपने लोगों की चिंता नहीं है और वह उनकी मदद नहीं कर रही है, ऐसा कह कर क्‍या वह राजनीति नहीं कर रहे हैं ? आआपा सांसद के आरोप पर पलटवार करते हुए बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने भी इसे चुनावी चाल करार दिया था। उन्‍होंने कहा था कि वह इस तरह के नाटक के जरिए बिहार में अपनी गुंजाइश देख रहे हैं। लेकिन उन्हें इससे कोई फायदा नहीं होगा। जब हमारे प्रवासी मजदूरों को मदद की सबसे ज्‍यादा जरूरत थी, जब वह भारी संकट में थे, तब उनके साथ छल किया गया। उस स्थिति में उन्‍हें बहकाकर भगा दिया और अब हवाई जहाज से लाने की नौटंकी कर रहे हैं ? अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है तो वह बिहार के लोगों से माफी मांगें।



बेघरों को आश्रय और भोजन का का दावा भी झूठा ?

 
दिल्‍ली सरकार दावा करती है कि वह बेघरों को आश्रय गृह उपलब्‍ध करा रही है। रोजाना रैन बसेरों और स्‍कूलों के जरिए जरूरतमंदों को दो वक्‍त का खाना खिला रही है। सरकार तो आधी दिल्‍ली को राहत सामग्री और भोजन का भी दावा कर रही है, लेकिन सचाई इसके उलट है। 11 अप्रैल को गुस्‍साए करीब 200 लोगों ने कश्‍मीरी गेट स्थित तीन रैन बसेरों में आग लगा दी थी और पथराव के साथ पुलिस वाहन में भी तोड़फोड़ की थी। दमकल की छह गाडि़यों को आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्‍कत करनी पड़ी थी। सामान्‍य दिनों में इन रैन बसेरों में 250 लोग सोते हैं, लेकिन सामाजिक दूरी के कारण महज 60 लोग ही अंदर सो पा रहे थे। इस घटना पर भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने ट्वीट किया, ‘अरविंद केजरीवाल यह भी दावा करते रहे कि फुटपाथ पर रहने वालों के लिए रैन बसेरों में रहने की व्‍यवस्‍था की गई है, लेकिन इसकी सोशल मीडिया ने पोल खोल दी। यही नहीं, अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह में एक रैन बसेरा में आग लग गई। मुख्‍यमंत्री निवास से मुश्किल से 2 किलोमीटर की दूरी पर इस घटना का होना अत्‍यंत चिंताजनक है। हम सब आपके साथ मिलकर काम करने का आपको भरोसा दे चुके हैं और बिना कहे कर भी रहे हैं। ये क्‍या हो रहा है दिल्‍ली में केजरीवाल जी। ध्‍यान दें यह बहुत जरूरी है।’

क्‍या पूरी दिल्‍ली भूखी थी ?


इसी तरह, दिल्‍ली में फंसे प्रवासी श्रमिकों ने भी केजरीवाल की प्रचारित उत्‍तम व्‍यवस्‍था की पोल खोली। बेरोजगार और कई दिनों से भूखे ये प्रवासी श्रमिक पैदल ही घर के लिए निकल गए। उनका कहना था कि जब भूखे-प्यासे यहां मरना ही है तो रास्‍ते में ही मर जाएंगे। केजरीवाल सरकार अप्रैल में जब 10 लाख से अधिक लोगों को राशन और भोजन उपलब्‍ध कराने का दावा कर रही थी। अब कहती है कि एक करोड़ लोगों को राशन और खाना दे रही है। लेकिन सच्‍चाई यह है कि उसने आज तक न तो राहत सामग्री वितरण केंद्र और न ही अपनी रसोई की सूची जारी की। यानी केजरीवाल सरकार जो दावा कर रही है उसमें बड़ा झोलझाल है। हकीकत में दिल्‍ली में भाजपा सांसद-विधायक-पार्षद, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और इससे जुड़े संगठन, गुरुद्वारे, अन्‍य धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन और अन्‍य लोग अपने स्‍तर पर बड़े पैमाने पर लोगों को राहत सामग्री और भोजन बांट दिखे। दिल्‍ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की ओर से रोजाना एक लाख लोगों के लिए लंगर चलाया जा रहा था। इस्‍कॉन द्वारका भी रोज सुबह-शाम 1.5 लाख लोगों को प्रसाद उपलब्‍ध करा रहा था। सवाल है कि क्‍या पूरी दिल्‍ली ही भूखी थी ? दिल्‍ली सरकार किसे और क्‍या खिला रही थी ? केजरीवाल के दावों की बखिया उधेड़ने वाले ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्‍ध हैं। दिल्‍ली सरकार पर हमला बोलते हुए 6 अप्रैल को भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने टृवीट किया, ’मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं कि वो 8-10 लाख लोगों को रोज भोजन-राशन दे रहे हैं। ऐसा होता तो अखबार में किचन का विज्ञापन आ चुका होता। मैं चुनौती देता हूं मुख्‍यमंत्री को कि वह जगह दिखाई जाए, जहां खाना बन रहा है।’

कीड़े वाला भोजन, दाल की जगह पानी

दिल्‍ली सरकार लोगों को जो खाना खिला रही थी, उसकी गुणवत्‍ता सवालों के घेरे में है। उसके द्वारा परोसे जाने वाले भोजन की सचाई ने सोशल मीडिया पर उसकी पोल खोली। पश्चिमी दिल्‍ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने 4 अप्रैल को ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। यह वीडियो सीमापुरी के एक स्‍कूल का है। इसमें कीड़े वाला भोजन लोगों को परोसा जा रहा था। लोगों की शिकायत यह भी थी कि एक तो अधपका खाना बांटा जा रहा था, ऊपर से इसमें कीड़े भरे हुए है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि गरीबों को खिचड़ी के नाम पर उल्‍टी जैसा दिखने वाला पानी परोसा जा रहा है। यह कीड़ों से भी भरा हुआ है। उन्‍होंने केजरीवाल से कहा कि उनकी सरकार गरीबों को जो खाना खिलाकर अपनी पीठ थपथपा रही है, इसे उनकी पार्टी के विधायकों और नेताओं को खाकर देखना चाहिए। संकट के समय उनकी सरकार भ्रष्‍टाचार और निराशा ही परोस रही है। दिल्‍ली सरकार का यह कृत्‍य क्षमा योग्‍य नहीं है।


 
भोजन वितरण में घोटाले का आलम यह है कि दाल की जगह पानी बांटा जा रहा है। हालांकि इसका रंग दाल की तरह ही पीला है, लेकिन वह दाल नहीं है। इसके अलावा, कई जगहों पर जो खिचड़ी बांटी गई, वह जली हुई थी। लेकिन केजरीवाल को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह रोज नए दावे करते हैं, जो अगले ही पल दम तोड़ते दिखते हैं।