अब सूमरो पर ईशनिंदा का फंदा!

    दिनांक 16-जून-2020   
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पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया जाता है। इसके  नाम पर बड़ी संख्या में  अल्पसंख्यक  हिन्दुओं और ईसाइयों  को  यातनाएं दी जाती रही हैं।  कोई भी मुस्लिम व्यक्ति  एक रपट लिखवा दे , बस उसके बाद  शुरू हो जाता है उत्पीड़न का एक अंतहीन सिलसिला, जो उम्रकैद या
फांसी पर जाकर खत्म होता है

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1.साजिद सूमरो को उनके घर से गिरफ्तार करके ले जाते हुए पुलिसकर्मी 2.अदालत में अपने वकील के साथ सूमरो   3.अब कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर हैं महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली प्रो. अरफाना मल्लाह। 4.सूमरो के विरुद्ध पुलिस में दर्ज एफआईआर की प्रति।


पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न खत्म होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। अब पाकिस्तान सरकार ने मौजूदा दौर के सूफी पंथ के पैरोकार प्रोफेसर साजिद सूमरो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए हैं। इस बारे में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार इस्लाम और मदरसा तालीम की मूलभावना को चोट पहुंचा रहे थे। चूंकि पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून आरोपी को मौत के फंदे तक ले जाता है, इसलिए सूफीवाद के समर्थकों ने उन्हें जेल से रिहा करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है।

साजिद सूमरो पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर शहर के शाह अब्दुल लतीफ विश्वविद्यालय के सिंधी भाषा विभाग में प्रोफेसर हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान में उनकी पहचान सूफी कवि एवं लेखक के तौर पर भी है। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। अपनी फेसबुक वॉल पर सूमरो लिखते हैं, ‘‘इबादत फरिश्ता तो बना सकती है, लेकिन इनसान नहीं बना सकती। इनसान दर्द से बनता है।’’

सूमरो कविवर रविंद्रनाथ ठाकुर, अभिनेता इरफान खान, नाना पाटेकर जैसी शख्सियतों से बेहद प्रभावित हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर इससे संबंधित कई तरह की सामग्री देखने को मिल जाएगी। उनकी गिनती पाकिस्तान के चर्चित इतिहासकार अता मुहम्मद के चाहने वालों में भी होती है।

फेसबुक पोस्ट पर गिरफ्तारी
खैरपुर के स्थानीय पत्रकार अबूबकर फारुक के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर हुई है। उनके विरुद्ध धारा 295,295ए, 298 और 153ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके आधार पर 11 जून की सुबह पुलिस ने उन्हें खैरपुर के अली मुराद इलाके से गिरफ्तार किया। उसके बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। अपनी गिरफ्तारी से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव में कहा कि ‘वह प्रोफेसर हैं और अभी घर में हैं। उन्होंने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में पाकिस्तान में सूफी पंथ के विकास पर चर्चा की थी। अब उसकी आड़ में पुलिस वाले उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इस समय यहां महिलाएं और बच्चे भी मौजूद हैं।’

पाकिस्तान सरकार ने मौजूदा दौर के सूफी पंथ के पैरोकार प्रोफेसर साजिद सूमरो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए हैं। इस बारे में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार इस्लाम और मदरसा तालीम की मूलभावना को चोट पहुंचा रहे थे। सूफीवाद के समर्थकों ने उन्हें जेल से रिहा करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है।

प्रोफेसर साजिद सूमरो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने वाले पुलिस अधिकारी गुलाम नबी नरीजो का कहना है कि एक दिन वह जब गश्त पर था तो एक मुखबिर से उसे सूफीवाद के बहाने प्रोफेसर द्वारा इस्लाम की मान्यताओं पर हमले की जानकारी मिली। पता चला कि सूमरो सोशल मीडिया के जरिए अपने विचारों से आम जन को प्रभावित करते हैं। इसकी शिकायत के बाद उन्हें ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फंसने वाले व्यक्ति को उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। हाल ही में ईशनिंदा के बहाने एक ईसाई महिला को कानूनी और सामाजिक तौर पर इतना प्रताड़ित किया गया कि परेशान होकर उसे पाकिस्तान से भागकर कनाडा में शरण लेनी पड़ी। इसी आरोप में कुछ दिनों पहले हिंदू शिक्षक का घर जला दिया गया था। ईशनिंदा को लेकर लगाए गए आरोप सिद्ध करने के लिए यहां किसी सबूत की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ पुलिस में शिकायत ही काफी होती है। इसके बाद पुलिस खुद ही सक्रिय हो जाती है। ईशनिंदा के आरोपियों को सामाजिक तौर पर भी कोई मद्द नहीं मिलती। इस वजह से पाकिस्तान में इस कानून का व्यक्तिगत लाभ के लिए खुलकर दुरुपयोग किया जाता है।

कट्टरपंथी जिसे चाहते हैं, उस पर ऐसे आरोप मढ़कर उसकी जिंदगी खराब कर देते हैं। साजिद सूमरो मामले में भी कट्टरपंथी महिला अधिकारों के लिए संघर्षरत प्रोफेसर अरफाना मल्लाह के पीछे पड़ गए हैं। मल्लाह ने ट्वीट कर कहा है कि साजिद सूमरो को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि वह ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग को लेकर हमेशा सवाल उठाते रहे हैं। अब मजहबी कट्टरपंथी ईशनिंदा की आड़ में उन्हें भी धमका रहे हैं।

उन्होंने सिंध की मुराद अली शाह सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर सूमरो को जेल से रिहा कराने की मांग की है। पाकिस्तान के कोलही छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष एवं पेशे से डॉक्टर धर्मेंद्र कोहली कहते हैं, ‘‘कट्टरपंथी हमेशा से ही सूफीवाद से नफरत करते आए हैं। उन्होंने भी सरकार से साजिद की रिहाई की मांग की है। साजिद सूमरो की गिरफ्तारी पर ब्रिटेन में रहने वाले सिंध के मूल निवासी एजाज चांदो कहते हैं कि सूफियों की धरती को कट्टरपंथियों से बचाना होगा। सामाजिक कार्यकर्ता बशीर मिरानी ने ‘वी आर सेक्युलर’ का नारा देते हुए पाकिस्तान की युवा पीढ़ी से देश को मजहबी कट्टरवाद से बचाने के लिए आगे आने की अपील की है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)