पाकिस्तानः अलीशेर और मजहबी कटृटरपंथियों की निर्दयतापूर्ण पिटाई से हिन्दू महिला का हुआ गर्भपात, पेट में थे जुड़वां बच्चे

    दिनांक 16-जून-2020   
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पाकिस्तान से एक ह्रदयविदारक घटना की खबर है।  सिंध प्रांत में कट्टरपंथियों ने हिंदू भील जनजाति की एक दंपति की इतनी बुरी तरह पिटाई की कि महिला का गर्भपात हो गया। उसके पेट में जुड़वां बच्चे पल रहे थे। पिटाई से घायल पति-पत्नी एक स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पीड़ितों द्वारा पुलिस को सूचित किए जाने के बावजूद ओरोपी बेखौप घूम रहे हैं।

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पाकिस्तान से एक ह्रदयविदारक घटना की खबर है। इसके सिंध प्रांत में कट्टरपंथियों ने हिंदू भील जनजाति की एक दंपति की इतनी बुरी तरह पिटाई की कि महिला का गर्भपात हो गया। उसके पेट में जुड़वां बच्चे पल रहे थे। पिटाई से घायल पति-पत्नी एक स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पीड़ितों द्वारा पुलिस को सूचित किए जाने के बावजूद ओरोपी बेखौप घूम रहे हैं। गौरतलब है कि इन दिनों भीलों पर हमले बढ़े हैं। हाल ही में मजहबी गुंडों ने भील समुदाय के कई घरों को फूंक दिया था।

ताजा घटना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थारपारकर जिले के मीठी की है। खबरों के मुताबिक गत दिनों अलीशेर नामक एक मजहबी गुंड़े के नेतृत्व में हथियारबंद लोगों ने मीठी में भीलों की बस्ती पर हमला कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि अलीशेर और उसके गुर्गे उनके जमीन-मकान को हड़पना चाहते हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने थारपारकर के उपायुक्त और जिले के पुलिस कप्तान को दी हुई है। इस सिलसिले में एक याचिका न्यायालय में भी लंबित है। इसके बावजूद मजहबी गुंडों की ओर से उन्हें अर्जी वापस लेने और उनकी संपत्ति हड़पने की निरंतर धमकी मिल रही थी। उन्हें दबाव में लेने की खातिर ही पिछले दिनों बवालियों ने अचानक उनके घरों पर हमला कर दिया और भारी तोड़-फोड़ की। इसका विरोध करने जब भील जनजाति का एक जोड़ा आगे आया तो उनकी इतनी निर्दयतापूर्वक पिटाई की गई कि महिला का गर्भपात हो गया। उक्त महिला के पेट में दो जुड़वां बच्चे थे। पिटाई और गर्भपात के कारण उसकी स्थिति चिंतनीय बनी हुई है। उसके पति को भी गहरी चोटें आई हैं। दोनों एक अस्पताल में उपचाराधीन हैं। घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से भील समुदाय डरा हुआ है। उन्होंने शासन— प्रशासन से आरोपियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है। बावजूद इसके उन्हें कहीं से मदद मिलती नहीं दिखाई दे रही है। सियासी रहनुमां चुनाव के समय वोट मांगने तो आ जाते हैं, पर इस समय वे भी कन्नी काटे हुए हैं।
 
दरअसल, भील समुदाय के लोग बटवारे के समय पाकिस्तान में रहने की सजा भुगत रहे हैं। पाकिस्तान के हिंदुओं में सर्वाधिक संख्या भीलों और कोलहियों की है और ये दोंनों ही वर्ग सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े होने के कारण हमेशा मजहबी गुंडों के निशानों पर रहते हैं। उनकी संपत्ति हड़पने को लेकर भी गहरी चाल चली जा रही हैं। इस क्रम में हाल में भीलों के एक गांव पर धावा बोलकर सारे घर फूंक डाले गए थे। यह घटना सिंध के संघर की है। गत दिनों मजहबी गुंडे अचानक उनके गांव पर टूट पड़े और उनके सारे कच्चे मकान आग के हवाले कर दिए। इस दौरान कपडे़, अनाज, बर्तन कुछ भी सलामत नहीं छोड़ा। सब आग में झोंक दिया। घटना के समय भील बिरादरी के लोग चीखते-चिल्लाते रहे, पर उन्हें बचाने कोई  नहीं आया। कुछ दिनों पहले थारपारकर में कट्टरपंथियों ने भील समुदाय के लोगों पर हमला कर उन्हें काफी नुक्सान पहुंचाया था। इसको लेकर सोशल मीडिया में जारी एक वीडियो में भील जनजाति की एक महिला ने अपने पैर दिखाते हुए बताया कि कैसे हमलावरों ने उसे गंभीर चोट पहुंचाकर घायल किया।

 भीलों पर अध्ययन करने वाली संस्था ग्लोबल परेयर कमेटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश बंटवारा के समय मेघवाड़ भीलों ने पाकिस्तान में ही रहने का निर्णय लिया था। यह जनजाति आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बेहद कमजोर है। इसके अधिकतर लोग छोटे किसान, खेतिहर मजदूर या दिहाड़ी श्रमिक हैं। 1992 में कानून बनने से पहले पाकिस्तान के जिहादी जमींदार भीलों को बंधक बनाकर रखते थे। रिपोर्ट कहती है कि चोरी-छुपे आज भी यह कुप्रथा पाकिस्तान में जारी है। कई जमींदार उन्हें बेड़ियों में जकड़ कर रखते हैं। यदि कोई जमींदारों की कुकृत्य का विरोध करता है तो सबक सिखाने के लिए उनके गांव के गांव जला दिए जाते हैं। हाल के दिनों में मेघवाड़ भीलों पर हमले के साथ कन्वर्जन की खातिर उनकी लड़कियों के अपहरण की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है।