लताड़ के बाद पाकिस्तान ने रिहा किए भारतीय उच्चायोग के कर्मचारी

    दिनांक 16-जून-2020   
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दिल्ली में पाकिस्तान के कार्यकारी उच्चायुक्त सैयद हैदर अली शाह को विदेश मंत्रालय में बुलाकर फटकार लगाने पर आखिकर इस्लामाबाद की सड़कों से गायब भारतीय उच्चायोग के दो कर्मियों को करीब बाहर घंटे बाद छोड़ दिया गया।

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दिल्ली में पाकिस्तान के कार्यकारी उच्चायुक्त सैयद हैदर अली शाह को विदेश मंत्रालय में बुलाकर फटकार लगाने पर आखिकर इस्लामाबाद की सड़कों से गायब भारतीय उच्चायोग के दो कर्मियों को करीब बाहर घंटे बाद छोड़ दिया गया। चूंकि पाकिस्तान के नस-नस में साजिश रची है, इसलिए इस ताजे मामले में भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। इसने भारतीय उच्चायोग के दोनों कर्मियों पर नकली मुद्राएं रखने और एक पाकिस्तानी को कार से टक्कर मार कर गंभीर रूप से घायल करने के आरोप लगाए हैं, पर वह व्यक्ति कौन है और घटना के बाद कहां गया? पाकिस्तान के पास इन सवालों के कोई जवाब नहीं हैं।
 
पाकिस्तानी पुलिस की हिरासत से छोड़े गए भारतीय उच्चायोग के दो कर्मियों में से एक सिल्वादास चालक पद पर तथा दूसरे द्वीमू ब्रहृा सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनमें से एक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। सोमवार की सुबह दोनों कर्मचारी उच्चायोग के किसी काम से बीएमडब्ल्यू कार से निकले थे। मगर तय समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचने। ऐसी स्थिति में जब खोज-खबर की गई तो उनका कहीं पता नहीं चला। इसके बाद भारतीय दूतावास ने इसकी सूचना इस्लमाबाद और दिल्ली को दे दी।

घटना को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने जब दिल्ली में पाकिस्तान के कार्यकारी उच्चायुक्त सैयद हैदर अली शाह को बुलाकर सख्त लहजे में ऐतराज जताया और इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के कर्मियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करने को सख्त हिदायत दी तो दबाव में आकर करीब बाहर घंटे बाद दोनों कर्मियों के कथित तौर पर हिट एंड रन मामले में गिरफ्तार किए जाने की सूचना दी। इससे पहले पाकिस्तानी सरकार मामले को देख लेने की बात कहकर टाल रही थी। उसकी ओर से कहा गया कि उच्चायोग के दोनों कर्मी तेजरफ्तार से बीएमडब्ल्यू कार में जा रहे थे, तभी उन्होंने खायबान-ए-सुहदावर्दी चौक पर सड़क पार करते समय एक व्यक्ति को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

इस पर वहां भीड़ जुट गई और उच्चायोग के कर्मियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। मगर कार की टक्कर से कौन घायल हुआ ? इस बारे में उसकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। पाकिस्तानी पुलिस का कहना है कि घायल व्यक्ति का पता नहीं चला है। शायद उसे भीड़ में से कोई किसी अस्पताल में ले गया हो।
 
इस मामले में पाकिस्तान ने अपनी साजिशी दिमाग का सबूत केवल यहीं नहीं दिया। सोमवार देर रात इस्लामाबाद के सचिवालय थाना में उच्चायोग कर्मियों को लेकर जो प्राथमिकी दर्ज की गई,उसमें तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के अलावा 10 हजार के नकली नोट रखने के भी आरोप लगाए गए हैं। सवाल है कि क्या सुरक्षा अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर कार्यरत कोई व्यक्ति किसी संवेदनशील जगह पर नकली नोट लेकर सड़कों पर घूमने की मूर्खता करेगा ?

भारत इसके अलावा कर्मचारियों के शरीर पर मिले घाव के बारे में भी जवाब चाहता है। पाकिस्तान पुलिस ऑपरेशन के उप-महानिरीक्षक वकारूद्दीन सैयद का कहना है कि गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मी राजनयिक नहीं हैं। क्या इससे यह अर्थ निकाला जाए कि इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में तैनात बाकी कर्मियों की सुरक्षा राम भरोसे है ?

 वैसे पाकिस्तान की हालत है कि वह अपने देश में तैनात राजदूतों के उत्पीड़न से भी गुरेज नहीं करता। हाल में ऐसी ही एक घटना सामने आ चुकी है। तकरीबन पखवाड़ा भर पहले दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके से जब भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पाकिस्तान उच्चायुक्त में पासपोर्ट का काम देखने वाले दो अधिकारियों आबिद हुसैन एवं मोहम्मद ताहिर को गिरफ्तार कर देश निकाला किया गया तो बदले की कार्रवाई में इस्लामाबद में भारतीय डिप्लोमेट गौरव अहलूवालिया उत्पीड़न का शिकार हुए। उनकी गतिविधियों पर पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी नजर रखने लगे। उनकी गाड़ी का पीछा किया गया और फोटोग्राफी की जाने लगी।

उच्चायोग के अधिकारियों के प्रति पाकिस्तान के सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार धमकी भरा था। भारत इसे राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन 1961 की मूल भावना का उल्लंघन मानता है। इस तरह का व्यवहार दोनों देशों के बीच 1992 के समझौते के आचार संहिता के विरूद्ध भी बताया गया है।