हिन्दू व्यापारी का शव श्मशान ले गए तो मजहबी कटृटरपंथियों ने की मारपीट,अर्थी को भी फेंका

    दिनांक 16-जून-2020   
Total Views |

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के दादू शहर में भी एक ऐसी घटना सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के शव के साथ श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के समय न केवल बुरी तरह परेशान किया गया बल्कि वहां मोैजूद लोगों के साथ मारपीट भी की गई।
o_1  H x W: 0 x

पाकिस्तान में हिंदुओं का अब अंतिम संस्कार भी मुश्किल है। जिहादी इसमें भी अड़ंगा लगाने लगे हैं। श्मशान घाटों पर अवैध कब्जे के साथ शवों का अंतिम संस्कार करने वालों से मारपीट भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के दादू शहर में भी एक ऐसी घटना सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के शव के साथ श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के समय न केवल बुरी तरह परेशान किया गया बल्कि वहां मोैजूद लोगों के साथ मारपीट भी की गई। इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेशनल एसेंबली के सदस्य खीलदास कोहिस्तान ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों की अक्रमण्यता पर नाराजगी जताई है।

 दादू के व्यापारी केवलराम राजनीति में भी दखल रखते थे। इसलिए उनका खासा रसूख था। गत दिनों उनकी कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। इस खबर को सुनकर वहां के लोग सन्न रह गए। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में रिश्तेदार और हिंदू बिरादरी के लोग जुटे। पीएमएल-एन के नेशनल एसेंबली के सदस्य खीलदास कोहिस्तान का कहना है कि दादू के तमाम लोग जब उनका शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो, उसके एक हिस्से पर अवैध कब्जा करने वालों ने उन पर हमला कर दिया। उनके साथ मारपीट की गई और अर्थी को फेंक दिया गया। शव के साथ छेड़-छाड़ का भी आरोप है।
 
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें स्थानीय मजहबी लोग अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट गए लोगों से मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। खीलदास ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद उन्होंने केवलराम के पुत्र डॉ. अशोक कुमार से हालचाल लेने के लिए फोन किया तो वह काफी डरे-सहमे हुए थे। उधर, घटना के बारे में स्थानीय पुलिस को जानकारी देने के बावजूद अब हंगामा और हमला करने वालों का नेतृत्व करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। खीलदास कोहिस्तान ने बताया कि उन्होंने इस बारे में खुद दादू के डीआईजी नईम शेख से बात की। उन्होंने बताया कि इस घटना को लेकर इजहार सोलंगी, यासीन और यूसुफ सोलंगी को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद अब तक सरगना पुलिस की पकड़ से बाहर है।
 
 इस तरह की यह इकलौती घटना नहीं है। श्मशान, मंदिर और चर्चोें पर अवैध कब्जे की अब तक अनेक वारदातें सामने आ चुकी हैं। अभी तक पाकिस्तान नाबालिग हिंदू लड़कियों के अपहरण और कन्वर्जन के मामले में ही बदनाम रहा रहा है, पर अब अल्पसंख्यकों के अंतिम संस्कार वाले स्थान पर अवैध कब्जे को लेकर भी यह सुर्खियों में है।
 
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने हाल में अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि पिछले एक वर्ष में देश के अल्पसंख्यकों की दशा अधिक खराब हुई है। उनपर हमले और उनकी संपत्तियों को हड़पने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। इस रिपोर्ट के बावजूद इमरान खान सरकार सचेत नहीं हुई, इसलिए ऐसी घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं। 19 मार्च को सिंध के घोटकी इस्माइल में हिंदुओं की जमीन पर अवैध कब्जा करने के लिए कट्टरपंथियों ने उनके करीब 25 घरों को फूंक दिया था। इस घटना में एक महिला की मौत की भी खबर है। इसी तरह घोटकी के व्यापारी सत्तन कुमार की कीमती जमीन हड़पने के लिए मजहबी गुंड़ों ने उनकी इतनी बुरी तरह पिटाई की वह अभी तक अस्पताल में चिकित्साधीन हैं।