चीन की हिमाकत पर सरकार सख्त, टेलीकॉम क्षेत्र में चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध की तैयारी

    दिनांक 18-जून-2020   
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चीन को तत्काल प्रभाव से आर्थिक रूप से चोटिल करने की तैयारी हो रही है। बीते बुधवार को सरकारी स्तर पर फैसला हो गया है कि टेलीकॉम मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कंपनी बीएसएनएल की 4जी टेक्नोलॉजी की स्थापना में चीन की कंपनियों को दूर रखा जाएगा।

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 गलवान घाटी में भारत—चीन सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर पूरे देश में आक्रोश स्पष्ट देखा जा सकता है। सरकार से लेकर देश के नागरिकों तक की ओर से चीन की हिमाकत का उत्तर देने के लिए हर स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में चीन को तत्काल प्रभाव से आर्थिक रूप से चोटिल करने की तैयारी हो रही है। बीते बुधवार को सरकारी स्तर पर फैसला हो गया है कि टेलीकॉम मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कंपनी बीएसएनएल की 4जी टेक्नोलॉजी की स्थापना में चीन की कंपनियों को दूर रखा जाएगा। खबरों की मुताबिक संचार मंत्रालय ने बीएसएनएल को इसका निर्देश दे दिया है। इससे स्पष्ट है कि चीनी कंपनियां अब इससे बाहर की जाएंगी।

खस्ताहाल बीएसएनएल सेवा को फिर से गति देने के लिए इन दिनों संचार विभाग की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं। बीएसएनएल की 4जी सेवा की स्थापना उनमें से एक हैं। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी चल रही है। खबरों के मुताबिक इस टेंडर में चीनी कंपनियों के प्रवेश को रोकने को लेकर टेंडर को नए नियमों के साथ फिर से जारी करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के सख्त रुख को देखते हुए जाहिर है कि अब 5जी तकनीकि के टेंडर में भी चीनी कंपनियों की दाल नहीं गलने वाली। ऐसे में स्पष्ट है कि चीन के लिए यह बड़ा नुकसान होगा।

निजी कंपनियों को चीनी सामान से परहेज के निर्देश
समाचारों के मुताबिक संचार विभाग मोबाइल सेवा क्षेत्र में भी चीन को आईना दिखाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में टेलीकॉम क्षेत्र की निजी कंपनियों को चीन की कंपनियों द्वारा बनाए गए उत्पादों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल सेवा से जुड़े उपकरणों में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं।