पाकिस्तान: मजहबी गुंडों के दवाब में खुदकुशी कर रहे हिन्दू नवयुवक-युवतियां

    दिनांक 19-जून-2020   
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पाकिस्तान स्थित सिंध प्रांत में आए दिन हिन्दू नवयुवक और युवतियों के शव फंदे से लटकते पाए जाते हैं। लेकिन पाकिस्तान का हिंदू समाज इन मौतों को खुदकुशी नहीं मानता। वह इसके पीछे मानता है कि मजहबी गुंडे उनकी संपत्तियों को हड़पने के लिए इतना दवाब बना देते हैं कि उनके सामने खुद को समाप्त करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। इस वजह से अक्सर शवों पर पिटाई के गहरे जख्म मिलते हैं।

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बॉलीवुड के प्रतिभाशाली अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की गुत्थी अनसुलझी है। अभी लगातार कयासों का दौर चल रहा है। आत्महत्या के कारणों का खुलासा होगा भी या नहीं ? इस महत्वपूर्ण सवाल को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पाकिस्तान में भी ऐसे सैकड़ों ‘सुशांत सिंह राजपूत’ हैं, जिनकी खुदकुशी के बाद आज तक यह राज ही रहा कि उनके ईहलीला समाप्त करने की वजह क्या थी ?

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सुशांत सिंह राजपूत की तरह ही उनकी मौत को गरीबी, बेरोजगारी, बेकारी, उपेक्षा, आर्थिक तंगी जैसी समस्या से अवसाद को बड़ा कारण बताया जा रहा है, पर पेड़ों पर लटकी लाशों पर पिटाई के गहरे जख्म मिलने से कुछ और ही कहानी बयां हो रही हैं। पाकिस्तान में आत्महत्या की सर्वाधिक घटनाएं इसके सिंध प्रांत के उन तीन जिलों में अधिक हो रही हैं, जहां हिंदुओं की जनसंख्या अन्य जिलों के मुकाबले ज्यादा है। खुदकुशी करने वालों भी अधिक हिंदू ही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2012 में पाकिस्तान की प्रति एक लाख आबादी पर औसतन 7.2 लोगों की खुदकुशी से संबंध एक आंकड़ा जारी किया था। 2016 में यह औसत घटकर 2.9 हो गया।
 

मगर उसके बाद से इसमें निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। पाकिस्तानी अखबार ‘द न्यूज’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में सिंध में 1300 लोगों ने आत्महत्या की। उनमें सर्वाधिक सिंध के तीन जिले उमरकोट, थारपारकर और मीरपुरखास के लोग थे। इस दौरान सिंध के कराची डिवीजन में 107, हैदराबाद में 299, शहीद बेनजीराबाद 181 और लरकाना में 45 मामले खुदकुशी के दर्ज किए गए। इस मामले पर अध्ययन करने वाले मोहम्मद ए मामुन कहते हैं कि कोरोना काल में 11 लोगों ने खुदकुशी की। पिछले एक सप्ताह में एक के बाद एक आत्महत्या की पांच घटनाएं सामने आई हैं।

35 वर्षीय रामचंद का शव उमरकोट में छप्पर की बल्लियों से टंगा मिला। पाकिस्तान के पत्रकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मुकेश मेघवाड़ ने आत्महत्या की तीन घटनाओं की जनकारी दी है। जिनमें दो मामलों में लड़के और लड़की साथ पेड़ से टंगे मिले थे। इसी तरह सिंध के संघर में चांदोमल का शव पेड़े से टंगा मिला था। उसके शरीर पर पिटाई के गहरे निशान थे। इससे पहले दो हिंदुओं के शव थट्टा में एक कच्चे मकान की चारदावीरी में टंगी मिली थी। टेकम दास नामक एक व्यक्ति भी उमरकोट में घर में लटका पाया गया। मीठी की धर्म कॉलोनी की 35 वर्षीय मजनुयल मेघवाड़ और 22 वर्षीय पूजा ने भी आत्महत्या की है।

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 ऐसे मामले में पाकिस्तानी पुलिस का रवैया हमेशा से टालू रहा है। बिना तफतीश के मान लेती है कि किसी कलह के कारण या अवसाद में आकर पीड़ित ने खुद को समाप्त कर लिया होगा। मगर सिंध के हिंदू वास्तव में किन परेशानियों के कारण या किसी के दबाव में आकर आत्महत्या कर रहे हैं ? यह जानने का उसकी ओर से कभी प्रयास नहीं किया गया। पाकिस्तान के चर्चित अंग्रेजी दैनिक ‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस देश में प्रति दिन 15 से 35 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसके बावजूद ऐसे मामलों को न तो संघीय और न ही राज्य सरकारें गंभीरता से लेती हैं। यदि अवसाद के कारण ही लोग खुद को समाप्त कर रहे हैं, तो उसे दूर करने का शासन—प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।। काउंसलिंग के लिए बनाई गई हेल्पलाइन ‘टॉक 2 मी’ भी काम नहीं करती।

हालांकि, पाकिस्तान का हिंदू समाज खुदकुशी की बढ़ती घटनाओं की वजह कुछ और ही मानता है। उनके अनुसार, मजहबी गुंडे उनकी संपत्तियों को हड़पने के लिए इतना दवाब बना देते हैं कि उनके सामने खुद को समाप्त करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। इस वजह से अक्सर शवों पर पिटाई के गहरे जख्म मिलते हैं। पत्रकार एवं एक्टिविस्ट मुकेश मेघवाड़ इन रहस्यमयी मौतों पर शायराना अंदाज में कटाक्ष हैं-
‘‘ मैं किसके हाथ पर अपना लहू तलाश करूं,
  तमाम शहर ने पहने हुए हैं दस्तानें।’’
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)