खजाना लुटा कर राहत मांग रहे केजरीवाल

    दिनांक 02-जून-2020   
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जनवरी में चुनाव के समय मुफ्त बिजली-पानी देने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए केजरीवाल ने कहा था कि दिल्‍ली के पास सरप्‍लस राजस्‍व है। अब उन्‍होंने केंद्र सरकार से यह कहते हुए 5,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांग रहे हैं कि दिल्‍ली सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं हैं ?
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 बात ज्‍यादा पुरानी नहीं है। इसी साल जनवरी की है। चुनाव में मुफ्त बिजली-पानी देने की घोषणा पर चौतरफा घिरने के बाद दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि सरकार के पास सरप्‍लस राजस्‍व है। लेकिन मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर तीसरी बार बैठे अभी चार महीने भी नहीं हुए कि दिल्‍ली का खजाना खाली हो गया और केंद्र सरकार 5,000 करोड़ रुपये मांगने की नौबत आ गई। दिल्‍ली सरकार के वित्‍त मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि लॉकडाउन के कारण कर संग्रह में करीब 85 प्रतिशत की कमी आई है। बीते दो माह में कर संग्रह प्रतिमाह 500 करोड़ रुपये रहा, जबकि अन्‍य स्रोतों से 1,735 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। दो माह के लिए सरकार को 700 करोड़ रुपये चाहिए, इसलिए वित्‍त मंत्री को पत्र लिखकर 5,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया है। सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए आर्थिक मदद जल्‍द से जल्‍द देने की मांग की है। उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली सरकार का न्‍यूनतम मासिक खर्च 3,500 करोड़ रुपये है, जिसमें वेतन और सरकारी खर्च शामिल हैं।

बता दें कि दिल्‍ली सरकार 1 जनवरी, 2014 से दिल्‍लीवासियों को प्रतिमाह 20,000 लीटर मुफ्त पानी दे रही है। इसके बाद अगस्त 2019 में पानी का बकाया बिल माफ करने के लिए भी एक योजना शुरू की जिससे 13 लाख परिवारों को फायदा हुआ। साथ ही, अगस्‍त 2019 से ही दिल्‍ली सरकार प्रति परिवार 200 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है, जबकि 201 से 401 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले परिवार को बिल पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी भी दे रही है।


भाजपा ने मांगा विज्ञापन का हिसाब

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केंद्र से 5,000 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मांगने पर दिल्‍ली भाजपा अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्‍होंने दिल्‍ली सरकार से विज्ञापन और कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में अस्‍पतालों पर किए जाने वाले खर्च का हिसाब मांगा है। उन्‍होंने ट्वीट किया, ‘दिल्‍ली में मुख्‍यमंत्री श्रीमान् अरविंद केजरीवाल जी से दो सवाल- 22 मार्च जनता कर्फ्यू से लेकर आज 29 मई तक आपने टीवी, प्रिंट और इंटरनेट पर विज्ञापन में कितने रुपए खर्च किए? अस्‍पतालों में नए बिस्‍तर, वेंटिलेटर पर कितने रुपये खर्च किए?’ उन्‍होंने यह ट्वीट केजरीवाल की आर्थिक मदद मांगने वाली ट्वीट के जवाब में किया, लेकिन 40 घंटे बीतने के बाद भी जब केजरीवाल की तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो उन्‍होंने दोबारा ट्वीट किया, जिसमें केंद्र की उपलब्धियों को गिनाते हुए आरोप लगाया कि दिल्‍ली सरकार केंद्र से मिले 768 करोड़ रुपये के राशन भी जरूरतमंदों को नहीं बांट पाई। दूसरे ट्वीट में उन्‍होंने लिखा, ‘केंद्र ने 690 करोड़ रुपये जनधन खाते में डाले, 836 करोड़ रुपये के मुफ्त सिलेंडर दिए, 243 करोड़ रुपये दिव्‍यांगों, विधवा महिलाओं और वरिष्‍ठ नागरिकों को दिए, लेकिन 768 करोड़ रुपये का राशन, जो आप बांट न पाए।’ साथ ही, उन्‍होंने केजरीवाल से पूछा कि दिल्‍ली सरकार क्‍या विज्ञापन बांटने के लिए केंद्र से पैसे मांग रही है?

 

कुमार विश्‍वास ने भी लताड़ा

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प्रख्‍यात कवि कुमार विश्‍वास ने भी विज्ञापन पर पानी की तरह पैसा बहाने को लेकर केजरीवाल को कठघरे में खड़ा किया है। उन्‍होंने ट्वीट किया, ‘लाखों करोड़ की चुनावी रेवडि़यां, करदाताओं के हजारों करोड़ अखबारों में चार-चार पेज के विज्ञापन और चैनलों पर हर 10 मिनट में थोबड़ा दिखाने पर खर्च करके, पूरी दिल्‍ली को मौत का कुआं बनाकर अब स्‍वराज शिरोमणि कह रहे हैं कि कोरोना से लड़ रहे डॉक्‍टरों को वेतन देने के लिए उनके पास पैसे नहीं है।’

 

तुष्‍टीकरण में व्‍यस्‍त केजरीवाल

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केजरीवाल के मन में दिल्‍ली की जनता के प्रति कोई संवेदना नहीं है। वह केवल मौकापरस्‍त और तुष्‍टीकरण की राजनीति करते हैं। दिल्‍ली में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल की पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए दिल्‍ली वक्‍फ बोर्ड के अंतर्गत आने वाली 185 मस्जिदों के 260 इमामों को 10,000 की जगह 18,000 रुपये तथा मुअज्जिन को 9,000 के बदले 16,000 रुपये वेतन देने की घोषणा की। साथ ही, पहली बार दिल्‍ली वक्‍फ बोर्ड के साथ मिलकर वैसी 1500 मस्जिदों के 3,000 इमामों और मुअज्जिन को भी क्रमश: 14,000 रुपये और 12,000 रुपये वेतन देने की घोषणा की, जो वक्‍फ बोर्ड के अंतर्गत नहीं आती हैं। मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए उन्‍होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन को समर्थन दिया। इसके बाद उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में हिंसा में उनकी पा‍र्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन की संलिप्‍तता उजागर हुई। यही नहीं, दिल्‍ली में 15 मार्च से जब किसी भी धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, पारिवारिक और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई, तब भी दिल्‍ली में सीएए के विरुद्ध धरना प्रदर्शन होने दिया। लॉकडाउन के बावजूद मुसलमान मस्जिद जाते रहे। अभी दिल्‍ली की स्थिति बेहद चिंताजनक है तो कमाई के लिए वह शॉपिंग मॉल भी खोलने पर जोर दे रहे हैं। बाजार तो पहले से ही खुले हुए हैं। केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि लोगों को अब कोरोना के साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए। इस तरह वह अपनी जिम्‍मेदारियों से पल्‍ला झाड़ने वाले देश के पहले मुख्‍यमंत्री हैं! दिलचस्‍प बात है कि दिल्‍ली में जब कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 18,000 पहुंचा, तब केजरीवाल लोगों से अपील कर रहे थे कि वे चिंता न करें, स्थिति नियंत्रण में है