गलत हाथों में खेलता नेपाल, सीमावर्ती इलाकों में एफएम के जरिए भारत विरोधी प्रचार

    दिनांक 22-जून-2020   
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उत्तराखंड से लगी नेपाल सीमा पर नेपाल की ओर से भारत विरोधी गतिविधियों में तेज़ी आयी है।चीन समर्थक नेपाली लॉबी ने अब एफएम रेडियो का सहारा लेकर भारत विरोधी प्रचार शुरू कर दिया है।
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उत्तराखंड से लगी नेपाल सीमा पर नेपाल की ओर से भारत विरोधी गतिविधियों में तेज़ी आयी है।चीन समर्थक नेपाली लॉबी ने अब एफएम रेडियो का सहारा लेकर भारत विरोधी प्रचार शुरू कर दिया है। नेपाली जनपद दार्चुला से आगे घटिबगड़ में सीमांत क्षेत्र में बन रही सड़क के निर्माण में नेपाली सैनिक वर्दी में चीनी मूल के लोग काम करते देखे गए हैं, जिसके बाद से भारत की तरफ से भी सुरक्षा एजेसियों ने चौकसी बरतनी शुरू कर दी है।

लीपूलेख काला पानी विवाद को नेपाल की संसद ने नए नक्शे को मंजूरी देते हए अपने राष्ट्रपति के आदेश के बाद सार्वजनिक कर दिया है, जिसके बाद से भारत के साथ लगे नेपाल के जिलों में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी समर्थकों ने भारत विरोधी अभियान को तेज किया है। नेपाली एफएम रडियो जो कि दार्चुला के चरबगड इलाके से सुदूर पहाड़ों और मैदानी इलाकों तक सुनाई देते है, इनके गीतों के बीच लिपुलेख कालापानी हाम्रे हो का प्रचार हो रहा है। इन प्रचार अभियानों में भारत के व्यापारियों को 'धोती' कह कर पुकारा जा रहा है, जो कि नेपालियों को लूटते आए हैं। ऐसी अभ्रद भाषा का प्रयोग इन दुष्प्रचारों में हो रहा है। एक नहीं तीन—तीन एफएम पर ऐसा प्रचार किसके शह पर हो रहा है ? गौरतलब है कि यह प्रचार भारत के कई इलाकों में भी सुने जाते हैं, क्योंकि एफएम की रेंज भारत के सीमांत गांवों—कस्बों में काफी अंदर तक है। नेपाल के इस दुष्प्रचार से भारतीय क्षेत्र के लोगों मे नाराजगी भी है और तरस भी। भारत के साथ लंबे समय से रोटी—बेटी के रिश्ते संजोकर रखने वाले भारतीय लोगों का मानना है कि नेपाल गलत हाथों में खेल रहा है। भारतीय क्षेत्र धारचूला के रँ समुदाय के अशोक नम्बियाल कहते है कि नेपाल सीमा में हमारे रिश्ते—नाते हैं। व्यापारिक सम्बन्ध हैं। लोगो के घरों में आना—जाना है, जिसे कुछ स्वार्थी लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।

लद्दाख में चीन—भारत विवाद के दौरान कुछ ऐसी घटनाए सामने आयी हैं, जिससे साफ तौर पर लग रहा है कि भारत के खिलाफ नेपाल की राजनीति चीन की वजह से मुखर हुई है। नेपाल में कठमांडू पोखरा भैरहवा एयर पोर्ट के पुनर्निर्माण में चीन पैसा लगा रहा है। चीन से काठमांडू तक रेल लाइन बिछाने से लेकर सड़कों तक के काम में चीन के ठेके हैं। नेपाल भारत पर अपनी निर्भरता कम कर चीन की तरफ झुक रहा है। नेपाल की यही नीति उसे भारत विरोधी बना रही है। नेपाल के दार्चुला जिले में भारत के लिपुलेख धारचूला मार्ग के समानांतर नेपाल ने सड़क योजना पर काम शुरू कर दिया है। सड़क का कटान इस वक्त भारत के बूंदी गांव के सामने  महाकाली नदी पर हो रहा है। इस इलाके में भी भारत के बूंदी गांव के लोगों की ज़मीन अभिलेखों में दर्ज है। इसके अलावा तिंकुर छंगरु गांव तक जाने वाली इस सड़क के घटिबगड इलाके में नेपाल सैनिक वर्दी में चीनी मूल के लोग दिखाई दे रहे हैं, जो कि सड़क बनाने में लगे हैं। यहां नेपाल सेना प्रमुख भी दौरा कर चुके हैं। नेपाल यहां हेलीकॉप्टर के जरिये समान उतारकर सीमा चेक पोस्ट बना चुका है।

नेपाल—भारत सीमा पर नोमेन्स लैंड पर उत्तराखंड, यूपी, बिहार पर नेपाली लोगों के कब्जे अचानक कैसे बढ़ गए? सीमा पिलर गायब कैसे हो गये ? यह सब कुछ प्रमाणित करता है कि नेपाल गलत हाथों में जा रहा है। वहां इस समय भारत विरोधी तंत्र ज्यादा सक्रिय है। नेपाल के माओवादी नेता रहे पुष्प दहल प्रचंड और अन्य नेता नेता, चीन के सत्ताधारी नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सब अचानक पिछले दो महीनों में हुआ है।

विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत के लीपूपास तक सड़क बना लेने से चीन बौखलाहट में है और उसने नेपाल को उकसाया है। जबकि सब जानते है कि सुगौली संधि के मुताबिक ये विवाद तभी सुलझा लिया गया था, जिसका उल्लेख ईस्ट इंडिया कंपनी के सर्वयर अठकिन्सन के गजेटियर में भी दर्ज है। भारत की आज़ादी के बाद से कभी भी नेपाल ने ये मुद्दा नहीं उठाया लेकिन जैसे ही सड़क बनी इस विषय को तूल दे दिया गया। साफ झलकता है कि नेपाल के रास्ते भारत को घेरने के लिए चीन की विदेश नीति काम कर रही है।

बहरहाल, नेपाल में ऐसा नहीं है कि चीन समर्थक ही लोग हैं। वहां भारत के साथ मजबूत रिश्तों की वकालत करने वाला एक बड़ा समुदाय है जो भारत के साथ खड़ा है। वे मानते हैं कि नेपाल के रिश्ते भारत के साथ ज्यादा नज़दीक हैं। लेकिन कुछ लोगों द्वारा हालात ऐसे बनाये जा रहे हैं कि भारत नेपाल का दुश्मन है। असल में यही चीन की कूटनीति है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं