चीन से तनाव के बीच राजनाथ का रूस दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    दिनांक 22-जून-2020   
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आज सुबह रूस रवाना हुए रक्षामंत्री राजनाथ का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर ऐसे में जब गलवान घाटी में भरत-चीन के बीच हिंसक टकराव को एक हफ्ता ही हुआ है, जिसमें भारत ने 20 सैनिकों को खोया है और चीन के भी कथित 100 से अधिक सैनिक मारे गए हैं। अंतरराष्ट्रीय संधियों और सैन्य कायदों को हमेशा से अनदेखा करते आ रहे चीन ने बिना किसी उकसावे के पिछले करीब डेढ़ माह से लद्दाख से सटी सीमा पर तनाव बनाया हुआ है जिसके जवाब में भारत ने भी अपनी सुरक्षा को मजबूत करते हुए मौके पर सैनिकों को उचित कार्रवाई करने की छूट दी है। हथियारों और गोला—बारूद के लिए आपात फंड भी जारी किया है। रूस की यात्रा पर रवाना होने से पहले रक्षा मंत्री ने तीनों सेना प्रमुखों और सीडीएस बिपिन रावत से खास मुलाकात में लद्दाख के हालात की समीक्षा की।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वक्त से चीन और रूस कई बिन्दुओं पर साथ खड़े दिखे हैं। दक्षिण चीन सागर में उभरे तनाव के दौरान भी रूस चीन के पक्ष में खड़ा दिखा था। बहरहाल, हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि भारत के रूस से संबंध पुराने और मजबूत है। सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों को दोनों देशों के नेता खास अहमियत देते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले दिनों रूस यात्रा में राष्ट्पति पुतिन के साथ उनकी गर्मजोशी भरी मुलाकात ने रिश्तों को नई धार दी थी। साथ ही अंतरराष्ट्ीय मंचों पर भी रूस ने भारत का साथ दिया है। इस सबके प्रकाश में रक्षामंत्री को रूस की 75वीं विक्ट्री परेड में खास मेहमान के तौर पर बुलाने और इस मौके पर वहां के प्रमुख नेताओं से वार्ता को विशेषज्ञ खास नजर से देख रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच किसी भी भारतीय नेता की यह पहली विदेश यात्रा है।
बताया गया है कि इस दौरे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वहां रक्षा को लेकर रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा करेंगे। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू से अपनी मुलाकात में राजनाथ जहां चीन के साथ मौजूदा तनाव की चर्चा करेंगी बल्कि लंबित रक्षा सौदों पर भी बात होनी तय है। भारत एस-400 'ट्रायम्फ एंटी मिसाइल सिस्टम'को जल्दी देने की बात कर सकता है। कोरोना की वजह से इस प्रणाली की आपूर्ति दिसंबर 2021 तक हो पाएगी। उल्लेखनीय है कि राजनाथ सिंह वहां इस अवसर पर मौजूद चीनी प्रतिनिधिमंडल से कोई बात नहीं करेंगे। दौरे पर निकलने से पहले किए ट्वीट में रक्षा मंत्री ने लिखा-''रूस की यात्रा के दौरान भारत-रूस के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर बातचीत होगी। मैं मॉस्को में 75वें विक्ट्री परेड डे में भी शामिल होऊंगा।''
मास्को में 75वें विक्ट्री परेड डे का आयोजन पहले 9 मई को होना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। अब दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत संघ की जीत की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर यह आयोजन 24 जून को होने जा रहा है। रूस की विक्ट्री डे परेड में इस बार भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना का दस्ता भी हिस्सा लेगा। उल्लेखनीय है कि दूसरे विश्वयुद्ध में सिख लाइट इंफेंट्री ने भाग लिया था और कई वीरता पदक भी पाए थे।