आस्था की विजय: सर्वोच्च न्यायालय ने सशर्त दी जगन्नाथ यात्रा की अनुमति

    दिनांक 22-जून-2020
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सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ प्रतिबंधों के साथ ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा आयोजित करने की अनुमति दे दी। न्यायालय ने कहा कि पुरी रथ यात्रा स्वास्थ्य से समझौता किए बिना मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ आयोजित की जाएगी

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सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय खंडपीठ में पुरी रथयात्रा को लेकर सुनवाई की। तीन सदस्यीय खंडपीठ में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल थे। केन्द्र ने रथयात्रा की इजाजत मांगते हुए कहा था कि सदियों से चली आ रही परंपरा नहीं रुकनी चाहिए। नियमों के साथ सीमित ढंग से जो पुजारी भगवान जगन्नाथ की सेवा मे लगे हैं और जिनका कोरोना टेस्ट निगेटिव है उन्हें रथयात्रा की इजाजत दी जाए। ये लोगों की आस्था का सवाल है।
जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होती है। यह मुख्य मंदिर से शुरू होकर 2.5 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर में जाती है। यह भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। जहां भगवान 7 दिन तक आराम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल दशमी को रथयात्रा फिर जगन्नाथ के मुख्य मंदिर पहुंचती है। यह बहुड़ा यात्रा कहलाती है। स्कंदपुराण में लिखा है कि आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है और भक्तों को शिवलोक की प्राप्ति होती है।
रथयात्रा से 15 दिन पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान को स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार होते हैं। इस वजह से उन्हें 15 दिन तक एकांतवास में रखा जाता है। इस दौरान कुछ पुजारी ही उनके पास होते हैं। उन्हें औषधियों और हल्के आहार का ही भोग लगाया जाता है। रथयात्रा से एक दिन पहले ही भगवान का एकांतवास खत्म होता है।
पुरी के जिलाधीश बलवंत सिंह ने कहा है कि रथयात्रा को लेकर श्रीक्षेत्र धाम पूरी तरह से तैयार है। सुप्रीम कोर्ट को जो भी निर्देश का अनुपालन किया जाएगा। श्रीजगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक डा. किशन कुमार की अध्यक्षता में स्थानीय नीलाचल भक्त निवास में रथयात्रा को लेकर बैठक हुई। इस बैठक में जिलाधीश बलवंत सिंह, पुरी एसपी उमाशंकर दास के साथ शहर के तमाम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
एएसआई ने की तीनों रथों की जांच

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एएसआई ने तीनों रथों की जांच की है। एएसआई कोरकमेटी सदस्य एससी पाल ने बड़दांड रथखला में पहुंचकर तीनों रथ महाप्रभु श्रीजगन्नाथ जी के नंदी घोष, प्रभु बलभद्र जी के तालध्वज रथ तथा देवी सुभद्रा जी के देव दलन की जांच की है।
परंपरा तोड़ना ठीक नहीं: पुरी पीठ के शंकराचार्य
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि इस मामले में दोबारा विचार करें। उन्होंने पुरी मठ से जारी बयान में कहा- ‘किसी की यह भावना हो सकती है कि अगर इस संकट में रथयात्रा की परमिशन दी जाए तो भगवान जगन्नाथ कभी माफ नहीं करेंगे, लेकिन सदियों पुरानी परंपरा तोड़ी तो क्या भगवान माफ कर देंगे।’
वहीं देश के गृहमंत्री अमित शाह ने फोन के जरिए पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव के साथ चर्चा की है। यह जानकारी राज्य भाजपा अध्यक्ष समीर महंती ने ट्वीट कर दी है। समीर महंती ने कहा है कि महाप्रभु के अनन्य भक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर गृहमंत्री अमित शाह ने आज गजपति महाराज के साथ महाप्रभु की नीति एवं रथयात्रा को लेकर फोन पर चर्चा की है।