पाकिस्तानः पानी के लिए पिता-पुत्री को मजहबी गुंडों ने किया लहूलुहान, नाबालिग बच्ची अस्पताल में बेहोश

    दिनांक 23-जून-2020   
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गत दिनों सिंध के थारपारकर में एक हिंदू और उसकी नाबालिग बच्ची की पानी लेने के दौरान जिहादियों ने इतनी बुरी तरह पिटाई कर दी कि दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पिटाई से घायल बासंत मेघवाड़ की नाबालिग पुत्री कई घंटे तक बेहोश रही।

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पाकिस्तान के सिंध में गर्मी के साथ जल संकट बढ़ते ही हिंदुओं की मुसीबतों में बढ़ोतरी हो जाती है। वे साल भर अपहरण और कन्वर्जन से परेशान रहते हैं। गर्मी आने पर सार्वजनिक स्थलों से पानी लेने से रोकने के लिए उन्हें मारा-पीटा जाता है। गत दिनों सिंध के थारपारकर में एक हिंदू और उसकी नाबालिग बच्ची की पानी लेने के दौरान जिहादियों ने इतनी बुरी तरह पिटाई कर दी कि दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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पिटाई से घायल बासंत मेघवाड़ की नाबालिग पुत्री कई घटे तक बेहोश रही। दोनों पिता पुत्री थारपारकर के एक सार्वजनिक वाटर डिस्पेंसर से ठंडा पानी लेने गए थे। यह बात वहां मौजूद मजहबी गुंडों को नागंवार गुजरी और उन्होंने पिता-पुत्री को पानी लेने से रोकने के साथ उनकी जमकर पिटाई कर दी। इस दौरान बीच बचाव को कोई आगे नहीं आया। सबका मौन समर्थन था। इससे पहले स्योमरा में एक हैंडपंप से पानी लेने गई हिंदू महिला की पिटाई कर दी गई थी। लठ से पिटाई के कारण उसका सिर फट गया था जिससे वह पूरी तरह लहू-लुहान हो गई थी।

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दरअसल, प्रत्येक वर्ष गर्मी और जल संकट बढ़ने पर पानी लेने से रोकने के लिए हिंदुओं को मारा पिटा जाता है। विशेषकर ऐसी घटनाएं सिंध प्रांत के थार इलाके में अधिक होती हैं। इस रेगिस्तानी क्षेत्र में आम दिनों में भी घोर जलसंकट रहता है। इलाके में पानी का न कोई ठीकठाक स्रोत है और न ही प्रशासन की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था है कि बारह महीने लोगों को पानी मिलता रहे। थार के लोग बारिश के पानी से गुजर-बसर करते हैं।

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उसे कुंओं और गड्ढों में एकत्र कर रखते हैं, जिससे उनका काम चलता है। मगर गर्मी में अधिकांश कुओं का पानी सूख जाता है। इसलिए थार की महिलाओं को दस लीटर पानी के लिए भी दस-दस किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। जिनके पास उंट या गधे हैं, वे इसके माध्यम से पानी ढोते हैं। गर्मियों में पशु-पक्षियों की भी आफत आ जाती है। पिछले सप्ताह थार के लोगों ने अपने प्रयास से कुंआं खोदने की कोशिश की थी, पर मिट्टी धंसने से उसमें दबकर पांच लोगों की मौत हो गई।
 
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अभी थार क्षेत्र में नहर का पानी लाने को लेकर सोशल मीडिया पर #TharNeedsWaterCanalअभियान चल रहा है। इस अभियान में शामिल ससुअल रसूल कहते हैं कि जब सिंध के एक हिस्से में सैकड़ों मीटर खुदाई कर कोयला निकाला जा सकता है तो थार तक पानी पहुंचाने के लिए ऐसा ही कोई ठोस प्रयास क्यों नहीं किया जाता ?

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उल्लेखनीय है कि सिंध के रेगिस्तानी इलाके में अधिकतर हिंदू भील जनजाति के हैं। आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर भीलों को दबंग मुसलमान पानी लेने से रोकते हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में किस हालत में हिन्दू जीवन जीने को मजबूर हैं।
 
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