चीनी सामान के साथ ‘जयचंदों’ का भी बहिष्कार करें

    दिनांक 23-जून-2020
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जब पूरा देश चीन के विरुद्ध खड़ा है, चीनी सामान का बहिष्कार चल रहा है, तब एनडीटीवी जैसे मीडिया घराने और कांग्रेस, कम्युनिस्ट चीन की जुबान बोल रहे हैं। अभी जितनी जरूरत चीनी उत्पादों के बहिष्कार की है, उससे अधिक देश के गद्दारों का भी बहिष्कार करने की है।

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चीन के साथ जारी डोकलाम विवाद के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल
गांधी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। 

चीन ने हमारे साथ बहुत बड़ा घोखा किया है। यह उसकी फितरत में हैं, पर साथ ही भारत और चीन में एक बहुत बड़ा अंतर है। भारत जयचंद जैसे गद्दारों से भरा पड़ा है। महाराणा प्रताप की हार इसलिए नहीं हुई कि अकबर ताकतवर था, बल्कि उस समय भी देश के गद्दारों ने पीठ में छुरा घोंपा था। आज भी जब हम चीन से दोतरफा लड़ रहे हैं, तब भी कुछ गद्दार चीन की बोली बोल रहे हैं। डोकलाम याद होगा, उस समय कांग्रेस के राहुल गांधी चीनी दूतावास में चीन के अधिकारियों के साथ चर्चा में व्यस्त थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा होने की बजाए वह चीन के साथ खड़े नजर आए। आज भी वह हमारी सेना का मनोबल बढ़ाने की जगह चीन को अधिक ताकतवर बताकर सेना और देश का मनोबल गिरा रहे हैं।

जब पूरा देश चीन के विरुद्ध खड़ा है, चीनी सामान का बहिष्कार चल रहा है, तब एनडीटीवी जैसे मीडिया घराने और कांग्रेस, कम्युनिस्ट चीन की जुबान बोल रहे हैं। अभी जितनी जरूरत चीनी उत्पादों के बहिष्कार की है, उससे अधिक देश के गद्दारों का भी बहिष्कार करने की है। राहुल को वास्तव में कूटनीति, युध्द रणनीति का ज्ञान नहीं है या वह जानबूझकर राजनीतिक ओछेपन से देश को दुनिया के सामने शमिंर्दा करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों ही स्थितियों में उनकी मूर्खतापूर्ण हरकतों से देश को नुकसान हो रहा है। पता नहीं चल रहा कि राहुल प्रधानमंत्री से सीमा की कौन-सी गोपनीय बात जानकर चीन को सतर्क करना चाह रहे हैं। शायद इसी कारण कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह लद्दाख सीमा पर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए राहुल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। भेजना ही है तो कांग्रेस सेवादल के सदस्यों के हाथों में राइफल देकर चीन से लड़ने के लिए भेजो।

कांग्रेस कभी पिद्दी नेपाल से डराने की कोशिश करती है तो पाकिस्तान को मजबूत बताती है, अब भारतीयों में खौफ पैदा कर चीन का सहयोग कर रही है। जेएनयू के वामपंथी छात्रों के साथ कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध शाहीनबाग में धरने का आयोजन ही इसलिए किया था कि उसके वोटबैंक बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं को देश से निकाला न जा सके। कांग्रेस ने टुकड़-टुकड़े गैंग के जरिए यह भ्रम फैलाने की कोशिश की कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से हिंदू भारत आ गए तो हमारा रोजगार खा जाएंगे। हिंदू विरोधियों को यह मालूम नहीं है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या पहले ही हमारा रोजगार खा चुके हैं, हमारा हक मार चुके हैं। इन्हें घुसपैठियों से हमदर्दी है, लेकिन मुस्लिम देशों के पीड़ित हिंदुओं से नहीं। कांग्रेस, वामपंथी और ममता बनर्जी, सबकी सोच एक ही है- प्रताड़ित हिंदुओं को भारत में संरक्षण नहीं दिया जाए।

कांग्रेस कहती है कि मोदीजी ने सेना को मरने के लिए भेज दिया। कांग्रेस की मूर्खता पर हंसूं या रोऊं, समझ में नहीं आता। हमारी बहादुर सेना ने चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया है। हमारा एक-एक सैनिक दुश्मन को मारते-मारते बलिदान हुआ। भारत के मुकाबले दोगुने से भी अधिक चीन के सैनिक मारे गए हैं या हताहत हुए हैं। लेकिन इस पर गर्व करने की बजाए कांग्रेस विधवा विलाप में व्यस्त है। उसे हमारे सैनिकों के बलिदान पर गर्व की बजाए चीनी सैनिकों के मारे जाने का अफसोस है। तभी तो एनडीटीवी बलिदान को ‘मारे गए’ लिखता है। जिन बलिदानियों पर देश को नाज है, कांग्रेसी-वामपंथी उसे दुर्भाग्यपूर्ण बता रहै हैं। क्या हमारे वीर जवान मौत के डर से पीछे हट जाते? सेना की वर्दी पहनने के साथ ही देश के लिए जीना-मरना सैनिकों का लक्ष्य बन जाता है। समय आ चुका है, देश के इन जयचंदों-गद्दारों को अच्छी तरह से पहचानकर चीनी सामान के साथ इनका भी बहिष्कार किया जाए। 
  - प्रवीण मैशेरी, रायपुर