अंदर से खोखला है चीन

    दिनांक 23-जून-2020
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 डॉ. गुलरेज शेख

बाहर से चीन भले ही चीन मजबूत और ताकतवर दिखता हो, लेकिन हकीकत में वह अंदर से खोखला है। चीन ने अपने यहां ऐसा तंत्र विकसित कर लिया है, जिसके चलते उसकी आंतरिक कमजोरियां या अन्य सूचनाएं बाहर नहीं आ पातीं। अगर उसकी कमजोरी पर एक जोरदार प्रहार हो जाए तो चीन बिखर जाएगा
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चीन की दीवार से सटे इनर मंगोलिया, निंगजिया सहित अन्य इलाके पिछड़े हुए हैं। यही चीन की कमजोरी भी हैं।

दूर से प्रतीत होता है कि चीन एक विशालकाय आग उगलता ड्रैगन है, पर यदि ध्यान से देखा जाए तो इस ड्रैगन का पेट कच्चा है और सही वार इसे भड़भड़ा कर गिरा देगा। जो मिथ्या आज लोग चीन के विषय में पाल कर रखते हैं, वैसी ही मिथ्या सोवियत संघ के विषय में भी पाला करते थे। चूंकि दुर्भेद्य आवरण के रहते न तो सोवियत संघ से सूचनाएं बाहर आ पाती थीं और न ही चीन से आ पाती हैं। फिर जो होता है, वह एकाएक ही दर्शन देता है।

चीन मूल्यत: हेन चीनी नस्ल के लोगों का देश है, जिनकी जनसंख्या चीन की कुल जनसंख्या की 90 प्रतिशत है, पर क्षेत्रफल की दृष्टि से हेन चीनी भूमि वर्तमान चीन के क्षेत्रफल के लगभग एक तिहाई ही है। इसीलिए हेन चीनी तथा गैर-हेन चीनी क्षेत्रों के विकास और संपन्नता में जमीन-आसमान का अंतर है। चीन की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन बेल्ट-वन रोड’ के पीछे इन क्षेत्रों को मुख्य भूमि चीन से जोड़ना मूल लक्ष्य है। चीन के प्रगतिशील, विशालकाय इमारतों तथा बड़े-बड़े पुलों से भरे शहरों के जो चित्र हम देखते हैं, वे मूल्यत: मुख्य भूमि चीन (अर्थात हेन चीनी प्रांतों के हैं)। इसके विपरीत तिब्बत, शिंगजियांग, इनर मंगोलिया, तिब्बत, पूर्वोत्तर चीन आज भी दरिद्रता और पिछड़ेपन की कहानी सुनाते हैं।

यदि चीन के विकसित हेन चीनी प्रांतों की बात करें तो उनकी संख्या 18 है। वे हैं-अनहुई, चिहिल्ली, फुजियान, गन्सू, ग्वॉगडांग, गुइज्हू, हेबी, हिनान, हूबी, हुनान, जियांगसू, जियांगजी, शानक्षी, शानशी, सांगडांग, शिचुआन, युनान और जीजीआंग। बाकी प्रांत या स्वायत्त क्षेत्र जैसे हीलिंगजियांग, जीलिन, लिआओनिंग, इनर मंगोलिया, शिंगजियांग, निंगजिया मूल्यत: चीन द्वारा शक्ति के बल पर मिलाए हुए तथा पिछड़े क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र ही ड्रैगन का कच्चा पेट हैं। अब चीन के इस कच्चे का परीक्षण करते हैं-

इनर मंगोलिया
इनर मंगोलिया वास्तव में मंगोलिया ही है। चीनी शासकों ने अपने राज्यों को मंगोल आक्रमणों से बचाने के लिए चीन की विशाल दीवार का निर्माण कराया था। अत: चीन की दीवार के उत्तर में जो कुछ भी है, वह मंगोलिया है। 1911 में जब चीन के क्विंग राजवंश का पतन हुआ, तब मंगोलिया ने स्वयं को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया तथा बोग्ड खान (चंगेज खान का वंशज) के नेतृत्व में एक ‘खानाऐट’ का निर्माण किया। आंतरिक कलह के चलते मंगोलों का एक धड़ा बीजिंग से सहायता मांगने गया (उस समय बीजिंग चीनी सत्ता का  केंद्र नहीं था)। कुछ समय पश्चात चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने मंगोलिया के दक्षिणी क्षेत्र तथा चीन की दीवार के ऊपर के क्षेत्र पर कब्जा जमाकर उसे चीनी प्रांत बना दिया। इसका नाम इनर मंगोलिया रखा गया था तथा शहरों से मंगोलों को खदेड़ कर हेन चीनियों को बसाया गया।

गुवांग्जी
गुवांग्जी दक्षिण चीन में स्थित है तथा वियतनाम से लगा हुआ है। क्विंग राजवंश ने 1726 तक इसे स्वतंत्र राज्य माना। 1885 तक यह क्षेत्र विद्र्रोह का गढ़ रहा। क्विंग राजवंश के पतन के बाद 1911 में गुवांग्जी ने भी स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया। 1929 में डेंग जियाओपिंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने यहां दंगे कराए और फिर गुवांग्जी पर कब्जा कर लिया। 1920 के पूरे दशक तक यह क्षेत्र गृहयुद्ध का बड़ा केंद्र रहा। आज भी चीन इसे स्वायत्त राज्य मानता है।

शिंगजियांग
उइगर मुसलमानों के नरसंहार के चलते यह क्षेत्र अक्सर समाचारों में रहता है और वर्तमान में अमेरिका भी इसको लेकर चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। उइगर मुसलमान चीनी नहीं हैं। वे वास्तव में तुर्क-मंगोल नस्ल के लोग हैं तथा इनका संबंध इंडो-ईरानी संस्कृति से है। यही कारण था कि मुगलकालीन भारत का संपर्क इस क्षेत्र से इतना व्यापक था, उतना चीन का कभी हो ही नहीं पाया। ये लोग अपने देश को पूर्वी तुर्किस्तान कहते हैं। मध्यकालीन अंग्रेजी साहित्य में इस क्षेत्र को चीनी तुर्किस्तान कहा जाता था। इसे कभी भी चीन नहीं कहा गया। क्विंग राजवंश ने इसे अपने अधीन किया और वही सब किया जो आज वहां कम्युनिस्ट कर रहे हैं। शिंगजियांग के पहले इनर मंगोलिया में भी चीनियों ने यही कृत्य किए हैं।

निंगजिया
यह चीन के उत्तर पश्चिम तथा चीन की दीवार से लगा हुआ क्षेत्र है। यह प्रांत हुई लोगों की भूमि है। हुई लोग चीन के द्वारा मान्यता प्राप्त 56 अल्पसंख्यक समुदायों में से एक हैं। यह क्षेत्र कभी भी चीन का अंग नहीं था। चीनी राजवंशों द्वारा इस क्षेत्र का उपयोग सेनाओं को ठहराने के लिए किया जाता था, ताकि वे अपने राज्यों को मंगोलों के आक्रमण से बचा सकें। इस क्षेत्र पर कब्जा करने के बाद चीन ने 1954 में इसे अपने चीनी प्रांत गनशु में मिलाने की कोशिश की, पर इसमें वह असफल हुआ। इसके बाद 1958 में चीन ने इसे एक अलग स्वायत्त राज्य बनाया।

तिब्बत
चीनी विस्तारवाद का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है तिब्बत। तिब्बत पर करने के उपरांत चीन ने इसे दो भागों में बांट दिया। जिगांग (यह लद्दाख से लगा हुआ है। लासा शहर भी इसी में आता है) तथा कुइन्हाई (हिमालय के दूसरी ओर तथा मूल चीन से निकट का क्षेत्र)। यदि तिब्बत की भौगोलिक स्थिति को देखा जाए तो नैसर्गिक रूप से तिब्बत का संपर्क लद्दाख वाले क्षेत्र से है, न कि मुख्यभूमि चीन वाले क्षेत्र से। यही कारण रहा कि इस नैसर्गिक भौगोलिक संपर्क के कारण बौद्ध धर्म भारत से तिब्बत गया। तिब्बत की निर्वासित सरकार अपने नक्शे में समूचे तिब्बत को अपना देश दशार्ती है तथा ल्हासा को इसकी राजधानी। यदि निकट इतिहास में भी देखें, तो जम्मू-कश्मीर के महाराजा का तिब्बत के कई क्षेत्रों पर दावा रहा है।

भूतपूर्व मंचूरिया
भूतपूर्व मंचूरिया, कोरियाई पेनिनसुला के उत्तर में है। यह भी चीनी नस्ल के लोगों की भूमि नहीं है। ऐतिहासिक रूप से हेन चीनियों का यहां के कुछ क्षेत्रों से निकलना भी मुश्किल था। चीन ने इसे तीन प्रांतों में बांट रखा है-हीलिंगजियांग (मंगोल-डोंगरू लोगों का राज्य), कीरीन (गैर-हेन लोग) और लियेनिंग (कोरियाई मूल के लोगों का राज्य)। भूतपूर्व मंचूरिया वास्तव में जापान का उपनिवेश था। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय यह क्षेत्र जापानियों तथा सोवियत रूस के लोगों की रणभूमि बन चुका था। जापानियों ने यहां बहुत अत्याचार किए थे। जापानियों से जीतने के उपरांत स्टालिन ने इस क्षेत्र को या तो उपहार स्वरूप चीनी कम्युनिस्टों को दे दिया था या इसे जीतने में उनकी सहायता की थी।

हांगकांग
यद्यपि हांगकांग की 90 जनसंख्या हान चीनियों की है, परंतु ब्रिटिश शासन ने उन्हें लोकतंत्र का स्वाद चखा दिया है। इसे बचाने के लिए आज हांगकांग, चीन की सरकार से लोहा ले रहा है। स्मरण रहे, अधिकारवादी सत्ताशासित देशों के पास लोकतांत्रिक देशों की भांति एक अलोकप्रिय सत्ता को वोट की चोट से मारने की विलासिता नहीं रहती। यहां परिवर्तन सम्पूर्ण व्यवस्था के भरभराकर गिरने से ही होता है और यही चीन में होना है। जो चीन स्वयं को एक बड़ी शक्ति दिखाता है, वास्तव में अंदर से खोखला है। एक बार जोर से प्रहार हो गया तो ये जितने भी प्रांत हैं, जिन पर चीन ने कब्जा कर रखा है, उसी तरह बाहर निकलेंगे जैसे यूगोस्लाविया या सोवियत संघ से निकले थे।