जगन्नाथ पुरी: भीड़ नहीं, श्रद्धा उमड़ी

    दिनांक 23-जून-2020
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डॉ समन्वय नंद
कोविड-19 को लेकर विश्व भर में उपजी स्थिति को ध्यान में रख कर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश से यह रथ यात्रा आयोजित की जा रही है। इसमें सीमित संख्या में सेवायत व इसके लिए सुरक्षाकर्मी ही मौजूद हैं।
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 भगवान जगन्नाथ अलग तरह के भगवान हैं। वह अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए अपने रत्न सिंहासन छोड़ देते हैं। उन्हें अपने भक्तों की चिंता अधिक है। इसलिए वह हर साल श्रीमंदिर से बाहर निकल कर बडदांड आते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। इस बार भी भगवान जगन्नाथ रथ पर आरुढ़ हो कर मौसी मां के यहां जा रहे हैं लेकिन बडदांड इस बार भक्तशून्य हैं। एक भी भक्त हरि बोल’ व जय जगन्नाथ’, जगन्नाथ स्वामी- नयनपथगामी भवतु में’ बोलने के लिए बडदांड ( ग्रांड रोड) में नहीं है। करोड़ों की संख्या में लोग टेलीविजन पर महाप्रभु के इस अलौकिक यात्रा का दर्शन कर रहे हैं। करोड़ों की संख्या में भक्तों का इस बात को लेकर आनंद है कि भले ही उन्हें महाप्रभु के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो रहे हैं लेकिन टेलीविजन के जरिये जरूर दर्शन हो रहे हैं और महाप्रभु की रथयात्रा हो रही है। वह रथ पर आरुढ़ हो रहे हैं। उनकी सैंकड़ों साल की परंपरा भंग नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के रथ यात्रा पर रोक लगाने संबंधी निर्णय के बाद उन्हें एक वक्त ऐसा लगा था कि महाप्रभु की परंपरा भंग हो जाएगी। लेकिन अब जब रथ यात्रा निकल रही है तो यह श्रद्धालुओं के लिए बड़ा प्रसन्नता का विषय है।

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इतिहास में पहली बार बिना श्रद्धालुओं के भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा हुई। कोविड-19 को लेकर विश्व भर में उपजी स्थिति को ध्यान में रख कर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश से यह रथ यात्रा आयोजित की जा रही है। इसमें सीमित संख्या में सेवायत व इसके लिए सुरक्षाकर्मी ही मौजूद हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आज निर्धारित समय से रथयात्रा की रीति नीति शुरु हुई। सुबह से महाप्रभु के मंगल आलरी, मईलम, तडपलागी व अवकाश नीति शुरु हुई। इनके विश्राम होने के बाद पहंडी बिजे की नीति शुरु हुई। तीनों भगवान धाडी पहंडी के जरिये अपने अपने रथों तक आये। सबसे पहले चक्र राज सुदर्शन व देवी सुभद्रा को पहंडी कर उनके रथ दर्पदलन में आरुढ़ करवाया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र धाडी पहंडी के जरिये अपने रथ तालध्वज में आरुढ़ हुए। सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ पहंडी के जरिये उनके रथ नंदीघोष में आरुढ़ हुए।

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भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के रथारुढ़ होने के बाद पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने तीनों रथों पर जाकर भगवान के दर्शन किये। इस दौरान उनके शिष्यों ने भी दर्शन किए।

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इसके बाद की रीति नीति का अनुपालन होने के पश्चात पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव जो भगवान जगन्नाथ के आद्य सेवक माने जाते हैं, वह राजनअर ( राजप्रासाद) से यहां पहुंचे तथा तीनों रथों में छेरा पहँरा की नीति संपन्न की। इसके बाद रथों की खिंचने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज खिंचने की प्रक्रिया शुरू हुई और ये रथ मौसी माँ मंदिर को अग्रसर है। इसके बाद देवी सुभद्रा की दर्पदलन व भगवान जगन्नाथ का नंदिघोष रथ को खिंचा जाएगा।

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उधर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रशासन ने इस रथयात्रा को भक्त शून्य करने के लिए पुरी जिले को सोमवार रात से शाट डाउन ( कर्फ्यु जैसी) घोषणा की थी, जो बुधबार दोपहर 12 बजे तक रहेगी। पुरी पहुंचने के सभी मार्गों को सील कर दिया गया है। इसके लिए काफी संख्या में फोर्स तैनात की गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पूर्ण रूप से अनुपालन किया जा रहा है और एक अलग तरह का अनुशासन दिख रहा है। पुरी शहर के लोग भी बडदांड में भगवान के दर्शन के लिए नहीं आ रहे हैं।