आम खाने से क्यों डर रहे पाकिस्तानी !

    दिनांक 23-जून-2020   
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पाकिस्तान के लोग आम खाने से डर रहे हैं। उन्हें लगता है कि आम खरीदने फल मंडी गए तो कोरोना दबोच लेगा। इस भय के कारण पाकिस्तान के अधिकांश फल मंडियों से ग्राहक गायब हैं।

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पाकिस्तान के लोग आम खाने से डर रहे हैं। उन्हें लगता है कि आम खरीदने फल मंडी गए तो कोरोना दबोच लेगा। इस भय के कारण पाकिस्तान के अधिकांश फल मंडियों से ग्राहक गायब हैं। परिणामस्वरूप आम उत्पादन में विश्व में छठे नंबर पर रहने वाले इस देश के व्यापारियों एवं उत्पादकों के सामने आम कौड़ियों के भाव बेचने या सड़कों पर फेंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। पाकिस्तान में प्रत्येक वर्ष करीब 17 लाख टन आम का उत्पादन होता है। अधिकतर यह इस्लामाबाद, सिंध और पंजाब में उपजाए जाते हैं। इस बार कोरोना की आफत के चलते मंडियों में आम थोड़ा देर से आया है।

रमजान में लॉकडाउन हटने से पहले देश की फल मंडियों को मात्र एक बार सेनेटाइज किया गया था। उसके बाद से अब तक एक बार भी वहां न तो किसी तरह की दवा का छिड़काव हुआ है और न ही महामारी से बचाव के अन्य उपाए किए गए हैं। इसके चलते फल मंडियों में ग्राहकों ने आना लगभग बंद कर दिया है। साथ ही आम का निर्यात भी बंद है।
आम व्यापारी वहीद कहते हैं कि उन्हें सरकार की ओर से किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिल रही है, जिसका दुष्प्रभाव उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। अभी पाकिस्तान में आम 50 से 120 रूपये किलो है। बावजूद इसके कोई लेने मंडियों में नहीं आ रहा है। अभी कोरोनो से बचाव की खातिर अधिकांश पाकिस्तानी पैकेटबंद फल ही खरीद कर खा रहे हैं। फलों के नियमित ग्राहक फैसल मजीद कहते हैं कि कोरोना काल में फल बाजारों से खरीदना खतरे से खाली नहीं, इसलिए वह भी डिब्बाबंद फल खरीदने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
 
इस्लामाबाद फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन की चेयरपर्सन आगा साईराज के अनुसार, उनके पास ऑनलाइन आम बेचने और पैकेजिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, न ही इसका कोई अनुभव। यदि आमों की बिक्री ऑनलाइन शुरू की भी जाए तो डिलीवरी ब्वाय और कूरियर वाले 10 किलो वजन की सामग्री की डिलवरी के बदले 200 से 300 सौ रूपये चार्ज करते हैं। ऐसे में आमों की आनलाइन बिक्री घाटे का सौदा साबित होगी। यदि डिलीवरी में देरी हुई तो आम खराब हो सकते हैं, जिसे लेना ग्राहक कतई पसंद नहीं करेगा।
 
इस्लामाबाद के फल व्यापारी जुनैद शेख के अनुसार, अकेले देश की राजधानी में सीजन में प्रत्येक दिन आमों की लाखों रुपये की बिक्री होती है, पर इस बार व्यापार पूरी तरह ठप है। ग्राहक सस्ती कीमत पर भी आम खरीदने फल मंडियों का रुख नहीं कर रहे हैं। चूंकि आम नाजुक होता है। उसे अधिक दिनों तक सहेज कर नहीं रखा जा सकता और न ही पाकिस्तान में इसे सहेजकर रखने की कोई व्यवस्था है, ऐसे में फसल की बर्बादी की नौबत आ गई है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फिलहाल आधी से भी कम कीमत पर आम बेचने की रणनीति बनी है। इसके बाद भी मंडियों में ग्राहकों का टोटा रहा तो उनके सामने इसे सड़कों पर फेंकने के सिवाए कोई और रास्ता नहीं बचेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक दिनों तक आम रखने के क्रम में यदि कीटाणुनाशक का अधिक छिड़काव किया गया तो आम पर चकत्ते के निशान उभर आएंगे, जिसे ग्राहक वैसे भी खरीदना पसंद नहीं करेगा।