दुनिया में योग का परचम

    दिनांक 24-जून-2020   
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आज पूरी दुनिया में योग की ख्याति भारत की ज्ञान परंपरा के प्रतिनिधि के रूप में है। तन और मन को स्वस्थ रखने की चाहत में लोग योग की तरफ न केवल आकर्षित हो रहे हैं, बल्कि इससे लाभान्वित भी हो रहे हैं। अमेरिका, यूरोप ही नहीं, तमाम मुस्लिम देशों में भी योग को खुले दिल से अपनाया जा रहा है
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एरियल योग’ व्यायाम की एक हाइब्रिड शैली है, जिसे जोसेफ पिलेट ने विकसित किया था।
 

जिस तरह हिंदुत्व का केंद्रीय भाव मनुष्य ही नहीं, बल्कि संपूर्ण प्राणी जगत का कल्याण है, प्रकृति के एक-एक अंग के अस्तित्व का सम्मान है, वैसे ही भारत का ज्ञान दर्शन पूरी मानवता के लिए उपयोगी है। भारतीय ज्ञान परंपरा के जिन अवयवों ने पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई है, उसमें एक है योग। योग का प्रसार सहज-स्वाभाविक तरीके से हो रहा है और इसमें भूगोल से लेकर धर्म, कुछ भी बाधा नहीं बन रहा। पूरी दुनिया इसे खुले हाथों से ले रही है, क्योंकि योग शरीर के साथ-साथ मन को भी स्वस्थ रखने में सफल सिद्ध हो रहा है।

जब हम दुनिया में योग की बात करते हैं तो वस्तुत: तीन बातों पर ध्यान जाता है। एक, यह बहुत तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है और यूरोप, अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया वगैरह की तो बात ही छोड़िए, तमाम मुस्लिम देशों में भी इसे खुले दिल से अपनाया जा रहा है। दूसरा, दुनिया में योग और योग से जुड़े उत्पादों का एक बड़ा बाजार खड़ा हो गया है जो इसके असर को और भी प्रभावी बना रहा है। तीसरा, योग से ‘योगा’ का रास्ता तय करने के दौरान दुनिया ने इसमें कई तरह के प्रयोग किए और आज ये भी बड़े लोकप्रिय हो रहे हैं। ये और बात है कि इनका दूरगामी असर क्या होगा, यह चिंता का एक विषय हो सकता है।
 
अमेरिका सबसे बड़ा बाजार
एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में योग और योग से जुड़े उत्पादों का सालाना कारोबार 80 अरब डॉलर से ज्यादा है और योग 30 करोड़ से ज्यादा लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। अमेरिका आज योग का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। वहां 3 करोड़ से अधिक लोग इसका नियमित अभ्यास कर रहे हैं और वहां योग से जुड़ी गतिविधियां 16-18 अरब डॉलर सालाना का बाजार बन गई हैं। खासतौर पर 50 से अधिक उम्र के लोगों में, विशेषकर महिलाओं में यह ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 6,000 से ज्यादा योग स्टूडियो हैं और इनमें बड़ी संख्या ऐसे योग केंद्र्रों की है जहां आम लोगों को योगासन सिखाने के अलावा योग प्रशिक्षक भी तैयार किए जाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि सीखने और सिखाने के आधारभूत ढांचे में हो रहा विस्तार योग के बाजार के और फलने-फूलने का अवसर देगा।

हेल्थ को सबसे बेहतर तरीके से बताने वाला शब्द है-
स्वस्थ। यानी ‘स्व’ में ‘स्थित’ होना और यही
अच्छी सेहत की बुनियादी बात है।
-शमशाद हैदर,  पाकिस्तान के लोकप्रिय योग गुरु

आज अमेरिका में योगक्रांति के ध्वजवाहक के तौर पर न्यूयॉर्क के गैरीसन इलाके में हठयोग आधारित आसनों के लिए जाने जाने वाले चार्ल्स मैटकिन, न्यूयॉर्क की ही अलन्ना कैवल्य, मोनिक शूबर्ट, फिलाडेल्फिया में सक्रिय ‘फ्लो योगा’ सिखाने वाले सिमॉन पार्क, विन्यास योग के साधक कैलिफोर्निया के स्कॉट ब्लॉसम, लॉस एंजिल्स में अष्टांग योग से जुड़े आसनों को सिखाने वाली सिमी क्रूज जैसे नामों की लंबी सूची है। शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसकी उपयोगिता पर भरोसा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

जर्मनी का रिश्ता 1921 से
भारतीय ज्ञान में जर्मनी की शुरू से बड़ी रुचि रही है और वहां के लोगों को योग लुभाता है। योग को लेकर जर्मनी की दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां पहला योग स्कूल वर्ष 1921 में बर्लिन में खुला। आज बर्लिन में 300 और म्यूनिख में 200 से ज्यादा योग स्टूडियो हैं। तकरीबन 30 लाख लोग नियमित योगाभ्यास करते हैं। बाकी देशों की तुलना में जर्मनी में एक बड़ा अंतर यह दिखता है कि वहां की युवा पीढ़ी की योग में बहुत रुचि है और इसका प्रमाण है ऋषिकेश में हर साल चार महीने के लिए बड़ी संख्या में जर्मनी से आने वाले युवा। यहां दो तरह के लोग आते हैं, एक जिन्हें वापस जर्मनी जाकर योग को व्यवसाय के तौर पर अपनाना होता है और दूसरे वे जो योग के दर्शन से आकर्षित होते हैं। विदेशों से आने वाले योग प्रेमियों के कारण ऋषिकेश आज जैसे भारत की योग राजधानी बन गया है।

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शमशाद हैदर पाकिस्तान के घर-घर में योग को पहुंचाना चाहते हैं।

पाकिस्तान के ‘रामदेव’
शमशाद हैदर को पाकिस्तान का योग गुरु रामदेव कह सकते हैं। वह आज पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में लोगों को योग सिखा रहे हैं और हजारों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। शमशाद हैदर योग को कला और विज्ञान, दोनों मानते हैं। विज्ञान इसलिए कि यह शरीर को रोगों से मुक्त करने वाला ज्ञान है और कला इसलिए कि यह सकारात्मक रहते हुए जीने की विधा सिखाता है। शमशाद की पत्नी शुमैला इस्लामाबाद की रहने वाली हैं, जहां हर साल करीब एक माह के लिए वनस्पति से होने वाला पोलन नाम का संक्रमण फैलता है और जिन लोगों को सांस की शिकायत होती है, उनके लिए यह समय काफी दुखदायी होता है। शुमैला भी पहले दमे की रोगी थीं और शमशाद हैदर के निर्देशन में उन्होंने यौगिक क्रियाओं का नियमित अभ्यास शुरू किया और अब वह बिल्कुल ठीक हैं। वह भी योग के प्रचार-प्रसार में पति का हाथ बंटा रही हैं। 
   
हरिद्वार के साधकों से योग सीखने वाले शमशाद के लिए योग के पीछे का दर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि जब तक उसे नहीं समझेंगे, इसका अधिकतम लाभ नहीं ले सकेंगे। वह कहते हैं कि शरीर के रोगमुक्त होने की अवस्था को अंग्रेजी में ‘हेल्दी’, ऊर्दू में ‘सेहतमंद’ और हिंदी में ‘स्वस्थ’ कहते हैं। लेकिन रोगमुक्त शरीर को सबसे अच्छी तरह ‘स्वस्थ’ शब्द से ही समझा जा सकता है। वह कहते हैं कि ‘स्वस्थ’ का अर्थ है ‘स्व’ में ‘स्थित’ होना यानी आपकी शारीरिक रोगमुक्ति की कुंजी आपके भीतर ही छिपी है। एक मौके पर वह इसे और स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि स्व में तभी स्थित हो सकते हैं जब बाहर की दुनिया को देखने-सुनने की क्रिया से खुद को अलग करते हुए अपने अंदर देखें-सुनें। यानी वह अंतर्यात्रा की बात करते हैं। वह कहते हैं कि इस क्रिया के दौरान तन और मन का संतुलन बनता है और इसी अवस्था को योग कहते हैं। इसके साथ ही वह ‘ऊं’ की तर्ज पर ‘हो’ के उच्चारण का अभ्यास करते और कराते हैं और ‘स्व’ में स्थित होने में इसे सहायक मानते हैं। बेशक मुसलमानों के एक वर्ग में योग को लेकर भ्रांतियां हैं और वे इसे गैर-इस्लामिक मानते हैं, लेकिन शमशाद ऐसा नहीं मानते। उनका मानना है कि योग या यौगिक क्रियाओं को इस्लाम के खिलाफ कहना नासमझी के अलावा कुछ भी नहीं।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में योग और इससे जुड़े उत्पादों का सालाना कारोबार 80 अरब डॉलर से ज्यादा है। योग 30 करोड़ से ज्यादा लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। अमेरिका आज योग का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। वहां 3 करोड़ से अधिक लोग इसका नियमित अभ्यास कर रहे हैं और वहां योग से जुड़ी गतिविधियां 16-18 अरब डॉलर सालाना का बाजार बन गई हैं।

एक अन्य इस्लामिक देश सऊदी अरब में नऊफ मरवई आज एक जानी-मानी हस्ती हैं। नऊफ प्रामाणिक योग प्रशिक्षक हैं। 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित नऊफ ने केरल से योग की शिक्षा हासिल की और सऊदी अरब में उनके कई योग स्टूडियो हैं। नऊफ की कोशिशों और युवराज मोहम्मद बिन सलमान की इस्लाम को कट्टरपन के खांचे से बाहर निकालने की सोच का ही नतीजा है कि सऊदी में योग को आज खेल का दर्जा प्राप्त है और बड़ी संख्या में महिलाओं से लेकर बच्चियां तक इसके आसन सीख रही हैं। सऊदी की पहली योग प्रशिक्षक नऊफ में रोग प्रतिरोधक क्षमता संबंधी जन्मजात गड़बड़ी थी और इसका उपचार उन्होंने योगासनों से ही किया। शुरू में उन्हें काफी तकलीफ होती थी और आसन पूरी तरह हो भी नहीं पाता था, लेकिन धीरे-धीरे वे इन्हें करने लगीं और अब तो उन्हें योग करते हुए दो दशक से भी अधिक समय बीत चुका है और वह इसे ताउम्र करते रहने का इरादा रखती हैं।

योग और प्रयोग
दुनिया में योग के क्षेत्र में धड़ल्ले से प्रयोग भी हो रहे हैं। शावर योगा, पावर योगा, साइलेंट डिस्को योगा, एरियल योगा, बियर योगा, गांजा योगा से लेकर ‘नेकेड’ योगा तक चलन में आ गया है। प्रयोग हमेशा अच्छा हो, यह जरूरी नहीं। इसके अपने खतरे हैं। ‘योग’का विधान तय है और इस शब्द की गरिमा अभ्यास के उन शास्त्रीय तरीकों से हैं। बियर और गांजा पीते हुए योग करना तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वैसे ही, एरियल योगा व्यायाम की एक हाइब्रिड शैली है, जिसमें 20वीं सदी के आरंभ में जोसेफ पिलेट द्वारा निकाले गए व्यायाम के तरीकों को मिलाते हुए कपड़े के झूले के सहारे इसे किया जाता है।

इस तरह के प्रयोगों का खतरा यह है कि इसमें घायल होने की संभावना होती है और दूसरा समयसिद्ध आसानों और यौगिक क्रियाओं का स्वरूप बिगड़ता है। कालातंर में इसका असर क्या होगा, आज यह कहना वाकई मुश्किल है। इसमें कोई शंका नहीं कि बदलाव प्रकृति का नियम है और यह प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है। लेकिन मनुष्य ने अपनी विकास यात्रा में तमाम उन्नत सभ्यताओं से लेकर विधाओं को लुप्त होते भी देखा है। आज योग दुनिया को लुभाता है, इसलिए बिकता है और इसलिए एक ब्रांड बन गया है और बाजार को लगता है कि विभिन्न व्यायाम शैलियों के मिश्रण के नाम में ‘योग’ शब्द को जोड़कर इसके बाजार मूल्य को बढ़ाया जा सकता है। यह प्रवृत्ति निंसंदेह ही किसी सुविचारित षड्यंत्र का हिस्सा नहीं, लेकिन यह सोचना चाहिए कि अनजाने में कहीं यह एक समृद्ध और वैज्ञानिक कसौटी पर खरी उतरने वाली ज्ञान परंपरा को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही?
     (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)