पाकिस्तान: सिख नाबालिग लड़की का मजहबियों ने किया अपहरण, दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंध समिति ने इमरान खान को याद दिलाया वादा

    दिनांक 25-जून-2020   
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जकोबाबाद में वजीर हुसैन नामक एक युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर सिख लड़की का पहले अपहरण किया गया और फिर जबरन कन्वर्जन कराकर उससे निकाह कर लिया
 
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अल्पसंख्यकों के अधिकार और उनकी सुरक्षा को लेकर लंबी-लंबी हांकने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने ही देश के हिंदू, सिखों, ईसाइयों की फिक्र नहीं। उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। यहां तक कि रोजाना मजहबी गुंडे कन्वर्जन की नियत से अल्पसंख्यकों की बहु-बेटियां दिन दहाड़े उठा ले जा रहे हैं। फिर भी सरकार के माथे पर जूं नहीं रेंग रही। इस क्रम में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से एक नाबालिग सिख लड़की के अपहरण और कन्वर्जन की खबर है। इस घटना पर दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मंजीत सिंह सिरसा ने नाराजगी जाहिर की है।

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    सिख लड़की के अपहरण और कन्वर्जन का मामला सिंध के जकोबाबाद का है। सिखों की बागड़ी जाति के अमर सिंह जकोबाबाद के बशीर पेट्रोल पंज के निकट फुटपाथी जिंदगी गुजार रहे हैं। उनकी 16 वर्षीय पुत्री रेशमा उनके साथ रहती थी। गत दिनों वजीर हुसैन नामक एक युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर रेशमा का अपहरण कर लिया और जबरन कन्वर्जन कर उससे शादी कर ली।

   इस मामले में जकोबाबाद के सदर थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस के दबाव पर अपरणकर्ता वजीर हुसैन ने दलील दी है कि रेशमा 19 वर्ष की हो चुकी है। बालिग होने के नाते वह अपनी मर्जी से शादी के लिए स्वतंत्र है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में कन्वर्जन रोकने के लिए 18 वर्ष से कम उम्र में अंतर-धर्मीय विवाह पर प्रतिबंध लगा हुआ है। मगर यहां जाली सर्टिफीकेट बनाने वाले ऐसे सैंकड़ों गिरोह सक्रिय हैं, जो पलभर में नाबालिग को बालिग होने का प्रमाण बना देते हैं। पुलिस और न्यायालय भी ऐसे जाली प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकताकी पड़ताल करना जरूरी नहीं समझता।


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मान लिया जाता है कि उनके समक्ष पेश किया गया प्रमाण पत्र सही ही होगा। इस कारण अल्पसंख्यक वर्ग की  बच्चियों का कन्वर्जन की नियत से अपहरण किए जाने के बाद उनके मां-बाप को साबित करने में पसीने छूट जाते हैं कि उनकी बच्ची नाबालिग है। अनपढ़ बच्चियों के मामले में तो यह नामुमकिन सा ही है।

अमर सिंह की पुत्री रेशमा भी पढ़ी-लिखी नहीं है। इसके लिए वह पुलिस के सामने अब तक यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी पुत्री नाबालिग है और वह खुद नहीं गई। उसका अपहरण किया गया है। दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मंजीत सिंह सिरसा ने एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री इमरान खान से अपील की है कि यदि वे अल्पसंख्यकों की सलामती का दंम भरते हैं तो ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाएं। साथ ही रेशमा को बरामद कर उसके मां-बाप को सौंपा जाए। पाकिस्तान के अल्पसंख्य आयोग ने भी कन्वर्जन की नियत से हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियों के अपहरण की घटनाओं पर चिंता जताई की है। आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक वर्ष में ऐसी घटनाओं में इजाफा हुआ है।