‘चालाक चीन को मिलेगा करारा जवाब’

    दिनांक 29-जून-2020   
Total Views |
पाञ्चजन्य ब्यूरो
कांग्रेस के शासनकाल में देश की अखण्डता से समझौता करते हुए भारत की जमीन चीन और पाकिस्तान को दी जाती रही। लेकिन आज हम विश्व की अग्रणी पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं। अगले दस साल में हम चीन को पीछे छोड़ देंगे इसलिए हमें उस हैसियत के साथ बर्ताव करना होगा

ramlal_1  H x W
वेबिनार को संबोधित करते हुए श्री राममाधव

गत 24 जून की शाम पाञ्चजन्य और आर्गनाइजर ने देश के अनेक प्रतिष्ठित वेब पोर्टल के सहयोग से एक वेबीनार का आयोजन किया। विषय था भारत-चीन सीमा विवाद। इसमें मुख्य वक्ता के नाते उपस्थित थे भारतीय जनता पार्टी के महासचिव श्री राम माधव और रा.स्व. संघ के सहसम्पर्क प्रमुख श्री रामलाल। वेबीनार में देश के अनेक जाने-माने रक्षा विशेषज्ञ, सशस्त्र सेनाओं के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, कूटनीतिक, विदेश मामलों के जानकार और पत्रकार उपस्थित थे।



ramlal_1  H x W
श्री रामलाल
अपने संबोधन में श्री राममाधव ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में ‘विपरीत भूदान’ आंदोलन जैसा चलता रहा और चीन एवं पाकिस्तान को देश की जमीन दी जाती रही। उन्होंने कहा कि अब केन्द्र्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र्र मोदी की सरकार किसी को भी देश की इंच भर जमीन हड़पने नहीं देगी, क्योंकि भाजपा एकमात्र पार्टी है जिसने एक विचारधारा का अनुसरण किया और देश की अखंडता के लिए बलिदान दिये। उल्लेखनीय है कि 24 जून को देश की अखण्डता अक्षुण्ण रखने के लिए एक प्रधान, एक निशान, एक विधान का नारा देते हुए नेहरू सरकार में मंत्री पद से त्यागपत्र देकर जनसंघ की स्थापना करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में प्राणोत्सर्ग किया था। शेख अब्दुल्ला के राज में जेल में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी।

पार्टी में रणनीतिक महत्व के मुद्दों को देख रहे श्री रामामाधव ने आगे कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश की अखण्डता से समझौता करते हुए भारत की जमीन चीन और पाकिस्तान को दी जाती रही। इसी सदी में सियाचिन को भी पाकिस्तान को देने की कोशिश की गयी। 2013 में लद्दाख के चुमार क्षेत्र में भारत को बेहद अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। भारत का कद एवं स्थिति दयनीय बना दी गयी थी, लेकिन आज हम विश्व की अग्रणी पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं। अगले दस साल में हम चीन को पीछे छोड़ देंगे इसलिए हमें उस हैसियत के साथ बर्ताव करना होगा।

उन्होंने कहा कि हम कोई युद्ध छेड़ने नहीं जा रहे हैं और न ही युद्धोन्माद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। हम शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाना चाहते हैं, लेकिन यह भी सत्य है कि आक्रामक तेवरों को हम नहीं सहेंगे। भारत की प्राथमिकता दो स्तरीय पहल की है। एक, हम कूटनीतिक एवं सैन्य वार्ताएं करके शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास करेंगे और दूसरा, सीमा पर हमारी जमीन के लिए हम सक्रियता से अपना दावा करते रहेंगे। हमारा प्रयास होगा कि आखिरी इंच जमीन की रक्षा हो। भारतीय सीमा पर बीते कुछ दशकों में चीनी गतिविधियों से स्पष्ट है कि चीन की सेना और नेतृत्व अपने विचारक सुन त्जू के सिद्धांत पर चल रहा है कि युद्ध छेड़े बिना भूमि पर अधिकार करते चलो। उन्होंने कहा कि चीन इसीलिए जानबूझकर वास्तविक नियंत्रण रेखा के स्पष्ट रेखांकन की बात से सदा ही मुकरता आया है। हर पांच साल में सीमा संबंधी एक समझौता अपने कुटिल इरादों को छिपाने के लिए करता आया है। हर बार हमारी जमीन कब्जाने के बाद कांग्रेस की सरकारों से संधि करके वह हथियाई जमीन पर पैर जमाता गया। सरकार नरसिंह राव की रही हो, या मनमोहन सिंह की, निहित स्वार्थी तत्वों के बहकावे में चीन की हर हरकत नजरअंदाज करके समझौते किये गए। मनमोहन सिंह ने तो यहां तक कहा था कि नियंत्रण रेखा स्पष्ट नहीं है इसलिए गलतफहमी हो जाती है।

श्री राममाधव ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार सक्रियता से जमीनी स्तर पर विवाद को निपटाने का प्रयास करती आ रही है। इस संबंध में उन्होंने गत 6 वर्ष के दौरान भारत और चीन के बीच विभिन्न स्तरों पर हुई वार्ताओं तथा प्रधानमंत्री मोदी और चीन के शीर्ष नेता शी जिनपिन के बीच अनेक अवसरों पर हुई चर्चाओं का हवाला दिया। श्री राममाधव ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार सीमा पर चीन को कोई ढांचा खड़ा नहीं करने देगी। यही वजह है कि यह तनाव उपजा है, लेकिन भारत अपने इरादे से कदम पीछे नहीं खींचेगा। भारत का संकल्प स्पष्ट है जो अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केन्द्र्र शासित प्रदेश बनाने से और साफ हुआ है जिसमें क्रमश: पाक अधिक्रांत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को शामिल किया गया है। उनके अनुसार मौजूदा तनाव के बीच दो स्तर पर रास्ता निकालने की कोशिश करनी होगी, एक, सैन्य वार्ता के जरिए और दो, कूटनीतिक प्रयासों के जरिए।   

इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख श्री रामलाल ने कहा कि लद्दाख में सैन्य टकराव भारत एवं चीन की जनता के बीच टकराव नहीं है। यह दरअसल दो विचारधाराओं का टकराव है। विस्तारवाद एवं अधिनायकवाद पर चलने वाले चीन के व्यवहार में झूठ, छल—कपट एवं धोखेबाजी है, जबकि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने वाला देश है। कोरोना पर चीन के झूठ को दुनिया जान गई है इसलिए उसके किसी भी वादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता। हमें अपनी सैन्य तैयारी रखते हुए, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखनी होगी क्योंकि सैन्य तैयारी ही सबसे उचित निरोधक का कार्य करेगी। आज भारत में नेतृत्व, सेना एवं समाज, तीनों की एकजुटता एवं सामन्जस्य अच्छा है। समाज जागरूक है और किसी के बहकावे में नहीं आ सकता है।

कार्यक्रम में भारतीय सेना के पूर्व उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि गत 15 जून को चीन का झूठ और फरेब उजागर हुआ था। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने वहां जो शौर्य दिखाया उसे आने वाले लंबे समय तक याद रखा जाएगा। ले. जनरल सिंह ने सुझाव दिया कि सरकार को चीन से निपटने के लिए लद्दाख स्काउट्स को विस्तार देने एवं मजबूत बनाने तथा आईटीबीपी को सेना के साथ जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने बलिदानी सैनिकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि 35 लाख रुपए से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए करने का भी आग्रह किया।
 
 
विस्तारवाद एवं अधिनायकवाद पर चलने वाले चीन के व्यवहार में झूठ, छल—कपट एवं धोखेबाजी है, जबकि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने वाला देश है। कोरोना पर चीन के झूठ को दुनिया जान गई है इसलिए उसके किसी भी वादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता। हमें अपनी सैन्य तैयारी रखते हुए, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखनी होगी। आज भारत में नेतृत्व, सेना एवं समाज, तीनों में एकजुटता एवं सामंजस्य  है।


 

सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख रह चुके सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल बी.एस. जायसवाल ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिन की नीयत पर सवाल उठाये और कहा कि अंदरूनी दबावों के कारण वह ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने चीन को कूटनीतिक रूप से विश्व में अलग-थलग करने तथा साइबर हमले से निपटने की तैयारी करने का सुझाव दिया। चीन मामलों की विशेषज्ञ भास्वती मुखर्जी ने कहा कि अगर चीन संधियों का सम्मान नहीं करता तो उनको बदलना होगा। फेक न्यूज फैलाने वालों पर लगाम कसनी होगी। हमें चीन को तुष्ट नहीं करना, बल्कि उसने हमला किया तो मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी रखनी होगी। सेवानिवृत्त ले. जनरल वर्मा ने कहा कि चीन धोखेबाज देश है। दुनिया पता लगा रही है कि कोरोना कहीं उसके जैविक हमले का हिस्सा तो नहीं है। उनका कहना था कि हमें यह नहीं कहना चाहिए कि हमारी सीमा चीन के साथ लगती है, बल्कि कहना चाहिए कि हमारी सीमा तिब्बत के साथ लगती है।

पूर्व राजदूत वीणा सीकरी ने कहा कि भारत—चीन के बीच बदले विमर्श की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करनी होगी। लोगों को और मीडिया को चीन की असलियत बतानी होगी। हमें पूरे मनोयोग से सेना के साथ खड़े होना है। चीन को आर्थिक रूप से भी सबक सिखाने की जरूरत है जिसके लिए हमें अपने निर्माण क्षेत्र को और मजबूत बनाना होगा। सेवानिवृत्त ले. जन. निर्भय शर्मा ने कहा कि सीमा पर ढांचागत सुविधाओं पर काम जारी रखना हमारे संकल्प को दर्शाता है। हमें नाहक आक्रामक हुए बिना सही वक्त का इंतजार करना होगा। सेवानिवृत्त ले. जन. अरुण साहनी का कहना था कि मीडिया को भारत का सही नजरिया बताने की जरूरत है। हमें अपने रणनीतिक संवाद को और चुस्त बनाना होगा। विदेश मामलों के जानकार सर्वेश कौशल ने कहा कि युद्ध के लिए पूरी तैयारी दिखाना निरोधक का काम करेगा इसलिए उस मोर्चे पर कोई ढील नहीं दी जा सकती। सेना, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और मीडिया, इन चार मोर्चों पर सतत काम करना होगा। वरिष्ठ नौसेना अधिकारी रहे शेखर सिन्हा ने भारत को सभी मंचों पर खुलकर अपना पक्ष रखने की सलाह दी, भले चीन जो भी सोचे। उन्होंने कहा कि हिन्द महासागर में चीनी हरकतों के प्रति हमें सावधान रहना होगा।

अंत में श्री रामलाल ने सभी उपस्थितों का धन्यवाद दिया और ऐसी सार्थक चर्चा आगे भी करते रहने का सुझाव दिया। वेबीनार में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर और आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर विशेष रूप से उपस्थित थे। वेबीनार का संचालन इंडिया फाउंडेशन के श्री चंद्र्र वधवा ने किया।