बलूचिस्तान में फौजी जुल्म के खिलाफ उतरीं महिलाएं

    दिनांक 29-जून-2020   
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बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक बड़ी रैली निकाली गई जिसकी अगुवाई महिलाओं ने की। इसमें हर उम्र के हजारों लोग शामिल हुए और इमरान सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगे। दरअसल, बलूचिस्तान में बढ़ते फौजी जुल्म के साथ-साथ लोगों का सब्र भी टूटता जा रहा है

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पाकिस्तान के फौजी जुल्म के खिलाफ बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में महिलाओं की अगुवाई में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं और वे पाकिस्तान और फौज के खिलाफ नारे लगा रहे थे। ये लोग 11 साल पहले पाकिस्तान की बदनाम फौजी यूनिट फ्रंटियर कॉर्प्स द्वारा अगवा किए गए डॉक्टर दीन मोहम्मद के बारे में जानकारी हासिल करने की मांग के साथ प्रदर्शन कर रहे थे।
क्वेटा में रविवार, 28 जून को बलूच औरतों की अगुवाई में हुई यह रैली अकबर खान चौक से शुरू हुई और प्रेस क्लब पर जाकर खत्म हुई। रैली में डॉ. दीन मोहम्मद की बेटियां भी शरीक हुईं। ये महिलाएं पाकिस्तानी हुकूमत और उसकी बदनाम फौज के खिलाफ नारे लगा रही थीं। इनकी मांग थी कि ड़ॉ. दीन मोहम्मद के साथ फौज ने क्या किया, इसकी जानकारी दे। रैली के पूरे रास्ते पर पुलिस की तैनाती की गई थी। प्रेस क्लब पहुंचकर महिलाओं ने मीडिया वालों के सामने अपनी बात रखी और बताया कि कैसे 11 साल पहले 28 जून, 2009 को फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान डॉ. दीन मोहम्मद के घर में घुस गए थे और उन्होंने परिवार के सामने ही उनके साथ बुरी तरह मारपीट की और फिर उन्हें हथकड़ी पहनाकर आंखों पर पट्टी बांधकर सेना की गाड़ी में डालकर ले गए थे। उसके बाद से डॉ. दीन का कोई पता नहीं। डॉ. दीन बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रही बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) से जुड़े थे। बीएनएम नेता कमाल बलोच ने कहा, “ पाकिस्तान और पाकिस्तान की फौज बलूचों के खिलाफ वहशियाना हरकत कर रही है और अफसोस की बात है कि इंसानी हुकूक के पैरोकार मुल्क और यूएनएचआरसी ने एक तरह से आंखें मूंद रखी हैं। हजारों-हजार लोग लापता हैं। हजारों लोगों को यहां-वहां मारकर दफन कर दिया गया है। ऐसे तमाम कब्र मिल चुके हैं। क्या किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है?” बीएनएम के कई लोगों को फौज ने निशाना बनाया है और इसके तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को फौज ने अगवा कर लिया, कितनों को मार डाला।
कहीं कोई सुनवाई नहीं
दीन मोहम्मद को अगवा किए जाने के अगले ही दिन उनकी पत्नी और बेटियों ने क्वेटा प्रेस क्लब में प्रेस कान्फ्रेंस करके मीडिया को पूरी घटना की जानकारी दी थी। परिवार वालों ने बड़ी मशक्कत के बाद खुजदार थाने में इस बाबत एफआईआर भी दर्ज कराई थी। शुरू में पुलिसवाले केस दर्ज करने में आनाकानी कर रहे थे। पुलिस ने किसी तरह एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन उसके बाद उनकी ओर से कोई जांच-पड़ताल नहीं की गई जिसके बाद मजबूर होकर घरवालों ने बलूचिस्तान हाईकोर्ट में याचिका भी डाली, लेकिन इसके बाद भी डॉ. दीन का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। डॉ. दीन की बेटी मेहलाब दीन बलोच, उनके बेटे मंसूर के साथ वॉयस ऑफ बलोच मिसिंग पर्सन्स के वाइस चेयरमैन मामा कादिर बलोच इस्लामाबाद में भूख हड़ताल पर भी बैठ चुके हैं लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत पर कोई असर नहीं हुआ। मेहलाब पिता के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए दर-दर की ठोकरें खा-खाकर परेशान हो गई हैं।
एमनेस्टी के निर्देशों का भी असर नहीं
वर्ष 2013 के सितंबर महीने में हजारों बलूच परिवारों ने अपने-अपने रिश्तेदारों के फौज के हाथों अगवा कर लिए जाने के खिलाफ क्वेटा से इस्लामाबाद तक का ढाई हजार किलोमीटर का लंबा मार्च किया था। इसमें मेहलाब भी शरीक हुई थीं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्य वाच और पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने पाकिस्तान सरकार को डॉ. दीन को रिहा करने के लिए कहा, लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ। आज दर-दर की ठोकरें खाकर मेहलाब परेशान हो चुकी हैं। वह कहती हैं, “ अब मैं इस जगह को छोड़ देना चाहती हूं। बलूचिस्तान की जमीन बेकसूर लोगों के खून से सनी हुई है। इंसानियत के कातिलों को पूरी तरह छूट मिली हुई है। वे जब चाहें, जिसे चाहें कत्ल कर दें, जिसे चाहें अगवा कर लें। वे चार साल की ब्रम्श की आंखों के सामने उसकी मां की हत्या कर सकते हैं। किसी को अगवा लोगों की कोई फिक्र नहीं। पाकिस्तानी फौज के जुल्म को यहां के हर घर ने झेला है। हर की अपनी-अपनी कहानी है। लेकिन किसी को जैसे कोई फिक्र ही नहीं। यहां के लोगों की जिंदगी जानवरों से भी बदतर है और लोग हुकूमती दहशतगर्दी का सामना कर रहे हैं।”
कमाल बलोच कहते हैं, “ अपनी कौमी आजादी के लिए बलोचों का जज्बा हर जुल्म के साथ बढ़ता ही गया है। अगर पाकिस्तान यह सोचता है कि वह जुल्म की बदौलत हमारी आवाज को दबा देगा, तो वह ख्वाब देख रहा है। हम अंतिम सांस तक मुल्क को आजाद कराने के लिए लड़ते रहेंगे। हम आज यह लड़ाई अपनी रवायत, अपनी तारीख और आने वाली नस्लों के लिए लड़ रहे हैं।”
पाकिस्तान से पहले आजाद हुए बलूचिस्तान पर पाकिस्तान की फौज ने जबरन कब्जा कर रखा है और इसके खिलाफ बलोच लंबे अरसे से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें भारत की आजादी का आंदोलन बड़ा प्रेरित करता है और उन्हें भरोसा है कि वह दिन दूर नहीं जब बलूचिस्तान एक आजाद मुल्क होगा।