भारतीय सैनिकों से हुई झड़प में मारे गए चीन के सैनिकों के परिवारों ने मांगा सम्मान

    दिनांक 29-जून-2020   
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और यह सम्मान चीन की सरकार अपने मारे गए सैनिकों को देने को तैयार नहीं है। चीन के लोगों में इस बात का गुस्सा दिखने लगा है। मारे गए सैनिकों के परिजन मांग रहे हैं सम्मान और चीन का कहना है अभी ये जरूरी नहीं है

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पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून की रात हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान बलिदान हुए तो चीन के 43 सैनिक मारे गए। यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। भारत का यदि एक भी सैनिक बलिदान होता है तो पूरे देश की आंखें नम होती हैं। भारत के सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बाद सरकार भी उन्हें पूरा सम्मान देती है, वहीं चीन में सैनिकों और उनके परिवार का सम्मान तो दूर की बात जनता को उन सैनिकों के नाम तक नहीं बताए जाते हैं जो लड़ते हुए मारे गए। भारत की बलिदान हुए जवानों की तरह  सम्मान की मांग कर रहे चीनी सैनिकों के परिवारों को शांत करने की कोशिश करते हुए ड्रैगन ने कहा दिया है कि बाद में बताएंगे।

सत्ताधारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के एडिटर हू शिजिन ने एक लेख में लिखा, ''सेना में मरने वालों को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है और समाज को बाद में सही समय पर सूचना दी जाएगी ।
वहीं चीन में मारे गए सैनिकों के परिजन ट्वीट करके अपना दुःख जाता रहे हैं. उनका कहना है कि भारत की तरह हमारे बेटों का हमारी सरकार ने फूलों से सम्मान नहीं किया बस हमें उनकी अस्थियां सौंप दीं. इन परिजनों ने आरोप लगाया है कि हमारे साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम किसान हैं और हमारे मारे गए बेटे किसानों के बेटे थे.