अस्पृश्यता निवारण सामाजिक क्रांति का पहला कदम है: बाबासाहेब

    दिनांक 03-जून-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 49:-

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दलितोत्थान को लेकर आंबेडकरजी का दृष्टिकोण एकदम स्पष्ट था। वे कहते थे, ‘दलितोन्नति का कार्य राष्ट्रकार्य है। देश के एक पंचमांष जनसमूह को विकलांग (सामाजिक रूढ़ि से) रखना देशहित और विकास में बाधक होगा। हिंदू धर्म की अस्पृश्यता रूढ़ि का असर मुसलमान, क्रिश्चियन आदि धर्मों पर भी हुआ है। इस प्रथा का समूल उच्चाटन होने से समाज में संगठित शक्ति को पुष्टि मिलेगी, उसके अलावा अन्य धर्मावलंबियों की मनोवृत्ति में भी फर्क आ जाएगा। मेरे कार्य की प्रेरणा केवल तात्कालिक देशहित नहीं है, वह भारत की मूलगामी सामाजिक क्रांति से जुड़ी है। यह व्यक्ति-व्यक्ति के संबधों की स्वतंत्रता, समता और बंधुभाव इन तत्वों को दृढ़ करने वाला है। अस्पृश्यता निवारण का हमारा कार्य सामाजिक क्रांति का पहला कदम है। दलित मुक्ति आंदोलन समता प्रस्थापित करने के लिए था। इसके लिए उन्होंने प्रतिकार और बहिष्कार दोनों मार्गों का अवलंबन लिया।