तनाव बढ़ाता रहेगा चीन

    दिनांक 04-जून-2020
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जयदेव रानाडे
चीन ने जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र में भी पाकिस्तानी भाषा बोलनी शुरू कर दी है क्योंकि उस क्षेत्र से उसके आर्थिक हित जुड़े हैं
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लद्दाख सीमा पर चीन के सैनिकों के सामने दीवार बनकर खड़े भारतीय जवान (दाएं)

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ वक्त में कम से कम छह स्थानों पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ हुई है। इसने एक बार फिर से भारत—चीन रिश्तों में तनावों को रेखांकित किया है। भारत-चीन संबंधों और भारतीय जनमत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली ये घुसपैठ ऐसे समय पर हुई है जब भारत और पूरी दुनिया अर्थव्यवस्थाओं और मानव जीवन को भारी नुकसान पहुंचा रही कोविड-19 महामारी से लड़ने में जुटी हैं। इसमें संदेह नहीं है कि चीन की सैन्य कार्रवाई सावधानीपूर्वक नियोजित करके की गई है।

इस समय हुई घुसपैठ पहले के मौकों पर हुई घुसपैठ से इस मायने में अलग है कि इस बार गलवां घाटी में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन हुआ है, जबकि उस स्थान पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वर्षों से सहमति थी। लद्दाख सेक्टर के पैगांग त्सो झील, गलवां घाटी और हॉट स्प्रिंग्स इलाकों में और उत्तरी सिक्किम के नाकू ला में घुसपैठ जानबूझकर की गई है जिनका नियोजन और समन्वयन सावधानीपूर्वक किया गया है। इस कार्रवाई के लिए निर्देश और अनुमोदन चीन के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर से आया होगा। लद्दाख क्षेत्र में सैन्य नियोजन और कार्रवाई में शामिल होतान मिलिट्री सब-डिस्ट्रिक्ट और आली (न्गारी) मिलिट्री सब-डिस्ट्रिक्ट, दोनों पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण सिंक्यांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के अधीन हैं। उत्तरी सिक्किम के नाकू ला में घुसपैठ की योजना बनाने और इसे अंजाम देने की जिम्मेदारी तिब्बत सैन्य क्षेत्र के तहत शिगात्से मिलिट्री सब-डिस्ट्रिक्ट द्वारा की गई होगी। उल्लेखनीय है कि इन सैन्य क्षेत्रों पर पीएलए की पश्चिमी क्षेत्र कमान का नियंत्रण है, जो चीन के पांच सैन्य क्षेत्र कमानों में सबसे बड़ी है और जिसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से सटे क्षेत्रों में चीनी नागरिकों और चीनी संपत्तियों की सुरक्षा का काम सौंपा गया है।

चीन की इस कार्रवाई के पीछे कई कारक हैं। इन कारकों में शामिल हैं—(1) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने पद छोड़ने की अभूतपूर्व मांग उठने समेत उन पर घरेलू दबावों का बढ़ना; (2) चीन में इस धारणा का बढ़ना कि 'चीनी स्वप्न' उसके नेतृत्व की पकड़ से फिसल रहा है; (3) भारत को दृश्यमान रूप से अमेरिका के ज्यादा करीब समझा जाना, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से; (4) भारत और अन्य देशों को कोविड महामारी से निपटने में व्यस्त समझते हुए चीन द्वारा इस समय को घुसपैठ के लिए उपयुक्त समझना, और (5) यह मानना कि चीन के इन कदमों का पाकिस्तान स्वागत करेगा। यह भी संभव है कि पाकिस्तान ने इसमें किसी तरह की भूमिका निभाई हो, क्योंकि इस साल मार्च से चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) में एक पाकिस्तानी अधिकारी तैनात है।

भारत द्वारा गत 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 में संशोधन और अनुच्छेद 35ए को निरस्त करने के बाद से चीन- पाकिस्तान संबंधों का पहले से ज्यादा खुला प्रदर्शन किया जा रहा है, ज्यादा साहसिक भाव-भंगिमा दिखाई जा रही है। कश्मीर के मसले पर इन दोनों देशों के हित एक जैसे हैं जबकि अतिरिक्त रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के कारण काफी बड़े क्षेत्र में चीन के रणनीतिक और वित्तीय हित दांव पर हैं। बीती 8 अप्रैल को, संयुक्त राष्ट्र में चीनी दूत झाओ जुन ने 5 अगस्त, 2019 के बाद से चौथी बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाया। उनके कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि चीन कश्मीर के ‘मौजूदा हालात पर गहराई से ध्यान देता है’ और इस मसले को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ घोषणा-पत्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर ठीक से और शांति से हल किया जाना चाहिए।’ इसमें यह भी कहा गया था कि चीन ‘स्थिति की जटिलता बढ़ाने वाली किसी भी एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध करता है।’

इस बीच, चीन इन और अन्य क्षेत्रों पर अपनी दावेदारी जता रहा है। गत 21 अप्रैल को इसने अपने आधिकारिक डिजिटल नक्शे को अद्यतन किया था और भारत की सीमा से लगे तिब्बत के सात जिलों की सीमाओं में संशोधन किया था। इस नक्शे में चीनी दावेदारी वाले क्षेत्रों को ‘भारत-नियंत्रित’ के बजाय ‘भारत-अधिगृहीत’ क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। इन गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि चीनी घुसपैठ जारी रहेगी। वह उत्तरोत्तर ज्यादा निडर बन सकता है। यह भी साफ है कि चीन की ओर से सीमा मुद्दा जल्दी सुलझाए जाने की संभावना नहीं है।
(लेखक भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव रहे हैं और वर्तमान में सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटेजी के अध्यक्ष हैं)