वेबिनार पाञ्चजन्य-आर्गनाइजर: ‘‘संकट में हर नागरिक के साथ खड़ी है सरकार’’

    दिनांक 04-जून-2020
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पाञ्चजन्य ब्यूरो 
गत 24 मई को ‘पाञ्चजन्य’ और ‘आॅर्गनाइजर’ के तत्वावधान में देश के  अनेक प्रसिद्ध मीडिया पोर्टल के सहयोग से ‘वेबिनार’ के माध्यम से एक संवाद आयोजित किया गया। विषय था- ‘कोरोना संक्रमण काल  सजगता से सफलता।’ मुख्य वक्ता थे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। संवाद की भूमिका रखते हुए ‘आॅर्गनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में  उत्तर प्रदेश सरकार संवेदनशीलता के साथ हर चुनौती का सामना कर रही है। इस समय भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया सदी की सबसे बड़ी महामारी से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश इस महामारी का पूरी मुस्तैदी से हर मोर्चे पर मुकाबला कर रहा है। प्रदेश के आम नागरिकों, कामगारों, श्रमिकों की चिन्ता करने के साथ ही, अर्थव्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं को चुस्त बनाए रखा गया है। यह सब कैसे संभव हुआ, इस विषय पर योगी आदित्यनाथ अपनी बात रखने के लिए हमारे बीच उपस्थित हैं। योगी आदित्यनाथ ने  अपने वक्तव्य में प्रदेश में प्रशासनिक तत्परता से कोरोना संकट से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सफलतापूर्वक सुलझाने के सूत्रों की चर्चा की।  यहां प्रस्तुत हैं योगी आदित्यनाथ के उसी वक्तव्य के प्रमुख अंश
 
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कोरोना महामारी को लेकर दुनिया के मुकाबले भारत के सामने ज्यादा बड़ी चुनौती थी। परंतु समय से लिए गए स्पष्ट फैसले के कारण आज भारत अपने आपको सुरक्षित स्थिति में पाता है। यह देश के एक सक्षम और सुदृढ़ नेतृत्व के कारण संभव हो पाया है। उत्तर प्रदेश में यदि कोई सफलता प्राप्त हुई है तो मैं इसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देता हूं, जिनका मार्गदर्शन और प्रेरणा हमें हर तीसर-चौथे दिन किसी न किसी रूप में प्राप्त होती है। उत्तर प्रदेश भारत की सबसे बड़Þी आबादी वाला राज्य है। 23-24 करोड़ लोग उत्तर प्रदेश में रहते हैं। हमारे राज्य की सीमा सात राज्यों से मिलती है। उत्तर में नेपाल इस प्रदेश की सीमा को छूता है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के साथ हमारी सीमा जुड़ती है। इस कारण कोरोना की दृष्टि से उत्तर प्रदेश की स्थिति और भी संवेदनशील थी।
 
20,37,000 श्रमिकों के खाते में 1,000 रु.
 
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17 मार्च को ही कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों को आर्थिक सहायता पहुंचाने का निर्णय ले लिया था। इसके लिए एक समिति बनाई गई। समिति ने तीन दिन में अपनी रपट दे दी। उसके बाद प्रदेश के श्रम विभाग में पंजीकृत 20,37,000 श्रमिकों में से प्रत्येक के खाते में 1,000 रु. जमा कराए गए।
 
 

सक्षम मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति
जब कोई सक्षम मार्गदर्शक हो और कार्य करने की एक दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कठिन से कठिन चुनौती भी हमारे लिए कुछ नए अवसर लेकर आती है। प्रधानमंत्री जी ने मार्च के प्रथम सप्ताह में जो बातें कही थीं, आज वही बातें आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। लोगों का एक जगह जमावड़ा न हो, इसके लिए होली मिलन जैसे कार्यक्रम रद्द किए गए। हम देख रहे हैं कि जहां-जहां लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन किया, वहां अच्छे परिणाम आए हैं। 12 मार्च को मैंने कोरोना के संबंध में पहली बैठक की। तब तक उत्तर प्रदेश में कोरोना के दो मामले आ चुके थे। 13-14 मार्च को पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों को बंद किया गया। फिर 15 मार्च को तकनीकी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया। इसके बाद बड़े-बड़े मॉल, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स इन सबको बंद करने का निर्णय लिया। इसी दौरान उत्तर प्रदेश में एक अंतरराष्टÑीय किक्रेट मैच होने वाला था। मैंने कहा कि इसमें कोई दर्शक नहीं रहेगा। इस पर आयोजक सहमत हो गए, पर बाद में क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इसको भी स्थगित कर दिया। तब तक 22 मार्च आ गया और पूरे देश में एक दिन का जनता कर्फ्यू लगा। इसके बाद 23 मार्च से तीन दिन के लिए 16 जनपदों में ‘लॉकडाउन’ लागू किया। 25 मार्च से तो पूरे देश में ‘लॉकडाउन’ शुरू हुआ, जो अभी भी चल रहा है।

अंत्योदय योजना के लाभार्थी
 
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अंत्योदय योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के 37,51,000, शहरी क्षेत्र के 3,43,000 और असंगठित क्षेत्र के 15,60,000 लोगों में से प्रत्येक के बैंक खाते में 1,000 रु. की राशि जमा कराई गई।

 
 
श्रमिको के पलायन का प्रबंधन
सबसे बड़ी चुनौती थी प्रवासी श्रमिकों का पलायन। प्रवासी श्रमिक अचानक दिल्ली से पलायन करके उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ने लगे। उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यदि पूर्वी भारत की तरफ जाना हो तो उत्तर प्रदेश होकर ही जाना पड़ता है। स्वाभाविक रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल को जाने वाले लाखों श्रमिक उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर गए। वे लोग पैदल ही आगे बढ़ने लगे। यह हमारे लिए पहली चुनौती थी। इस संबंध में मैंने भारत सरकार से बातचीत की और लगभग 16,000 बसें दिल्ली से लगी उत्तर प्रदेश की सीमा पर लगार्इं। इन श्रमिकों की ‘स्क्रीनिंग’ करने के साथ-साथ इन्हें 24 घंटे के अंदर इनके गृह जनपद तक पहुंचाने का काम शुरू हुआ। हम जानते थे कि यह एक बहुत बड़ी आपदा बनने जा रही है। इसलिए उसी के अनुसार तैयारी शुरू की। पूरी व्यवस्था ठीक से चले, इसके लिए मंत्रियों के अलग-अलग समूह बनाए गए। इन समूहों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की अध्यक्षता में भी समितियां बनाई गइं। 
 
 मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित पहली समिति अलग-अलग राज्यों और भारत सरकार के साथ संवाद स्थापित करने का काम करती है। दूसरी समिति औद्योगिक संस्थानों के बारे में है। इसको औद्योगिक श्रमिकों की समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई। जैसे ‘लॉकडाउन’ के दौरान भी श्रमिकों को मानदेय मिले, वेतन मिले, भोजन आदि की व्यवस्था हो। तीसरी समिति कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई। इसे ‘लॉकडाउन’ के दौरान आवश्यक वस्तुओं और खाद्यान्न की आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई। इन वस्तुओं की कहीं कोई कमी न हो, इसलिए इस समिति को जनपद से लेकर गांव तक विस्तार दिया गया। चौथी समिति अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी। इसे ‘लॉकडाउन’ के पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही इस समिति से कहा गया कि यदि कहीं कोई पलायन करे, तो उसकी चिंता करे, उसको सम्मानजनक ढंग से उसके घर तक पहुंचाए।
 
पांचवीं समिति अपर मुख्य सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में गठित की गई। इसका काम है जरूरत के अनुसार ‘क्वारंटाइन सेंटर’ बनाना और ‘सामुदायिक रसोई’ की व्यवस्था करना, ताकि कहीं कोई भूखा न रहे। छठी समिति प्रमुख सचिव (ग्राम्य विकास) की अध्यक्षता में बनाई गई। यह समिति स्वच्छता अभियान चलाने के साथ-साथ पेयजल का संकट दूर करने का काम कर रही है। सातवीं समिति प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में बनी। यह समिति स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी के साथ कोविड (लेवल 1-2-3) अस्पताल की श्रृंखला खड़ी कर रही है। ‘टेस्टिंग लैब’ की स्थापना कर रही है। आठवीं समिति डीजीपी की अध्यक्षता में गठित हुई है, जो प्रदेश के अंदर कानून-व्यवस्था को संभाल रही है। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए भी यह समिति काम कर रही है। नौवीं समिति अपर मुख्य सचिव (वित्त) की अध्यक्षता में काम कर रही है। बैंकों में भीड़ न हो, प्रदेश में राजस्व की कमी न होने पाए, कर्मचारियों को वेतन मिले और अवकाशप्राप्त कर्मचारियों को समय पर पेंशन मिल सके, ये सब काम यह समिति देख रही है।
 
 
83,83,000 लोगों को अग्रिम पेंशन
 
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प्रदेश में लागू विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 83,83,000 लोगों को दी जाने वाली त्रैमासिक पेंशन की धनराशि, दो माह की अग्रिम पेंशन के साथ दी गई। इसमें वृद्धावस्था पेंशन के 46,97,000 लाभार्थी, दिव्यांगजन पेंशन के 10,76,000 लाभार्थी, निराश्रित और विधवा महिला पेंशन के 26,10,000 लाभार्थी शामिल हैं।

 
खेती-किसानी की चिंता
प्रमुख सचिव (कृषि) की अध्यक्षता में बनी समिति किसानों की समस्याओं को निपटा रही है। ‘लॉकडाउन’ के दौरान भी प्रदेश में 119 चीनी मिलों को चलाया गया। 1,200 से अधिक र्इंट भट्ठों का संचालन हुआ। 2,500 से अधिक ‘कोल्ड स्टोरेज’ चलवाए गए। जरूरी चीजों को बनाने वाले उद्योगों को चलवाया गया। पीपीई किट, एन-95 मास्क, सेनेटाइजर आदि का निर्माण शुरू किया गया। अब तक प्रदेश के 18 करोड़ लोगों को पांच बार सफलतापूर्वक नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया है। इन सभी लोगों को 1 जून से फिर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए छठा अभियान शुरू हो रहा है। आप देख रहे हैं कि इन दिनों पूरे देश से मजदूर पलायन कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं हो रहा है।  उत्तर प्रदेश में 25 लाख मजदूर काम करते हैं। इनमें से एक भी व्यक्ति पलायन नहीं कर रहा है, क्योंकि ‘लॉकडाउन’ के दौरान भी उन्हें मानदेय दिया गया। अब तो इन 25 लाख में से 22 लाख श्रमिक काम पर भी आ चुके हैं। समितियों के अधिकारी प्रतिदिन मेरे साथ बैठक करते हैं।
 
स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़े कदम
जब कोरोना का पहला लक्षण उत्तर प्रदेश में आया था तब हमारे पास ‘लैब’ नहीं थी, ‘कोविड हॉस्पिटल’ नहीं थे, पीपीई किट नहीं थी। 40 रु. में मिलने वाले ‘सेनेटाइजर’ की कीमत  500-600 रु. हो गई थी। इसके बाद प्रदेश के सभी चीनी मिलों को ‘सेनेटाइजर’ बनाने के साधन उपलब्ध कराए गए। कुछ ही समय में इतना ‘सेनेटाइजर’ तैयार होने लगा कि प्रदेश की जरूरतें तो पूरी हुर्इं, साथ ही हमने 28 राज्यों को भी ‘सेनेटाइजर’ उपलब्ध करवाया। आज उत्तर प्रदेश में पीपीई किट बनाने की 28 इकाइयां मौजूद हैं। यहां सभी प्रकार के मास्क भी बनाए जा रहे हैं।  आज हमारे पास 26 ‘लैब’ हैं। प्रतिदिन 10,000 लोगों की जांच करने की क्षमता प्राप्त कर चुके हैं। आज उत्तर प्रदेश में एक साथ 78,000 कोरोना रोगी का उपचार हो सकता है। इतनी बड़ी आबादी वाले प्रदेश में अब तक कोरोना के 6,000 मरीज हैं। इनमें से भी 3,400 ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। ये तब है जब 28 मार्च को दिल्ली से लगभग 4-5 लाख कामगार प्रदेशमें आए।
 
जमात की चुनौती
प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित घर पहुंचाने का काम पूरा होते ही तब्लीगी जमात का नया संकट हमारे सामने आया था। मैं 29-30 मार्च को नोएडा और गाजियाबाद के दौरे पर था। वहीं मुझे जानकारी मिली कि दिल्ली के एक मरकज में एक बड़ा आयोजन हुआ है और उसमें उत्तर प्रदेश के लोग भी थे। मैं कार्यक्रम स्थगित करके तुरंत वापस आया। हर जिले को सावधान किया और कहा कि तब्लीगी जमात से जुड़े लोग जहां भी हैं उन्हें तत्काल ‘क्वारंटाइन’ करिए, उनको उठाकर बंद करिए। अगर ये बाहर आ गए तो संक्रमण तेजी से फैलेगा। देखते ही देखते 48 घंटे के अंदर 5,000 से अधिक जमातियों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभ में जितने भी मरीज थे, उनमें 90 फीसदी तब्लीगी जमात से जुड़े थे। इन्हीं के कारण संक्रमण तेजी से फैला। उन पर कार्रवाई करने के बाद काफी हद तक संक्रमण नियंत्रण में आ गया था। शुरू में हमारे पास सबसे खराब मामले दो जगह से आए थे एक आगरा और दूसरा नोएडा से। हमारी टीम ने बहुत ही सूझबूझ के साथ काम किया। इसलिए आज उत्तर प्रदेश अच्छी स्थिति में है।
 
 
श्रमिकों की चिंता
 
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‘लॉकडाउन’ हो जाने के बाद फैक्ट्रियों में कार्यरत श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही रोकने के लिए सरकार ने कदम उठाए।  2,163 इकाइयों ने श्रमिकों के रहने की व्यवस्था की। इस अवधि में ही 3,541  इकाइयों द्वारा श्रमिकों को भुगतान किया गया। करीब 1,425 इकाइयों को चालू रखा गया। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए करीब 12 हजार ईंट-भट्ठों का कार्य चालू रखा गया। इस कारण प्रदेश से श्रमिकों का पलायन नहीं हुआ।
 
 
दूसरे राज्यों में फंसे अपने कामगारों को निकालने में रेल मंत्रालय ने हमारी बड़ी मदद की। नजदीकी राज्य जैसे हरियाणा, मध्य प्रदेश से कामगारों को लाने के लिए बसों का इस्तेमाल किया गया। राजस्थान के कोटा में हमारे 12,000 से अधिक विद्यार्थी थे। उन्हें लाने के लिए हमने बसें भेजीं, कम पड़ी तो राजस्थान परिवहन निगम की बसों की सेवा ली गई। इसका किराया दिया गया है। इसके अलावा हम लोगों ने श्रमिक स्पेशन रेल का उपयोग किया। अब तक उत्तर प्रदेश में लगभग 11500 श्रमिक रेलगाड़ी आई है। उत्तर प्रदेश में लगभग 15 लाख लोगों को ‘क्वारंटाइन’ में रखने की सुविधा है। बाहर से आने वाले श्रमिकों की जांच की जाती है। यदि उनमें किसी प्रकार का कोई लक्षण नहीं मिलता है तो 15 दिन का राशन किट देकर सरकारी साधन से उन्हें उनके घरों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे लोगों पर ध्यान रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं।
 
मुंबई से आने वाले कामगारों में 75 फीसदी और दिल्ली से आने वालों में 50 प्रतिशत संक्रमित पाए जा रहे हैं। अन्य राज्यों से जो आ रहे हैं, उनमें से 25-30 प्रतिशत संक्रमित मिल रहे हैं। इस प्रकार हमारे सामने अभी चुनौती बनी हुई है। पूरे प्रदेश में 75,000 से अधिक मेडिकल टीमें काम कर रही हैं।