पाकिस्तान है कि बाज आता नहीं, भारत स्थित उच्चायोग के जरिए लगा है साजिश रचने में

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पिछले दिनों दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के दो अधिकारियों को रंगे हाथों जासूसी एवं खुफिया गतिविधियों को अंजाम देते हुए पकड़ा गया। यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से पाकिस्तानी हरकत उजागर हुई हो। पाकिस्तान सदैव इसी तरह के एजेंटों के जरिए अपने भारतीय उच्चायोग का प्रयोग कश्मीर में इस्लामिक आतंकियों को मजबूती देने और भारत में अराजकता फैलाने के लिए करता आया है

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पिछले दिनों दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के दो अधिकारियों को रंगे हाथों सूचना के बदले 15000 रुपये और आई फोन और खुफिया गतिविधियों को अंजाम देते हुये पकड़ा गया। उन्हें 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया गया। यह दोनों आईएसआई अधिकारी हैं। शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने स्वयं को भारतीय नागरिक होने का दावा किया और पुलिसकर्मियों को चकमा देने के लिए भारतीय आधार कार्ड भी दिखाये। पर छानबीन में उनकी कारगुजारी पकड़ी गई। दरअसल यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान द्वारा ऐसी हरकत की गई हो। इससे पहले भी इस तरह की नापाक हरकत सामने आ चुकी हैं।

गौरतलब है कि दुनिया के सभी राष्ट्र अपने दूतावासों में अपने राष्ट्र की सुरक्षा एजेंसियों के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न रूपों में रखते आए हैं। अधिकांश ऐसे खुफिया तंत्र से जुड़े लोग अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों द्वारा चिन्हित होते हैं। मित्र राष्ट्र इनके माध्यम से आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। परंतु भारत-पाकिस्तान के संबंध इस क्षेत्र में भी सदैव अपने नकारात्मक स्तर पर रहे हैं। पाकिस्तान सदैव अपने भारतीय उच्चायोग का प्रयोग कश्मीरी इस्लामिक आतंकियों और इस्लामिक अलगाववादियों से मिलने और उन्हें दिशा निर्देशित करने के लिए करता आया है। अनेक इफ्तार पार्टियों की आड़ में यह सिलसिला वर्षों तक अबाध गति से चलता रहा। भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग के अनेक सदस्य इन पार्टियों का हिस्सा होते रहे। भारत में इस्लामिक आतंक और अलगाववाद के बीज यहीं बोये गए।

अक्टूबर, 2016 में भी दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान उच्चायोगकर्मी को पकड़कर एक खुफिया रैकेट का भंडाफोड़ किया था। आईएसआई खुफिया तंत्र द्वारा संचालित यह एक सतत प्रक्रिया है।  भारत में इस्लामिक आतंक की अनेक कड़ियां पाकिस्तान उच्चायोग से जुड़ती रही हैं परंतु कड़ी कार्रवाई के अभाव में इन पर विराम नहीं लगा। पर अब चीजें बदली हैं और इन पर कड़ी कार्रवाई भी की जा रही है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान भारत मेंं अस्थिरता फैलाने और भारतीय रक्षा संस्थानों की जानकारी लेने के लिए अपना जाल हर समय फैलाने की जुगत में रहता है। इसके लिए दिल्ली स्थित उसका उच्चायोग सबसे सुरक्षित और सदुपयोगी स्थान है।


आईएसआई करती है खुफिया सूचना जुटाने के लिए एजेंटों को भर्ती
 
आईएसआई के लिए दिल्ली में अपने लिए एजेंट भर्ती करना मुश्किल काम नहीं है। वह कई तरह के प्रलोभन देकर ऐसे एजेंटों के जरिए खुफिया सूचनाएं एक़त्र करता है और फिर भारत विरोधी कार्यों में उसका इस्तेमाल करता है। पिछले दिनों दिल्ली में हुए दंगे एवं नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने के बाद देश में जो अराजकता फैली उसमें आईएसआई की गतिविधि को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। इस पूरी अराजकता में पीएफ़आई द्वारा उत्तर प्रदेश की हिंसा में बड़ी फंडिंग और पीएफ़आई के आईएसआई से संबंध पाकिस्तान की भारत विरोधी सांप्रदायिक गतिविधियों को सुलगाने की रणनीति को खुलकर उजागर किया है